फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Senior Haryana officials accused of undisclosed assets and corruption, case reaches High Court.

Chandigarh-Haryana News: हरियाणा के वरिष्ठ अधिकारियों पर अघोषित संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोप, मामला पहुंचा हाईकोर्ट

विज्ञापन
- आरोपों की सीबीआई जांच की जनहित याचिका में की गई है मांग
विज्ञापन


चंडीगढ़। हरियाणा सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और अघोषित संपत्ति के मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर एक जनहित याचिका पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में दाखिल की गई है। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता बलजीत बेनिवाल ने एडवोकेट रोज गुप्ता के माध्यम से दाखिल की है।
याचिका में अदालत से निवेदन किया गया है कि इन मामलों की जांच राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जाए ताकि जांच स्वतंत्र और पारदर्शी रूप से पूरी हो सके। याचिका में आरोप लगाया गया कि आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार और उनके दिवंगत पति आईपीएस अधिकारी वाई. पूरण कुमार से संबंधित अघोषित संपत्ति के मामलों की जांच में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य की एजेंसियां इन मामलों में प्रभावशाली अधिकारियों के दबाव में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर पा रही हैं।
विज्ञापन



इसी प्रकार आईएएस अधिकारी डी. सुरेश के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों को भी सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन अधिकारियों से जुड़े मामलों में जांच को जानबूझकर धीमा किया गया है ताकि ठोस साक्ष्य सामने न आ सकें। याचिका में आईपीएस की आत्महत्या के मामले की जांच समय पर पूरी करने की चंडीगढ़ पुलिस को निर्देश देने की अपील की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस प्रकरण के बाद जांच से ध्यान भटकाने के लिए कुछ व्यक्तियों की ओर से जातिगत और व्यक्तिगत मुद्दों को हवा दी जा रही है। याचिका में कहा कि इस विवाद को मीडिया और सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है ताकि भ्रष्टाचार और अघोषित संपत्ति के मामलों की जांच कमजोर हो जाए। याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि ऐसी अपुष्ट खबरों और मीडिया रिपोर्टों को रोका जाए जो जांच को प्रभावित कर सकती हैं या किसी व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं। अपुष्ट दस्तावेजों, निजी बयानों और अफवाहों के आधार पर खबरें प्रकाशित की जा रही हैं, जिससे जनमानस भ्रमित हो रहा है। इससे जांच एजेंसियों पर भी दबाव बन रहा है और प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed