{"_id":"6ac4eac2f9e9234ee40b03f9","slug":"preparations-underway-in-haryana-to-reuse-326-mld-of-water-from-27-stps-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1089-1142440-2026-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh-Haryana News: हरियाणा में 27 एसटीपी के 326 एमएलडी पानी के दोबारा इस्तेमाल की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh-Haryana News: हरियाणा में 27 एसटीपी के 326 एमएलडी पानी के दोबारा इस्तेमाल की तैयारी
विज्ञापन
फोटो -
- नई दिल्ली में आयोजित अर्बन अड्डा 2026 सम्मेलन में डॉ. सतबीर सिंह कादियान ने बताया हरियाणा का मॉडल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित पानी को दोबारा उपयोग में लाने का खाका तैयार किया जा रहा है। राज्य में 27 एसटीपी से मिलने वाले 326 एमएलडी पानी के उपयोग की तैयारी है जिनमें 20 एसटीपी की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इसके अलावा वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोजेक्ट के तहत चार एसटीपी से 171 एमएलडी पानी के भी दोबारा उपयोग की योजना है।
नई दिल्ली में आयोजित अर्बन अड्डा 2026 सम्मेलन में हरियाणा सिंचाई अनुसंधान व प्रबंधन संस्थान (एचआईआरएमआई) के सह-प्रधान निदेशक डॉ. सतबीर सिंह कादियान ने हरियाणा की इन योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शहरों में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए भूजल पर निर्भरता घटानी होगी। उपचारित पानी का उपयोग बागवानी, निर्माण, गैर-खाद्य फसलों की सिंचाई और जलाशयों के पुनर्जीवन में किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जब तक भूजल निकालना सस्ता व उपचारित पानी का इस्तेमाल महंगा रहेगा, तब तक इसके दोबारा उपयोग को बढ़ावा देना मुश्किल होगा। इसके लिए औद्योगिक और व्यावसायिक भूजल दोहन पर शुल्क और अलग-अलग उपयोग के हिसाब से उपचारित पानी के गुणवत्ता मानक तय करने की जरूरत है। कादियान ने साथ ही छोटे शहरों के लिए स्थानीय स्तर पर जल उपचार की व्यवस्था विकसित करने और शहर-विशिष्ट जल योजनाएं बनाने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक इससे भूजल पर दबाव घटने के साथ जल संकट और शहरी जलभराव से निपटने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
- नई दिल्ली में आयोजित अर्बन अड्डा 2026 सम्मेलन में डॉ. सतबीर सिंह कादियान ने बताया हरियाणा का मॉडल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित पानी को दोबारा उपयोग में लाने का खाका तैयार किया जा रहा है। राज्य में 27 एसटीपी से मिलने वाले 326 एमएलडी पानी के उपयोग की तैयारी है जिनमें 20 एसटीपी की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इसके अलावा वाटर सिक्योर हरियाणा प्रोजेक्ट के तहत चार एसटीपी से 171 एमएलडी पानी के भी दोबारा उपयोग की योजना है।
नई दिल्ली में आयोजित अर्बन अड्डा 2026 सम्मेलन में हरियाणा सिंचाई अनुसंधान व प्रबंधन संस्थान (एचआईआरएमआई) के सह-प्रधान निदेशक डॉ. सतबीर सिंह कादियान ने हरियाणा की इन योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि शहरों में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए भूजल पर निर्भरता घटानी होगी। उपचारित पानी का उपयोग बागवानी, निर्माण, गैर-खाद्य फसलों की सिंचाई और जलाशयों के पुनर्जीवन में किया जा सकता है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जब तक भूजल निकालना सस्ता व उपचारित पानी का इस्तेमाल महंगा रहेगा, तब तक इसके दोबारा उपयोग को बढ़ावा देना मुश्किल होगा। इसके लिए औद्योगिक और व्यावसायिक भूजल दोहन पर शुल्क और अलग-अलग उपयोग के हिसाब से उपचारित पानी के गुणवत्ता मानक तय करने की जरूरत है। कादियान ने साथ ही छोटे शहरों के लिए स्थानीय स्तर पर जल उपचार की व्यवस्था विकसित करने और शहर-विशिष्ट जल योजनाएं बनाने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक इससे भूजल पर दबाव घटने के साथ जल संकट और शहरी जलभराव से निपटने में मदद मिलेगी।
विज्ञापन