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बदमाशों की दुकान बंद करनी है, इन पर सख्ती करें : डीजीपी
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फोटो -
- पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने सभी एसपी, कमिश्नर, एसएचओ व चौकी इंचार्ज को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पेशेवर बदमाशों के लिए धमकी-वसूली एक धंधा है, उनकी दुकान बंद करनी है। जो फरार हैं उनको ढूंढ कर जेल में भेजिए। अपने इलाके में रह रहे बदमाशों के गुर्गों पर सख्ती करे। फुटबॉल की तर्ज पर गुंडों और उनके गुर्गों की मैन टू मैन मार्किंग करें फिर वे जेल-बेल पर हों या फरार चल रहे हों उन पर कड़ी निगाह रखें। पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने सभी एसपी, कमिश्नर, थाना प्रभारियों और चौकी इंचार्जों को पत्र लिखकर ये निर्देश दिए हैं।
डीजीपी ने कहा कि जिन्हें गुंड़ों बदमशों से खतरा है उनकी रक्षा करे और उनके संपर्क में रहें। उन्हें बंदूक का लाइसेंस और ट्रेनिंग दिला दें। उन्हें बचाव के लिए उपाय एवं रोजाना रूटीन के लिए गाइड करें। निजी सुरक्षा की बारीकी से जांच करे और सीआईडी के आकलन के बाद ही सुरक्षा दें। ऐसी तैनाती की साप्ताहिक समीक्षा करें। पुलिस का काम है बदमाशों से भिड़े रहना वरना लोगों की सुरक्षा कमजोर पड़ जाएगी।
डीजीपी ने कहा कि अक्सर माॅल-सिनेमा, शादी-मैयत में कुछ फुकरे लोग पुलिस सुरक्षा का शो-ऑफ करते दिख जाते हैं। ऐसे तिकड़मियों को ब्लैकलिस्ट कर दें। पुलिस को ऐसे बेकार के काम में उलझाने का मतलब नहीं है। हिंसक अपराधियों की सूची बनाकर उनकी प्रॉपर्टी जब्त करें, नाजायज कब्जे ढहाएं, पासपोर्ट जब्त करें, हिस्ट्री शीट अपडेट करें और उनके मिलने-जुलने वालों का हिसाब रखें। डीजीपी ने अधिकारियों को कहा कि जो बदमाश आपकी जानकारी में हैं और आपके इलाके में वारदात की हिमाकत कर जाएं तो मैं इसे आपकी कोताही मानूंगा।
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- पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने सभी एसपी, कमिश्नर, एसएचओ व चौकी इंचार्ज को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पेशेवर बदमाशों के लिए धमकी-वसूली एक धंधा है, उनकी दुकान बंद करनी है। जो फरार हैं उनको ढूंढ कर जेल में भेजिए। अपने इलाके में रह रहे बदमाशों के गुर्गों पर सख्ती करे। फुटबॉल की तर्ज पर गुंडों और उनके गुर्गों की मैन टू मैन मार्किंग करें फिर वे जेल-बेल पर हों या फरार चल रहे हों उन पर कड़ी निगाह रखें। पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने सभी एसपी, कमिश्नर, थाना प्रभारियों और चौकी इंचार्जों को पत्र लिखकर ये निर्देश दिए हैं।
डीजीपी ने कहा कि जिन्हें गुंड़ों बदमशों से खतरा है उनकी रक्षा करे और उनके संपर्क में रहें। उन्हें बंदूक का लाइसेंस और ट्रेनिंग दिला दें। उन्हें बचाव के लिए उपाय एवं रोजाना रूटीन के लिए गाइड करें। निजी सुरक्षा की बारीकी से जांच करे और सीआईडी के आकलन के बाद ही सुरक्षा दें। ऐसी तैनाती की साप्ताहिक समीक्षा करें। पुलिस का काम है बदमाशों से भिड़े रहना वरना लोगों की सुरक्षा कमजोर पड़ जाएगी।
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डीजीपी ने कहा कि अक्सर माॅल-सिनेमा, शादी-मैयत में कुछ फुकरे लोग पुलिस सुरक्षा का शो-ऑफ करते दिख जाते हैं। ऐसे तिकड़मियों को ब्लैकलिस्ट कर दें। पुलिस को ऐसे बेकार के काम में उलझाने का मतलब नहीं है। हिंसक अपराधियों की सूची बनाकर उनकी प्रॉपर्टी जब्त करें, नाजायज कब्जे ढहाएं, पासपोर्ट जब्त करें, हिस्ट्री शीट अपडेट करें और उनके मिलने-जुलने वालों का हिसाब रखें। डीजीपी ने अधिकारियों को कहा कि जो बदमाश आपकी जानकारी में हैं और आपके इलाके में वारदात की हिमाकत कर जाएं तो मैं इसे आपकी कोताही मानूंगा।
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