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Chandigarh-Haryana News: मंडियों में पहले दिन किसानों ने सरकारी एजेंसियों को नहीं बेची सरसों
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश की 110 मंडियों और क्रय केंद्रों पर शनिवार से सरसों की सरकारी खरीद की औपचारिक शुरुआत हो गई। पहले दिन किसानों ने मंडियों में सरकारी एजेंसियों को सरसों नहीं बेची। सरकार ने इस बार सरसों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 6200 रुपये तय किया है। बाजार में इससे अधिक मूल्य मिल रहा है जिससे पहले दिन किसानों ने 2006 क्विंटल सरसों निजी व्यापारियों को बेची।
यमुनानगर की रादौर मंडी में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने खरीद का शुभारंभ किया । झज्जर की 6 मंडियों में पोर्टल पर रबी सीजन का ब्योरा अपडेट न होने के कारण गेटपास नहीं बने। रोहतक में तकनीकी खामी के चलते पोर्टल के माध्यम से गेटपास ही नहीं काटे जा सके। कैथल में राजौंद, ढांड और कलायत में पोर्टल का संचालन न होने के कारण खरीद शुरू नहीं हो सकी। भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष मास्टर बलबीर का कहना है कि सरसों की खरीद के लिए मूल्य कम है इसलिए किसानों को बाहर ही सरसों बेचनी पड़ रही है। किसान यूनियन के राज्य प्रधान रतन मान का कहना है कि सरसों की खरीद में देरी होने से भी किसानों ने बाहर सरसों बेची है।
सरसों की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन किसान पहले ही 70 प्रतिशत सरसों की बिक्री कर चुके हैं। एमएसपी कम नहीं है, किसानों ने स्वयं ही बाहर सरसों बेची है। यह बात सही है कि बाहर अधिक मूल्य मिल रहा है।
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राजेश नागर, मंत्री, खाद्य व नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले
पहले दिन जिलावार मंडियों में सरसों की खरीद को लेकर यह रही स्थिति
नारनाैल : नारनौल में 35 गेटपास बने, 800 क्विंटल सरसों की आवक हुई। नांगल, अटेली मंडी में एक भी गेटपास नहीं बना। बाजार में अधिक भाव के कारण सरकारी खरीद नहीं हुई।
रोहतक : रोहतक मंडी में 500 क्विंटल की आवक हुई। बाजार में 6400 रुपये प्रति क्विंटल भाव के कारण निजी व्यापारियों को 250 क्विंटल सरसों बेची गई।
रेवाड़ी : रेवाड़ी, बावल, कोसली अनाज मंडी में सरकारी खरीद नहीं हो सकी। बाजार में 6600 से लेकर 6800 रुपये प्रति क्विंटल भाव होने से किसान व्यापारियों को सरसों बेच रहे हैं।
जींद : जिले की किसी भी अनाज मंडी में सरसों की सरकारी खरीद नहीं हो सकी। किसान भी सरसों लेकर नहीं पहुंचे।
झज्जर : वाहनों के सत्यापन का भी काम नहीं हुआ। 8 किसानों के मैनुअली गेटपास काटे गए। बाजार में एमएमसी से अधिक मूल्य होने से निजी व्यापारियों को सरसों बेची गई।
सोनीपत : सरसों की बिक्री नहीं हो सकी। पहले दिन मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत किसान सरसों लेकर ही नहीं पहुंचे।
अंबाला : पहले दिन जिले की तीन मंडियों में खरीद होनी थी लेकिन किसान ही नहीं पहुंचे। शहजादपुर मंडी में एजेंसी को मंजूरी न मिलने के कारण अधिकारी ही नहीं पहुंचे।
