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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Pending trial of road accident case no obstacle in appointment: High Court, Court News, Haryana News

सड़क दुर्घटना का लंबित ट्रायल नियुक्ति में कोई बाधा नहीं : हाईकोर्ट

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-हरियाणा के डीजीपी को युवक की कांस्टेबल पद पर उम्मीदवारी पर विचार का आदेश
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना से जुड़े लंबित ट्रायल के कारण कांस्टेबल पद की उम्मीदवारी रद्द करने को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा के डीजीपी को निर्देश दिया है कि वे याची के दावे पर पुनर्विचार करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला न तो नैतिक अधोपतन से संबंधित है और न ही ऐसा अपराध है जिसकी सजा तीन वर्ष या उससे अधिक हो सकती है। ऐसे में नियुक्ति से इनकार करना गलत है।
जस्टिस जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने कहा कि पंजाब पुलिस नियम, जो हरियाणा में भी लागू हैं, केवल उन्हीं मामलों में उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने की अनुमति देते हैं जिनमें आरोप नैतिक अधोपतन वाले हों या जिनकी अधिकतम सजा तीन वर्ष या उससे अधिक हो। याचिकाकर्ता पर जिन धाराओं में मामला दर्ज था, वे इस श्रेणी में शामिल नहीं हैं। महेंद्रगढ़ निवासी अमित कुमार ने पुरुष कांस्टेबल के पद के लिए आवेदन किया था और उसने सभी चरण सफलता से पार कर लिए थे। इसी दौरान एक सड़क दुर्घटना मामले में एफआईआर दर्ज हुई जिसकी जानकारी उसने सत्यापन फार्म में पूरी ईमानदारी के साथ दी। मई 2025 को ट्रायल कोर्ट ने उसे बरी कर दिया। इसके बावजूद 18 अगस्त 2025 को उसकी उम्मीदवारी यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि बरी होने का आदेश सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आया। हाईकोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि नियमों का गलत अर्थ निकाला गया है। केवल इसलिए उम्मीदवार को बाहर नहीं किया जा सकता कि बरी होने का फैसला बाद में आया।
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कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले रविंद्र कुमार बनाम स्टेट आफ यूपी का हवाला देते हुए कहा कि भर्ती प्राधिकरण को आरोपों की प्रकृति, घटना का समय, उम्मीदवार के आचरण और मामले के अंतिम परिणाम को समग्र रूप से देखना चाहिए। यहां न केवल आरोप गंभीर नहीं थे, बल्कि उम्मीदवार ईमानदारी से पूरी जानकारी देता रहा और अंतत अदालत से पूर्णत बरी भी हो गया। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने हरियाणा के डीजीपी को निर्देश दिया कि वे उम्मीदवार के मामले की दोबारा समीक्षा करें।
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