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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा की तीन सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय पुरस्कार
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फोटो समाचार
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने पुरस्कार प्राप्त किए
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा की शाहाबाद, करनाल व पानीपत सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार मिला है। नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के नेशनल शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्क्लेव में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा व पानीपत उपायुक्त एवं मिल अध्यक्ष डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने पुरस्कार प्राप्त किए।
पानीपत सहकारी चीनी मिल डाहर को वर्ष 2025-26 में 94.61 प्रतिशत क्षमता उपयोग के साथ तकनीकी दक्षता का प्रथम पुरस्कार मिला। मिल ने 61.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 5.62 लाख क्विंटल चीनी बनाई और करीब 29 करोड़ रुपये की बिजली बेची। यह प्रदेश की 11 सरकारी चीनी मिलों में सर्वाधिक पेराई है। वर्ष 2022 में डाहर में 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन क्षमता का नया संयंत्र स्थापित किया गया था। इसमें पानीपत शुगर मिल के एमडी नवदीप नैन का अहम रोल रहा है। शाहाबाद मिल को 2024-25 में अन्य रिकवरी क्षेत्र में तकनीकी दक्षता और करनाल मिल को तकनीकी दक्षता व गन्ना विकास में प्रथम पुरस्कार मिला।
डॉ. शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर शाहाबाद, करनाल और पानीपत की सहकारी चीनी मिलों को विभिन्न श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार मिलना हरियाणा के लिए गौरव की बात है। प्रदेश सहकारी चीनी मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक व बहुउत्पादक बायो-एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में 690 केएलपीडी क्षमता की एथनॉल परियोजनाओं पर करीब 1,200 करोड़ रुपये और पानीपत में 90 केएलपीडी परियोजना पर करीब 200 करोड़ रुपये निवेश की दिशा में काम हो रहा है। भविष्य में एथनॉल, बिजली, शीरा, बगास, प्रेसमड, बायो-सीबीजी सहित मूल्यवर्धित उत्पादों पर जोर रहेगा।
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हरियाणा शुगरफेड की मिलों ने 285.92 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 26.24 लाख क्विंटल चीनी बनाई और को-जनरेशन से 12.20 करोड़ यूनिट बिजली ग्रिड को देकर 76.60 करोड़ रुपये राजस्व अर्जित किया। गन्ना उत्पादकता बढ़ाने के लिए चार फुट दूरी पर बिजाई, उन्नत किस्म, टिश्यू कल्चर और मशीनी कटाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। चार फुट दूरी पर बिजाई करने वाले किसानों को 5,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन मिलेगा। लक्ष्य सभी 10 सहकारी चीनी मिलों को आधुनिक, पारदर्शी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने पुरस्कार प्राप्त किए
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा की शाहाबाद, करनाल व पानीपत सहकारी चीनी मिलों को राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार मिला है। नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के नेशनल शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्क्लेव में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा व पानीपत उपायुक्त एवं मिल अध्यक्ष डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने पुरस्कार प्राप्त किए।
पानीपत सहकारी चीनी मिल डाहर को वर्ष 2025-26 में 94.61 प्रतिशत क्षमता उपयोग के साथ तकनीकी दक्षता का प्रथम पुरस्कार मिला। मिल ने 61.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 5.62 लाख क्विंटल चीनी बनाई और करीब 29 करोड़ रुपये की बिजली बेची। यह प्रदेश की 11 सरकारी चीनी मिलों में सर्वाधिक पेराई है। वर्ष 2022 में डाहर में 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन क्षमता का नया संयंत्र स्थापित किया गया था। इसमें पानीपत शुगर मिल के एमडी नवदीप नैन का अहम रोल रहा है। शाहाबाद मिल को 2024-25 में अन्य रिकवरी क्षेत्र में तकनीकी दक्षता और करनाल मिल को तकनीकी दक्षता व गन्ना विकास में प्रथम पुरस्कार मिला।
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डॉ. शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर शाहाबाद, करनाल और पानीपत की सहकारी चीनी मिलों को विभिन्न श्रेणियों में प्रथम पुरस्कार मिलना हरियाणा के लिए गौरव की बात है। प्रदेश सहकारी चीनी मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक व बहुउत्पादक बायो-एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में 690 केएलपीडी क्षमता की एथनॉल परियोजनाओं पर करीब 1,200 करोड़ रुपये और पानीपत में 90 केएलपीडी परियोजना पर करीब 200 करोड़ रुपये निवेश की दिशा में काम हो रहा है। भविष्य में एथनॉल, बिजली, शीरा, बगास, प्रेसमड, बायो-सीबीजी सहित मूल्यवर्धित उत्पादों पर जोर रहेगा।
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हरियाणा शुगरफेड की मिलों ने 285.92 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर 26.24 लाख क्विंटल चीनी बनाई और को-जनरेशन से 12.20 करोड़ यूनिट बिजली ग्रिड को देकर 76.60 करोड़ रुपये राजस्व अर्जित किया। गन्ना उत्पादकता बढ़ाने के लिए चार फुट दूरी पर बिजाई, उन्नत किस्म, टिश्यू कल्चर और मशीनी कटाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। चार फुट दूरी पर बिजाई करने वाले किसानों को 5,000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन मिलेगा। लक्ष्य सभी 10 सहकारी चीनी मिलों को आधुनिक, पारदर्शी और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।