कैथल : कैथल, राजौंद, ढांड, कलायत में पोर्टल संचालित न होने से खरीद प्रक्रिया अटक गई। बाजार में 6500 रुपये भाव है, इस कारण निजी व्यापारियों के पास किसान जा रहे हैं।
यमुनानगर : जगाधारी में सरसों की एक ढेरी पहुंची लेकिन खरीद नहीं हो सकी। साढ़ाैरा को खरीद में शामिल नहीं किया है। अब किसानों को यमुनानगर 40 किमी दूर जाना होगा।
हिसार : हिसार में एमएसपी कम होने के कारण किसान नहीं पहुंचे। निजी व्यापारियों को सरसों बेची ।
फतेहाबाद : शनिवार को दोपहर में खरीद एजेंसी अलाॅट होने से सरसों की खरीद नहीं हो सकी। भूना में हैफेड, फतेहाबाद और भट्टूकलां में वेयर हाउस खरीद करेगी।
भिवानी : मंडी में सरकारी खरीद के लिए 3 ही किसानों ने गेटपास कटवाए। निजी व्यापारियों को सरसों बेचने के लिए 293 गेटपास कटवाए। बाहर 6400 रुपये भाव है।
सिरसा : सिरसा में निजी दुकानों पर 6300 से 6600 रुपये में सरसों बिक रही है। इसलिए 16 खरीद केंद्रों पर सरकारी खरीद नहीं हो सकी। यहां 167 टोकन कटे और 3546 क्विंटल सरसों निजी व्यापारियों ने खरीदी। अभी तक निजी व्यापारी 72, 290 क्विंटल सरसों खरीद चुके हैं।
चरखी दादरी : बाढड़ा, बौंदकलां और झोझूकलां केंद्र पर खरीद हुई। दादरी की मंडी में हैंडलिंग एजेंट न बनने से खरीद नहीं हो सकी। बाजार में एमएमपी से 500 रुपये अतिरिक्त मिलने से अधिकतर किसान बाहर ही सरसों बेच चुके हैं।
करनाल : घरौंडा और इंद्री की अनाज मंडी में शनिवार से सरकारी खरीद के लिए सरसों की आवक शुरू हो चुकी है लेकिन खरीद एजेंसी न आने से सरसों की खरीद ही नहीं हो सकी।
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चंडीगढ़। प्रदेश की 110 मंडियों और क्रय केंद्रों पर शनिवार से सरसों की सरकारी खरीद की औपचारिक शुरुआत हो गई। पहले दिन किसानों ने मंडियों में सरकारी एजेंसियों को सरसों नहीं बेची। सरकार ने इस बार सरसों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 6200 रुपये तय किया है। बाजार में इससे अधिक मूल्य मिल रहा है जिससे पहले दिन किसानों ने 2006 क्विंटल सरसों निजी व्यापारियों को बेची।
यमुनानगर की रादौर मंडी में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने खरीद का शुभारंभ किया । झज्जर की 6 मंडियों में पोर्टल पर रबी सीजन का ब्योरा अपडेट न होने के कारण गेटपास नहीं बने। रोहतक में तकनीकी खामी के चलते पोर्टल के माध्यम से गेटपास ही नहीं काटे जा सके। कैथल में राजौंद, ढांड और कलायत में पोर्टल का संचालन न होने के कारण खरीद शुरू नहीं हो सकी। भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष मास्टर बलबीर का कहना है कि सरसों की खरीद के लिए मूल्य कम है इसलिए किसानों को बाहर ही सरसों बेचनी पड़ रही है। किसान यूनियन के राज्य प्रधान रतन मान का कहना है कि सरसों की खरीद में देरी होने से भी किसानों ने बाहर सरसों बेची है।
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सरसों की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन किसान पहले ही 70 प्रतिशत सरसों की बिक्री कर चुके हैं। एमएसपी कम नहीं है, किसानों ने स्वयं ही बाहर सरसों बेची है। यह बात सही है कि बाहर अधिक मूल्य मिल रहा है।
