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ग्रुप सी में चयनित 10 हजार कर्मियों को राहत: सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी खारिज, सेवाओं में बने रहने का रास्ता साफ

Wed, 15 Jul 2026 10:13 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 15 Jul 2026 10:13 AM IST
सार

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष हिम्मत सिंह ने कहा कि यह फैसला ग्रुप-20 भर्ती से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों के हित में आया है। यह न्याय, सत्य और संघर्ष के साथ-साथ प्रदेश के युवाओं की मेहनत, धैर्य एवं विश्वास की जीत है।

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Relief for selected Group C personnel SLP dismissed by Supreme Court path cleared to retain jobs
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट से ग्रुप सी में चयनित 10458 कर्मियों को बड़ी राहत मिली है।

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सुप्रीम कोर्ट ने उस विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया है, जिसमें 27 मार्च को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 24 ग्रुपों की भर्ती प्रक्रिया को सही माना था। इस फैसले से 10458 कर्मियों के सेवा में बने रहने का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और चयनित उम्मीदवार लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में बिना उन्हें पक्षकार बनाए उनके चयन को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

यह मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की ओर से 27 मार्च को पारित आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने अपने 27 मार्च 2026 के निर्णय में स्पष्ट रूप से माना था कि 24 ग्रुपों (जिसमें ग्रुप-20 भी शामिल है) की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, चयनित अभ्यर्थी नियुक्त होकर काफी समय से सेवाएं दे रहे हैं और उन्हें बिना पक्षकार बनाए उनके चयन को प्रभावित नहीं किया जा सकता।
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उच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि सामाजिक-आर्थिक अंकों का सीईटी-2 के लिए अभ्यर्थियों को बुलाने की मेरिट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा था। इसलिए पूर्व में भर्ती प्रक्रिया और सीईटी परिणामों को निरस्त करने संबंधी आदेशों में त्रुटि थी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य के लिए आयोग को दिए गए दिशा-निर्देश केवल भावी भर्तियों पर लागू होंगे। 24 ग्रुपों के चयनित एवं नियुक्त अभ्यर्थी विधि के अनुसार सेवा में बने रहेंगे।
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हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ कुछ अभ्यर्थियों ने 27 मार्च 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की थी। याचिका में उच्च न्यायालय के निर्णय पर रोक लगाने व उसे निरस्त करने की मांग की गई थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। इसके साथ ही पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का 27 मार्च का निर्णय यथावत रहेगा।


आयोग ने हर स्तर पर प्रभावी ढंग से रखा पक्ष : हिम्मत सिंह
हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष हिम्मत सिंह ने कहा कि यह फैसला ग्रुप-20 भर्ती से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों के हित में आया है। यह न्याय, सत्य और संघर्ष के साथ-साथ प्रदेश के युवाओं की मेहनत, धैर्य एवं विश्वास की जीत है। पूरे प्रकरण के दौरान हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए मजबूती से उनके साथ खड़ा रहा और हर स्तर पर तथ्यों व नियमों के आधार पर अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखा। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता, विधिक प्रक्रिया तथा चयनित अभ्यर्थियों के अधिकारों पर विश्वास को और सुदृढ़ करता है।

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