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Chandigarh-Haryana News: रोजगार का लालच दे नाबालिग को दिया जबरन मजदूरी का जख्म

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बिहार के नाबालिग को भैंस डेयरी में दो माह तक मजदूरी के साथ शारीरिक उत्पीड़न सहना पड़ा
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हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, जींद और नूंह जिलों के अधिकारियों को कड़े निर्देश

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। रोजगार का झूठा लालच देकर बिहार के 15 वर्षीय नाबालिग से दो महीने तक जबरन मजदूरी और शारीरिक उत्पीड़न करने के मामले में हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने जींद और नूंह से जुड़े नाबालिग के बंधुआ मजदूरी व अमानवीय शोषण के मामले पर चिंता व्यक्त की है। आयोग ने दोनों जिलों के अधिकारियों से आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। साथ ही डेयरी प्रतिष्ठान में बंधुआ मजदूरी प्रथाओं की जांच, घायल नाबालिग की चिकित्सीय रिपोर्ट और पुनर्वास योजना व श्रम कानूनों के उल्लंघन की जांच रिपोर्ट मांगी है।
रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित बिहार के किशनगंज का निवासी है। वह बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर अपने साथियों से बिछड़ने के बाद एक अज्ञात व्यक्ति के संपर्क में आया जिसने उसे एक भैंस डेयरी में दस हजार मासिक वेतन पर काम का लालच दिया। नाबालिग को दो महीने तक जबरन मजदूरी और शारीरिक उत्पीड़न सहना पड़ा। पीड़ित को चारा काटते समय गंभीर चोट लग गई लेकिन नियोक्ता ने बिना मदद के सुनसान जगह पर छोड़ दिया। किसी तरह घायल बच्चा नूंह पहुंचा जहां एक शिक्षक ने उसकी मदद की और उसे स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले गया और पुलिस को सूचना दी।
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आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन व दीप भाटिया ने कहा-प्रस्तुत तथ्यों से न केवल शारीरिक क्षति और मानवीय गरिमा का हनन स्पष्ट होता है बल्कि उन सुरक्षा तंत्रों की पूरी तरह विफलता भी सामने आती है जो ऐसे शोषण से बच्चों की रक्षा करने के लिए बने हैं। नाबालिग कई दिनों तक बिना भोजन, पानी और चिकित्सकीय सहायता के धक्के खाता रहा। आयोग ने कहा-यह मामला तात्कालिक और व्यापक जांच की मांग करता है। इसमें संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना व पीड़ित को उचित चिकित्सकीय, मनोवैज्ञानिक और पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराना अनिवार्य है। आयोग के जनसंपर्क अधिकारी डाॅ. पुनीत अरोड़ा ने बताया, इस मामले में अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।
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