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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Private schools are playing arbitrary games, education department fails to stop them

Chandigarh-Haryana News: निजी स्कूलों की मनमानी का खेल, शिक्षा विभाग रोकने में फेल

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- आरटीई के तहत दाखिले, गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों को बंद करने सहित अन्य आदेशों की उड़ाई जा रही धज्जियां
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कुलदीप शुक्ला

चंडीगढ़। हरियाणा में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान शिक्षा विभाग के आदेशों की खुली अवहेलना हो रही है। शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत गरीब व जरूरतमंद बच्चों के लिए आरक्षित सीटें दिखाने में निजी स्कूलों की मनमानी लगातार जारी है। इसके अतिरिक्त गैर मान्यता प्राप्त 515 निजी स्कूलों को बंद करने के आदेश भी पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो पाए हैं। दाखिले के समय मनमानी करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई का मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया है।



प्रदेश में संचालित 10734 निजी स्कूलों में से करीब 70 फीसदी ने अप्रैल 2025 तक आरटीई सीटें पोर्टल पर दर्ज नहीं कीं। शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने इस मामले में सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। नतीजतन लगभग 3134 निजी स्कूलों पर मान्यता रद्द होने और आर्थिक दंड की तलवार लटक गई। प्राइवेट स्कूल संघ के अनुरोध पर विभाग ने दाखिले की समय सीमा 15 अप्रैल से बढ़ाकर 30 अप्रैल 2025 कर दी लेकिन 30 अप्रैल की समय सीमा समाप्त होने के बाद भी 1128 निजी स्कूलों ने सीटें नहीं दिखाई। इसके चलते विभाग ने 15 जुलाई 2025 को कारण बताओ नोटिस जारी कर 22 जुलाई तक जवाब मांगा। ज्यादातर स्कूलों ने औपचारिक जवाब भेजे लेकिन व्यवहारिक स्तर पर सुधार नहीं हुआ।
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इसके बाद विभाग ने 25 अगस्त 2025 को नया आदेश जारी कर आरटीई के तहत सीटें नहीं दिखाने पर 1680 स्कूलों के लिए 9 सितंबर 2025 तक जुर्माना भरने की अंतिम तिथि तय की। आदेश के तहत एक हजार रुपये फीस वाले स्कूल पर 30 हजार, एक से तीन हजार फीस वालों स्कूलों पर 70 हजार जुर्माना और तीन हजार से ज्यादा फीस वाले स्कूलों की रिपोर्ट सीधे मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए। लेकिन 9 सितंबर की डेडलाइन गुजर जाने के बावजूद अधिकांश स्कूलों ने जुर्माना नहीं भरा।
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इसके अलावा शिक्षा विभाग ने अगस्त 2025 में निजी स्कूलों के खिलाफ शिकायतें दर्ज करने के लिए प्लेटफॉर्म खोला। इसमें प्रदेशभर से 170 शिकायतें आईं थीं जिनमें किताबों व ड्रेस के लिए दबाव बनाने व आरटीई के तहत दाखिलों से इनकार जैसे गंभीर आरोप थे। लेकिन इन शिकायतों पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।



इसके अलावा विभाग ने जून 2025 में गैर मान्यता प्राप्त 515 निजी स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए और इनकी सूची हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी की आधिकारिक साइट पर अपलोड कर सार्वजनिक चेतावनी जारी की। इसके बावजूद कई स्कूल पुराने नाम से या फिर नाम बदलकर चल रहे हैं। शिक्षा विभाग के आदेशों का निजी स्कूलों पर कोई असर नहीं दिख रहा है।





शिक्षा विभाग की गलतियों का जुर्माना कौन भरेगा?

प्राइवेट स्कूल संघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष सत्यवान कुंडू ने कहा कि आरटीई के तहत सीटें न दर्शाने पर भारी भरकम जुर्माना लगाने के मामले में कई जिलों में शिक्षा विभाग की भी लापरवाही रही है। विभाग की ओर से मेल, टेलीफोन या लिखित सूचना के माध्यम से स्कूलों को समय रहते सूचित नहीं किया गया और कुछ स्कूलों ने आरटीई की खाली सीटें भी दिखाई लेकिन उनका पोर्टल बंद है। शिक्षा विभाग ने प्रमोट हुए कुछ बच्चों के सत्र 2024-25 में चिराग योजना की लिस्ट से नाम ही गायब कर दिए और उन बच्चों का पैसा स्कूलों को नहीं मिला। यह सरासर विभाग की लापरवाही है। इसका जुर्माना कौन भरेगा। आरटीई व 134 ए का पैसा भी स्कूलों को समय पर नहीं दिया जा रहा।







नियमों के उल्लंघन पर निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। आरटीई के तहत सीटें नहीं दिखाने वाले स्कूलों के दाखिला पोर्टल बंद किए गए हैं। नोटिस के आधार पर स्कूलों को जुर्माना राशि भी भरनी पड़ेगी।



- डॉ. विवेक अग्रवाल, महानिदेशक मौलिक शिक्षा
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