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Chandigarh-Haryana News: निवारक हिरासत को हाईकोर्ट में चुनौती, मृत व्यक्ति की शिकायत पर कार्रवाई का आरोप
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-याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर मांगा जवाब
-हिरासत को अवैध बताते हुए उचित निर्देश जारी करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कुरुक्षेत्र निवासी पाला राम की निवारक (संभावित अपराध रोकने के लिए हिरासत) हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निवारक हिरासत की पूरी समय रेखा सौंपने का भी आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए पाला राम ने बताया कि डिटेंशन 6 फरवरी 2025 की जिस शिकायत पर आधारित है, वह राम सिंह नामक व्यक्ति की बताई गई है जो 8 नवंबर 2024 को मर चुका है। याची ने कहा कि पुलिस ने मरे व्यक्ति के नाम से फर्जी शिकायत दर्ज कराई जो पूरी कार्रवाई को अवैध और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बनाता है। याची ने बताया कि पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी से पहले न तो कोई कारण बताया और न ही तय प्रक्रिया का पालन किया। याची ने कहा कि उसके खिलाफ एनडीपीएस के दो केस थे जिसमें वह जमानत पर है और किसी भी केस में उससे बरामदगी नहीं हुई है। पुराने मामलों में बरी हो चुका है। याचिका में कहा गया है कि याची ने न तो जमानत का दुरुपयोग है न नया अपराध, इसलिए प्रिवेंटिव डिटेंशन का कोई आधार नहीं बनता। डिटेंशन के खिलाफ याची की पत्नी का 11 जुलाई को दायर मांगपत्र को बिना कोई कारण बताए खारिज कर दिया।
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-हिरासत को अवैध बताते हुए उचित निर्देश जारी करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कुरुक्षेत्र निवासी पाला राम की निवारक (संभावित अपराध रोकने के लिए हिरासत) हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निवारक हिरासत की पूरी समय रेखा सौंपने का भी आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए पाला राम ने बताया कि डिटेंशन 6 फरवरी 2025 की जिस शिकायत पर आधारित है, वह राम सिंह नामक व्यक्ति की बताई गई है जो 8 नवंबर 2024 को मर चुका है। याची ने कहा कि पुलिस ने मरे व्यक्ति के नाम से फर्जी शिकायत दर्ज कराई जो पूरी कार्रवाई को अवैध और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बनाता है। याची ने बताया कि पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी से पहले न तो कोई कारण बताया और न ही तय प्रक्रिया का पालन किया। याची ने कहा कि उसके खिलाफ एनडीपीएस के दो केस थे जिसमें वह जमानत पर है और किसी भी केस में उससे बरामदगी नहीं हुई है। पुराने मामलों में बरी हो चुका है। याचिका में कहा गया है कि याची ने न तो जमानत का दुरुपयोग है न नया अपराध, इसलिए प्रिवेंटिव डिटेंशन का कोई आधार नहीं बनता। डिटेंशन के खिलाफ याची की पत्नी का 11 जुलाई को दायर मांगपत्र को बिना कोई कारण बताए खारिज कर दिया।
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