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Haryana: वायु प्रदूषण में इंडस्ट्री व ट्रांसपोर्ट की 58 फीसदी हिस्सेदारी, पराली जलाने से सबसे कम चार फीसदी
Sun, 24 Nov 2024 09:34 AM IST
नवीन दलाल
कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़
कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़
Published by: नवीन दलाल
Updated Sun, 24 Nov 2024 09:34 AM IST
सार
दिल्ली एनसीआर व हरियाणा के जिलों में प्रदूषण के स्त्रोतों को मालूम करने के लिए दिल्ली व हरियाणा प्रदूषण बोर्ड की स्टडी में जानकारी सामने आई है। हालांकि, सर्दियों के मुकाबले गर्मी के सीजन प्रदूषण फैलाने वाले कुछ कारकों के पैमाने में अंतर है।
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वायु प्रदूषण का खतरा (AI)
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
सर्दियों के समय हरियाणा की हवा में सबसे ज्यादा 58 फीसदी प्रदूषण (पीएम 2.5) की हिस्सेदारी इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्ट की हैं। इसमें इंडस्ट्री 30 और 28 फीसदी है। जबकि पराली जलाने से सबसे कम चार फीसदी प्रदूषण है। वहीं, धूल (मिट्टी, सड़क व कंट्रक्शन) से 17, रिहायशी क्षेत्र में 10 और 11 फीसदी प्रदूषण के अन्य कारण हैं।
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इसी तरह पीएम 10 प्रदूषण स्तर में सबसे ज्यादा इंडस्ट्री, धूल व ट्रांसपोर्ट की 78 फीसदी हिस्सेदारी हैं। इसमें इंडस्ट्री 27, धूल (मिट्टी, सड़क, कंट्रक्शन) 25 और ट्रांसपोर्ट 24 फीसदी हैं। यहां भी पराली का प्रदूषण चार फीसदी हैं। इसके अलावा रिहायशी 9 और अन्य कारणों की 11 फीसदी हिस्सेदारी हैं। इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्ट में पीएम 2.5 प्रदूषण की मात्रा में अधिक हैं, जो सूक्ष्म होने के कारण पीएम 10 से कहीं ज्यादा खतरनाक होता हैं।
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यह दिल्ली एनसीआर व हरियाणा के जिलों में प्रदूषण के स्त्रोतों को मालूम करने के लिए दिल्ली व हरियाणा प्रदूषण बोर्ड की स्टडी में जानकारी सामने आई है। हालांकि, सर्दियों के मुकाबले गर्मी के सीजन प्रदूषण फैलाने वाले कुछ कारकों के पैमाने में अंतर है। इसमें पीएम 2.5 के प्रदूषण सबसे ज्यादा धूल (मिट्टी, सड़क, कंट्रक्शन) 38 व इंडस्ट्री से 22 फीसदी हिस्सेदारी हैं। जबकि पराली या कृषि अवशेष जलाने पर 7 फीसदी प्रदूषण होता है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट 17, रिहायशी क्षेत्र 8 व अन्य कारण 8 फीसदी हैं।
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इसी तरह गर्मी में पीएम 10 प्रदूषण में सबसे ज्यादा धूल (मिट्टी,सड़क, कंट्रक्शन) 42 फीसदी हिस्सेदारी है। साथ ही इंडस्ट्री 22, ट्रांसपोर्ट 15, रिहायशी क्षेत्र 8, अन्य कारण 7 व कृषि अवशेष जलाने पर 7 फीसदी प्रदूषण होता हैं।
प्रदेश के प्रमुख राज्यों में सर्दियों के समय प्रदूषण के स्त्रोत
गुरुग्राम
गुरुग्राम में सबसे ज्यादा प्रदूषण कंट्रक्शन 32 व माध्यमिक 23 फीसदी (पीएम 10) हैं। जबकि पीएम 2.5 प्रदूषण में सबसे ज्यादा माध्यमिक (सेकेंडरी) 27 व बॉयोमॉस 23 फीसदी हैं। प्रारंभिक प्रदूषण से मिलकर बनने वाला माध्यमिक प्रदूषण में इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट, पराली, धूल व रिहायशी प्रदूषण शामिल होते हैं।
फरीदाबाद
सबसे ज्यादा धूल व कंट्रक्शन 44 (पीएम 10) और माध्यमिक (सेकेंडरी) 30 फीसदी (पीएम 2.5) हैं। जबकि 36 माध्यमिक व 20 फीसदी वाहन (पीएम 2.5) का प्रदूषण है।
बहादुरगढ़
सबसे ज्यादा 26 फीसदी धूल व कंट्रक्शन व 21 फीसदी माध्यमिक कारण (पीएम 10) हैं। जबकि बॉयोमास से 21 व 18 फीसदी कंट्रक्शन (पीएम 2.5) प्रदूषण है।
सोनीपत
धूल व कंट्रक्शन से 40 व वाहन से 23 फीसदी (पीएम 10) प्रदूषण होता है, जबकि बॉयोमास 27 व वाहन से 26 फीसदी प्रदूषण (पीएम 2.5) होता हैं।