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राजेश नागर, मंत्री, खाद्य व नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले
पहले दिन जिलावार मंडियों में सरसों की खरीद को लेकर यह रही स्थिति
नारनाैल : नारनौल में 35 गेटपास बने, 800 क्विंटल सरसों की आवक हुई। नांगल, अटेली मंडी में एक भी गेटपास नहीं बना। बाजार में अधिक भाव के कारण सरकारी खरीद नहीं हुई।
रोहतक : रोहतक मंडी में 500 क्विंटल की आवक हुई। बाजार में 6400 रुपये प्रति क्विंटल भाव के कारण निजी व्यापारियों को 250 क्विंटल सरसों बेची गई।
रेवाड़ी : रेवाड़ी, बावल, कोसली अनाज मंडी में सरकारी खरीद नहीं हो सकी। बाजार में 6600 से लेकर 6800 रुपये प्रति क्विंटल भाव होने से किसान व्यापारियों को सरसों बेच रहे हैं।
जींद : जिले की किसी भी अनाज मंडी में सरसों की सरकारी खरीद नहीं हो सकी। किसान भी सरसों लेकर नहीं पहुंचे।
झज्जर : वाहनों के सत्यापन का भी काम नहीं हुआ। 8 किसानों के मैनुअली गेटपास काटे गए। बाजार में एमएमसी से अधिक मूल्य होने से निजी व्यापारियों को सरसों बेची गई।
सोनीपत : सरसों की बिक्री नहीं हो सकी। पहले दिन मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकृत किसान सरसों लेकर ही नहीं पहुंचे।
अंबाला : पहले दिन जिले की तीन मंडियों में खरीद होनी थी लेकिन किसान ही नहीं पहुंचे। शहजादपुर मंडी में एजेंसी को मंजूरी न मिलने के कारण अधिकारी ही नहीं पहुंचे।
कैथल : कैथल, राजौंद, ढांड, कलायत में पोर्टल संचालित न होने से खरीद प्रक्रिया अटक गई। बाजार में 6500 रुपये भाव है, इस कारण निजी व्यापारियों के पास किसान जा रहे हैं।
यमुनानगर : जगाधारी में सरसों की एक ढेरी पहुंची लेकिन खरीद नहीं हो सकी। साढ़ाैरा को खरीद में शामिल नहीं किया है। अब किसानों को यमुनानगर 40 किमी दूर जाना होगा।
हिसार : हिसार में एमएसपी कम होने के कारण किसान नहीं पहुंचे। निजी व्यापारियों को सरसों बेची ।
फतेहाबाद : शनिवार को दोपहर में खरीद एजेंसी अलाॅट होने से सरसों की खरीद नहीं हो सकी। भूना में हैफेड, फतेहाबाद और भट्टूकलां में वेयर हाउस खरीद करेगी।
भिवानी : मंडी में सरकारी खरीद के लिए 3 ही किसानों ने गेटपास कटवाए। निजी व्यापारियों को सरसों बेचने के लिए 293 गेटपास कटवाए। बाहर 6400 रुपये भाव है।
सिरसा : सिरसा में निजी दुकानों पर 6300 से 6600 रुपये में सरसों बिक रही है। इसलिए 16 खरीद केंद्रों पर सरकारी खरीद नहीं हो सकी। यहां 167 टोकन कटे और 3546 क्विंटल सरसों निजी व्यापारियों ने खरीदी। अभी तक निजी व्यापारी 72, 290 क्विंटल सरसों खरीद चुके हैं।
चरखी दादरी : बाढड़ा, बौंदकलां और झोझूकलां केंद्र पर खरीद हुई। दादरी की मंडी में हैंडलिंग एजेंट न बनने से खरीद नहीं हो सकी। बाजार में एमएमपी से 500 रुपये अतिरिक्त मिलने से अधिकतर किसान बाहर ही सरसों बेच चुके हैं।
करनाल : घरौंडा और इंद्री की अनाज मंडी में शनिवार से सरकारी खरीद के लिए सरसों की आवक शुरू हो चुकी है लेकिन खरीद एजेंसी न आने से सरसों की खरीद ही नहीं हो सकी।