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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Monitoring of stubble burners to begin from September 20.

Chandigarh-Haryana News: 20 सितंबर से शुरू होगी पराली जलाने वालों की निगरानी

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- मुख्यालय स्तर पर कंट्रोल रूम होगा स्थापित, 85 लाख मीट्रिक टन पराली निकलने का अनुमान
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- प्रदेश के सभी उपायुक्तों की अध्यक्षता में पराली प्रोटेक्शन फोर्स बनाई, 8000 नोडल अधिकारी
चंडीगढ़। हरियाणा में पराली जलाने वालों पर सीधे नजर रखी जाएगी। 20 सितंबर से मुख्यालय स्तर से पराली जलाने वालों पर निगरानी के लिए कंट्रोल रूम स्थापित होगा। इसी कंट्रोल रूम पर हरियाणा का कोई भी व्यक्ति गोपनीय तरीके से शिकायतें दर्ज करा सकेगा। हरियाणा कृषि व कल्याण विभाग ने खरीफ-2025 में 85 लाख मीट्रिक टन पराली के उत्पादन का आकलन किया है। विभागीय टीमों ने गांव-गांव पहुंचकर किसानों को जागरूक करने के लिए भी पहुंचना भी शुरू कर दिया है।
हरियाणा कृषि व कल्याण विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस बार 41 लाख एकड़ जमीन में धान की रोपाई का ब्योरा दर्ज किया गया है जिसमें करीब 5 लाख किसानों ने मेरी फसल-मेरा ब्योरा के तहत पंजीकरण कराया है। इस बार पराली प्रोटेक्शन फोर्स में 8000 नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं। इसमें कृषि व कल्याण विभाग के कर्मचारियों के अलावा राजस्व व दूसरे विभागों के कर्मचारी शामिल हैं।
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इस तरह से 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी पराली जलाने वालों की निगरानी रखेगा। पराली प्रोटेक्शन फोर्स प्रत्येक जिले के जिला उपायुक्त की निगरानी में काम करेंगी। कृषि व कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पंकज अग्रवाल का कहना है कि किसानों को जागरूक करने का काम शुरू कर दिया है। फिर भी किसान पराली जलाएंगे तो नियमानुसार कार्रवाई होगी।
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रेड एंट्री के बाद किसान चार सीजन तक नहीं उठा सकते योजनाओं का लाभ
कृषि विभाग पर्यावरण प्रदूषण के लिए क्षतिपूर्ति शुल्क जुर्माने के रूप में लेता है। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पर भी किसानों की एंट्री कर दी जाती है। ऐसे में पराली जलाने वाले किसान अगले चार सीजन तक सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं उठा सकते। इस बार मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर उन्हीं किसानों का धान की फसल को लेकर पंजीकरण किया गया जिन्होंने पराली न जलाने का विकल्प भरा था।


पराली या फसल अवशेष जलाने वालों पर तय हो चुका है दोगुना जुर्माना

विभाग पराली या फसल अवशेष जलाने वालों के खिलाफ पिछले वर्ष से दोगुना जुर्माने का प्रावधान कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2 एकड़ तक जमीन में पराली जलाने पर 5000 रुपये जुर्माना तय है पहले यही जुर्माना 2500 रुपये था। 2 एकड़ से अधिक और 5 एकड़ तक 10,000 रुपये जुर्माना है जो कि पहले 5000 रुपये था। 5 एकड़ से अधिक के खेत में पराली जलाने पर 30,000 रुपये जुर्माना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से पहले यही जुर्माना 15,000 रुपये था। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक किसानों को नियमित रूप से जागरूक किया जा रहा है।





इसरो की मदद से हरसेक देता है पराली जलने का ब्योरा
केंद्र सरकार के आदेश पर इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) सेटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने के मामलों पर निगरानी रखता है। इसरो की मदद से हरसेक (हरियाणा स्टेट रिमोट सेसिंग एंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर) खेतों में जलने वाली पराली का ब्योरा उपलब्ध कराता है। केंद्र सरकार के आदेश पर पराली जलाने वालों पर सैटेलाइट के माध्यम से सीधे निगरानी रखी जाती है।
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