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निजी अस्पतालों में 5 बीमारियों का इलाज बंद होना मरीजों की जान से खिलवाड़ : हुड्डा
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, सरकार ने प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र का बंटाधार कर दिया है। आयुष्मान योजना में कटौती के कारण निजी अस्पतालों द्वारा पांच बीमारियों का इलाज करने से मना करना मरीजों की जान से खिलवाड़ हैं। इनमें मोतियाबिंद का ऑपरेशन, बच्चेदानी का ऑपरेशन, पित्त की थैली, उल्टी दस्त और सांस संबंधी बीमारियां शामिल हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार के फैसले पर हैरानी जताई है। आरोप है समय पर निजी अस्पतालों को भुगतान करने की बजाय सरकार ने उन पांच बीमारियों का इलाज करवाना ही बंद कर दिया, जो सबसे अधिक हैं। हुड्डा ने कहा कि प्रदेशभर में हर साल पांच हजार से अधिक लोग सड़क हादसे में जान गंवाते हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के मुफ्त इलाज की योजना को राज्य का स्वास्थ्य विभाग लागू नहीं कर रहा है। इसी के चलते निजी अस्पतालों ने सड़क हादसे में घायल मरीजों का इलाज नहीं करने का फैसला लिया है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और सुविधाएं दोनों नहीं हैं। कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य विश्वविद्यालय, 6 नए मेडिकल कॉलेज, एम्स व नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट जैसे संस्थान स्थापित किए थे।
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चंडीगढ़। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, सरकार ने प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र का बंटाधार कर दिया है। आयुष्मान योजना में कटौती के कारण निजी अस्पतालों द्वारा पांच बीमारियों का इलाज करने से मना करना मरीजों की जान से खिलवाड़ हैं। इनमें मोतियाबिंद का ऑपरेशन, बच्चेदानी का ऑपरेशन, पित्त की थैली, उल्टी दस्त और सांस संबंधी बीमारियां शामिल हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सरकार के फैसले पर हैरानी जताई है। आरोप है समय पर निजी अस्पतालों को भुगतान करने की बजाय सरकार ने उन पांच बीमारियों का इलाज करवाना ही बंद कर दिया, जो सबसे अधिक हैं। हुड्डा ने कहा कि प्रदेशभर में हर साल पांच हजार से अधिक लोग सड़क हादसे में जान गंवाते हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की सड़क दुर्घटनाओं में घायलों के मुफ्त इलाज की योजना को राज्य का स्वास्थ्य विभाग लागू नहीं कर रहा है। इसी के चलते निजी अस्पतालों ने सड़क हादसे में घायल मरीजों का इलाज नहीं करने का फैसला लिया है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और सुविधाएं दोनों नहीं हैं। कांग्रेस सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य विश्वविद्यालय, 6 नए मेडिकल कॉलेज, एम्स व नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट जैसे संस्थान स्थापित किए थे।