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Chandigarh-Haryana News: रियल एस्टेट कारोबारी रूप बंसल को हाईकोर्ट से मिली आंशिक राहत
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- जज को रिश्वत की साजिश मामले की याचिका वापस लेने की मंजूरी
चंडीगढ़। हरियाणा की ट्रायल कोर्ट के एक जज को रिश्वत देने की साजिश से जुड़े गंभीर मामले में आरोपी रियल एस्टेट डेवलपर रूप बंसल को आंशिक राहत देते हुए उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी है। याचिका बंसल ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए दायर की थी। याची पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की अन्य धाराओं में आरोप लगे हैं।
हाईकोर्ट में यह मामला पहले से ही काफी विवादित और संवेदनशीलता का कारण बन चुका था। बंसल ने फरवरी 2026 में अपनी पहली याचिका वापस लेकर कहा था कि वह बेहतर तथ्यों के साथ नई याचिका दाखिल करेंगे। इसके बाद अप्रैल में उन्होंने दोबारा एफआईआर को चुनौती देते हुए नई याचिका दायर की। लेकिन कुछ समय बाद ही उन्होंने इसे भी वापस लेने के लिए अदालत का रुख कर लिया जिस पर बेंच हंटिंग यानी मनचाही पीठ के चयन के आरोप लगने लगे।
मामला मुख्य न्यायाधीश शील नागू के समक्ष पहुंचा, जिन्होंने स्वयं को इससे अलग कर लिया। इसके बाद दो अन्य न्यायाधीशों ने भी सुनवाई से खुद को अलग किया। अंततः यह प्रकरण जस्टिस अमन चौधरी की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ। सुनवाई के दौरान बंसल की ओर से अदालत को स्पष्ट किया गया कि वह अब इस एफआईआर को आगे किसी भी स्तर पर चुनौती नहीं देंगे और स्वेच्छा से याचिका वापस लेना चाहते हैं। प्रवर्तन निदेशालय और हरियाणा सरकार की ओर से इस पर विशेष आपत्ति नहीं जताई गई।
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चंडीगढ़। हरियाणा की ट्रायल कोर्ट के एक जज को रिश्वत देने की साजिश से जुड़े गंभीर मामले में आरोपी रियल एस्टेट डेवलपर रूप बंसल को आंशिक राहत देते हुए उनकी याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी है। याचिका बंसल ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कराने के लिए दायर की थी। याची पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की अन्य धाराओं में आरोप लगे हैं।
हाईकोर्ट में यह मामला पहले से ही काफी विवादित और संवेदनशीलता का कारण बन चुका था। बंसल ने फरवरी 2026 में अपनी पहली याचिका वापस लेकर कहा था कि वह बेहतर तथ्यों के साथ नई याचिका दाखिल करेंगे। इसके बाद अप्रैल में उन्होंने दोबारा एफआईआर को चुनौती देते हुए नई याचिका दायर की। लेकिन कुछ समय बाद ही उन्होंने इसे भी वापस लेने के लिए अदालत का रुख कर लिया जिस पर बेंच हंटिंग यानी मनचाही पीठ के चयन के आरोप लगने लगे।
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मामला मुख्य न्यायाधीश शील नागू के समक्ष पहुंचा, जिन्होंने स्वयं को इससे अलग कर लिया। इसके बाद दो अन्य न्यायाधीशों ने भी सुनवाई से खुद को अलग किया। अंततः यह प्रकरण जस्टिस अमन चौधरी की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ। सुनवाई के दौरान बंसल की ओर से अदालत को स्पष्ट किया गया कि वह अब इस एफआईआर को आगे किसी भी स्तर पर चुनौती नहीं देंगे और स्वेच्छा से याचिका वापस लेना चाहते हैं। प्रवर्तन निदेशालय और हरियाणा सरकार की ओर से इस पर विशेष आपत्ति नहीं जताई गई।
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