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चयन प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए नहीं चलाया जा सकता : हाईकोर्ट
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-2014 की भर्ती से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने किया दखल से इन्कार
-वन रक्षक के 9 पद रिक्त होने की दलील देते हुए याची ने मांगी थी नियुक्ति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वन रक्षक के पद के लिए 2014 के विज्ञापन में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक खुला नहीं रखा जा सकता, क्योंकि यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा। यह टिप्पणियां प्रधान मुख्य वन संरक्षक, पंचकूला द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की गईं। इसमें याचिकाकर्ताओं के सुरक्षा गार्ड के रूप में नियुक्ति के दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्राप्त अंक (117.40) बीसी-बी श्रेणी के अंतिम चयनित उम्मीदवार (117.60) से कम है।
नरेश कुमार व अन्य का दावा था कि मेरिट सूची में संशोधन के बाद बीसी-बी श्रेणी में 17 पद उपलब्ध हुए, जिन्हें प्रतिवादी विभाग ने भर दिया। हालांकि, केवल 10 लोगों ने कार्यभार संभाला, 7 ने कार्यभार नहीं संभाला और पिछली मेरिट सूची में चयनित 2 लोगों ने भी कार्यभार नहीं संभाला। इसलिए, 9 पद रिक्त हैं और याचिकाकर्ता प्रतीक्षा सूची में होने के कारण वन रक्षक के पद पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
पीठ ने कहा कि परिणाम 2014 से संबंधित है और पहले ही एक दशक से अधिक समय बीत चुका है और सूची स्वयं पुरानी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस बीच विभिन्न चयन प्रक्रियाओं में बड़ी संख्या में लोगों की नियुक्ति हो चुकी होगी। संवैधानिक न्यायालय को ऐसे मामलों में आत्म-संयम लागू करने की आवश्यकता है जहां देरी को अच्छी तरह से समझाया नहीं गया हो। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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-वन रक्षक के 9 पद रिक्त होने की दलील देते हुए याची ने मांगी थी नियुक्ति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वन रक्षक के पद के लिए 2014 के विज्ञापन में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि चयन प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक खुला नहीं रखा जा सकता, क्योंकि यह अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होगा। यह टिप्पणियां प्रधान मुख्य वन संरक्षक, पंचकूला द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की गईं। इसमें याचिकाकर्ताओं के सुरक्षा गार्ड के रूप में नियुक्ति के दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि याचिकाकर्ताओं द्वारा प्राप्त अंक (117.40) बीसी-बी श्रेणी के अंतिम चयनित उम्मीदवार (117.60) से कम है।
नरेश कुमार व अन्य का दावा था कि मेरिट सूची में संशोधन के बाद बीसी-बी श्रेणी में 17 पद उपलब्ध हुए, जिन्हें प्रतिवादी विभाग ने भर दिया। हालांकि, केवल 10 लोगों ने कार्यभार संभाला, 7 ने कार्यभार नहीं संभाला और पिछली मेरिट सूची में चयनित 2 लोगों ने भी कार्यभार नहीं संभाला। इसलिए, 9 पद रिक्त हैं और याचिकाकर्ता प्रतीक्षा सूची में होने के कारण वन रक्षक के पद पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
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पीठ ने कहा कि परिणाम 2014 से संबंधित है और पहले ही एक दशक से अधिक समय बीत चुका है और सूची स्वयं पुरानी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस बीच विभिन्न चयन प्रक्रियाओं में बड़ी संख्या में लोगों की नियुक्ति हो चुकी होगी। संवैधानिक न्यायालय को ऐसे मामलों में आत्म-संयम लागू करने की आवश्यकता है जहां देरी को अच्छी तरह से समझाया नहीं गया हो। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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