फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   New students cannot be admitted without valid lease or ownership of the building: High Court, Court News, Haryana News

Chandigarh-Haryana News: भवन पर बिना वैध पट्टा या स्वामित्व नहीं कर सकते नए छात्रों का दाखिला

विज्ञापन
-आईटीआई में दाखिले पर रोक को लेकर हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती
विज्ञापन



कोर्ट ने कहा-छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सर्वोपरि, मान्यता समाप्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

अमर उजाला ब्यूरो



चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) को नए छात्रों का दाखिला तभी करने की अनुमति मिल सकती है, जब उसके पास उस भवन और परिसर पर वैध स्वामित्व अधिकार या विधिवत पंजीकृत लीज डीड हो। यह शर्त राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीटी) के नियमानुसार अनिवार्य है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है।
यह फैसला चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस सुमित गोयल की खंडपीठ ने महेंद्रगढ़ स्थित एक आईटीआई की याचिका पर सुनाया। इसमें संस्थान को नए प्रशिक्षुओं के दाखिले से रोके जाने और डी-एफिलिएशन (मान्यता समाप्ति) की कार्यवाही को चुनौती दी गई थी। खंडपीठ ने कहा कि आईटीआई को मान्यता प्राप्त करने के लिए यह जरूरी है कि वह जिस परिसर में कार्यरत है, उस पर या तो स्वामित्व हो या फिर वैध रूप से रजिस्टर्ड लीज डीड हो।
विज्ञापन

याचिकाकर्ता संस्था के पास अगस्त 2019 तक वैध लीज डीड थी, लेकिन उसे नवीनीकरण नहीं कराया गया। संस्था का दावा था कि वह कानूनी किरायेदार बन चुकी है और उसे संबंधित किराया कानूनों के अंतर्गत ही हटाया जा सकता है। हालांकि कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जहां कोई विशेष नियामक संस्था (जैसे एनसीवीटी) नियमों को बाध्यकारी रूप में लागू करती है, वहां न्यायालय को तभी हस्तक्षेप करना चाहिए, जब कोई स्पष्ट गैरकानूनी, मनमानी या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो। इस मामले में ऐसा कोई त्रुटिपूर्ण आदेश नहीं पाया गया। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यदि संस्था को वैध पट्टे के बिना छात्रों का दाखिला करने दिया गया, तो इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा। ऐसी स्थिति छात्रों को शिक्षा और कॅरिअर की दृष्टि से गहरे संकट में डाल सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता संस्था वैध लीज नहीं ले पाती तो सजा छात्रों को भुगतनी पड़ेगी, जो पूरी तरह निर्दोष हैं। अंत में कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ये छात्र ही हैं, जो दिशा-हीन हो जाएंगे, उनके दाखिले संकट में आ जाएंगे और उनका शैक्षणिक भविष्य अंधकार में चला जाएगा और यह सब उनके किसी दोष के बिना। ऐसे में यह न्यायालय का कर्तव्य है कि वह सबसे कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा में सजग प्रहरी की भूमिका निभाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed