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प्रिंस हत्याकांड : सबूताें से छेड़छाड़ के आरोपी ने समन आदेश को दी चुनौती
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-हाईकोर्ट ने सीबीआई और हरियाणा सरकार को जारी किया नोटिस
-दोनों को हाईकोर्ट में 28 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रिंस हत्या मामले में साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के आरोपी पुलिस अधिकारी की निचली अदालत से जारी समन के खिलाफ याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई व हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने 28 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। पुलिस अधिकारी बीरेम सिंह ने पंचकूला स्थित सीबीआई अदालत के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश को रद्द करने की मांग की है। पुलिस अधिकारियों पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था।
वर्ष 2017 में गुरुग्राम के एक स्कूल में हुए प्रिंस हत्याकांड में शुरुआत में एक बस कंडक्टर को आरोपी बनाया गया था। बाद में उसे निर्दोष पाया गया और पता चला कि उसे फंसाने के लिए चार पुलिस अधिकारियों ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ की थी। वर्तमान याचिका में यह आरोप लगाया गया कि पुलिस अधिकारी को आवश्यक अनुमति के बिना ही तलब किया गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सीबीआई अदालत ने सीआरपीसी की धारा 197 के तहत अनिवार्य आवश्यकता का पालन किए बिना मामले का संज्ञान लेने में गलती की है। केवल शिकायतकर्ता द्वारा दायर एक आवेदन के आधार पर विशेष अदालत ने याचिकाकर्ता के खिलाफ संज्ञान लेने की कार्यवाही शुरू कर दी। याचिकाकर्ता और हरियाणा पुलिस सेवा के सहायक पुलिस आयुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोप उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए कार्यों से संबंधित हैं इसलिए संरक्षण का हकदार है और पूर्व अनुमति के अभाव में संज्ञान नहीं लिया जा सकता था।
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-दोनों को हाईकोर्ट में 28 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रिंस हत्या मामले में साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के आरोपी पुलिस अधिकारी की निचली अदालत से जारी समन के खिलाफ याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई व हरियाणा सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने 28 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। पुलिस अधिकारी बीरेम सिंह ने पंचकूला स्थित सीबीआई अदालत के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश को रद्द करने की मांग की है। पुलिस अधिकारियों पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया था।
वर्ष 2017 में गुरुग्राम के एक स्कूल में हुए प्रिंस हत्याकांड में शुरुआत में एक बस कंडक्टर को आरोपी बनाया गया था। बाद में उसे निर्दोष पाया गया और पता चला कि उसे फंसाने के लिए चार पुलिस अधिकारियों ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ की थी। वर्तमान याचिका में यह आरोप लगाया गया कि पुलिस अधिकारी को आवश्यक अनुमति के बिना ही तलब किया गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सीबीआई अदालत ने सीआरपीसी की धारा 197 के तहत अनिवार्य आवश्यकता का पालन किए बिना मामले का संज्ञान लेने में गलती की है। केवल शिकायतकर्ता द्वारा दायर एक आवेदन के आधार पर विशेष अदालत ने याचिकाकर्ता के खिलाफ संज्ञान लेने की कार्यवाही शुरू कर दी। याचिकाकर्ता और हरियाणा पुलिस सेवा के सहायक पुलिस आयुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोप उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए कार्यों से संबंधित हैं इसलिए संरक्षण का हकदार है और पूर्व अनुमति के अभाव में संज्ञान नहीं लिया जा सकता था।
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