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पे कमीशन के टर्म्स ऑफ रेफरेंस कर्मचारियों और पेंशनर्स के खिलाफ : सुभाष लांबा
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चंडीगढ़। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ और कनफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लॉइज एंड वर्कर्स ने केंद्र सरकार की ओर से मंजूर किए गए आठवें वेतन आयोग (पे कमीशन) के टर्म्स ऑफ रेफरेंस को कर्मचारियों और पेंशनर्स के हितों के खिलाफ बताया है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि पहले के वेतन आयोगों में पेंशन संशोधन का विषय शामिल था जबकि आठवें पे कमीशन में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की समीक्षा और उसके खर्च का मूल्यांकन जोड़ दिया गया है जिससे सरकार की ओर से ओपीएस में हस्तक्षेप करने की आशंका बढ़ गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही वित्त विधेयक के माध्यम से ऐसा वैलिडेशन एक्ट पारित करवा चुकी है जिससे वह पुराने पेंशनर्स की पेंशन में संशोधन न करने का अधिकार रखती है। इससे पुराने और नए पेंशनर्स के बीच भेदभाव की संभावना है।
लांबा और महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आर.एन. पाराशर ने कहा कि टर्म्स ऑफ रेफरेंस में आर्थिक स्थिति और राजकोषीय अनुशासन को ध्यान में रखने की शर्तें जोड़ी गई हैं जिससे वेतन वृद्धि सीमित रहने की संभावना है। यह कदम राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया प्रतीत होता है जबकि सरकार अब तक कोविड अवधि के 18 महीने के फ्रीज डीए-डीआर भी जारी नहीं कर पाई है। दोनों नेताओं ने मांग की कि टर्म्स ऑफ रेफरेंस में आवश्यक संशोधन किए जाएं ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स के हित सुरक्षित रह सकें।
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उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही वित्त विधेयक के माध्यम से ऐसा वैलिडेशन एक्ट पारित करवा चुकी है जिससे वह पुराने पेंशनर्स की पेंशन में संशोधन न करने का अधिकार रखती है। इससे पुराने और नए पेंशनर्स के बीच भेदभाव की संभावना है।
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लांबा और महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आर.एन. पाराशर ने कहा कि टर्म्स ऑफ रेफरेंस में आर्थिक स्थिति और राजकोषीय अनुशासन को ध्यान में रखने की शर्तें जोड़ी गई हैं जिससे वेतन वृद्धि सीमित रहने की संभावना है। यह कदम राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया प्रतीत होता है जबकि सरकार अब तक कोविड अवधि के 18 महीने के फ्रीज डीए-डीआर भी जारी नहीं कर पाई है। दोनों नेताओं ने मांग की कि टर्म्स ऑफ रेफरेंस में आवश्यक संशोधन किए जाएं ताकि कर्मचारियों और पेंशनर्स के हित सुरक्षित रह सकें।
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