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आईएएस अशोक खेमका को राहत: हाईकोर्ट ने कहा-समान परिस्थितियों वाले IAS अधिकारियों में भेदभाव अस्वीकार्य

Sat, 06 Jun 2026 01:04 PM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Sat, 06 Jun 2026 01:04 PM IST
सार

अशोक खेमका, 1991 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। वर्ष 2010 में उन्हें केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के लिए एम्पैनल किया गया था। वर्ष 2019 में उनके बैच के अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एम्पैनल कर दिया गया, लेकिन खेमका को यह लाभ नहीं दिया गया।

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Relief for IAS officer Ashok Khemka Punjab Haryana High Court
अशोक खेमका। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा के चर्चित और बेबाक छवि वाले वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। 
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हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के आदेशों को रद्द करते हुए कहा है कि अशोक खेमका को भी अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर केंद्र सरकार में एम्पैनल अधिकारियों के समान माना जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब समान परिस्थितियों वाले कई अन्य आईएएस अधिकारियों को नियमों में छूट देकर यह लाभ दिया जा चुका है, तब खेमका को इससे वंचित रखना संविधान के समानता के सिद्धांत के विपरीत है।

अशोक खेमका, 1991 बैच के हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं। वर्ष 2010 में उन्हें केंद्र सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के लिए एम्पैनल किया गया था। वर्ष 2019 में उनके बैच के अन्य अधिकारियों को अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एम्पैनल कर दिया गया, लेकिन खेमका को यह लाभ नहीं दिया गया। केंद्र सरकार का तर्क था कि उन्होंने केंद्र में उप सचिव या उससे ऊपर के पद पर न्यूनतम तीन वर्ष की प्रतिनियुक्ति नहीं की, जो अतिरिक्त सचिव स्तर के एम्पैनलमेंट के लिए आवश्यक शर्त है।
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इस निर्णय को खेमका ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में खेमका ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने अतीत में कई अधिकारियों को इस शर्त में छूट देकर अतिरिक्त सचिव और सचिव स्तर पर एम्पैनल किया है। इसलिए उनके मामले में अलग रवैया अपनाना भेदभावपूर्ण है।
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सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष 20 ऐसे आईएएस अधिकारियों का रिकॉर्ड रखा गया जिन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का आवश्यक अनुभव न होने के बावजूद अतिरिक्त सचिव अथवा सचिव स्तर पर एम्पैनल किया गया था। इनमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल सहित विभिन्न राज्यों के अधिकारी शामिल थे। अदालत ने यह भी पाया कि खेमका का दावा खारिज होने के बाद भी तमिलनाडु कैडर के आईएएस अधिकारी जे. राधाकृष्णन को इसी प्रकार की छूट देकर अतिरिक्त सचिव स्तर पर एम्पैनल किया गया था।

खंडपीठ ने कहा कि केंद्र सरकार यह बताने में असफल रही कि जब अन्य अधिकारियों को नियमों में छूट दी गई तो खेमका को वही लाभ क्यों नहीं दिया गया। अदालत ने माना कि समान परिस्थितियों वाले अधिकारियों के साथ अलग व्यवहार करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है।


हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अशोक खेमका अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें केंद्र सरकार में अतिरिक्त सचिव या सचिव पद पर प्रत्यक्ष नियुक्ति का लाभ नहीं मिल सकता। लेकिन भविष्य में किसी आयोग, प्राधिकरण, बोर्ड या अन्य सार्वजनिक पद पर नियुक्ति के लिए यदि अतिरिक्त सचिव स्तर का एम्पैनलमेंट वरीयता की शर्त हो तो खेमका को भी उसी श्रेणी में माना जाएगा, जैसे उन्हें अतिरिक्त सचिव/सचिव स्तर पर एम्पैनल किया गया हो। इसी के साथ हाईकोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार कर ली।
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