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Chandigarh-Haryana News: तय संख्या से अधिक आईपीएस एक्स कैडर के पद सृजित करने पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान
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-इस मामले को जनहित याचिका के तौर पर सुनने का लिया अदालत ने निर्णय
-याचिकाकर्ता के वकील को इस मामले में अदालत के सहयोग के लिए किया नियुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस पर कैडर संख्या नियम का उल्लंघन कर आईपीएस पदों के सृजन का आरोप लगाते हुए दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अब जनहित याचिका में बदल दिया है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता के वकील प्रदीप सोलथ को मामले में सहायता के लिए न्यायमित्र नियुक्त किया और केंद्र सरकार को पक्ष रखने का निर्देश दिया।
आरती ने याचिका दाखिल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (कैडर संख्या निर्धारण) संशोधन विनियमन-2017 के तहत स्वीकृत 19 पदों से कहीं अधिक संख्या में आईपीएस अधिकारियों को एक्स-कैडर पदों पर तैनात करने के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता के निधन के बाद अदालत ने माना कि उठाया गया मुद्दा जनहित से संबंधित है और निर्देश दिया कि इस मामले को जनहित याचिका के रूप में सुना जाए। याचिका 2023 में दायर की गई थी। इसमें गृह मंत्रालय के एक पत्र का हवाला दिया गया था जिसमें हरियाणा सरकार से पूछा गया था कि क्या उसने 22 एक्स-कैडर आईपीएस पदों को बनाने से पहले केंद्र की मंजूरी ली थी?। याचिका के अनुसार, हरियाणा पुलिस ने 2017 कैडर संख्या अधिसूचना और आईपीएस कैडर नियम, 1954 का उल्लंघन करते हुए आईपीएस अधिकारियों के लिए 22 एक्स-कैडर पद सृजित किए हैं जिनमें से 14 पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) स्तर के और आठ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) स्तर के हैं। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि आईपीएस कैडर नियमों के तहत, कैडर पदों को कैडर अधिकारियों द्वारा भरा जाना चाहिए और कोई भी अधिकारी केंद्र की पूर्व स्वीकृति के बिना अधिकृत संख्या से अधिक एक्स-कैडर पद धारण नहीं कर सकता। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा ने न तो ऐसी स्वीकृति प्राप्त की है और न ही राज्य के वित्त विभाग से वित्तीय मंजूरी सहित एक्स-कैडर पदों के सृजन हेतु अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किया है। याचिका में आगे आरोप लगाया गया कि कई कैडर पद रिक्त रह गए हैं जबकि अधिकारियों को एक्स-कैडर पदों पर नियुक्त किया जा रहा है जो आईपीएस कैडर नियमों के नियम 10 का सीधा उल्लंघन है।
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-याचिकाकर्ता के वकील को इस मामले में अदालत के सहयोग के लिए किया नियुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस पर कैडर संख्या नियम का उल्लंघन कर आईपीएस पदों के सृजन का आरोप लगाते हुए दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अब जनहित याचिका में बदल दिया है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता के वकील प्रदीप सोलथ को मामले में सहायता के लिए न्यायमित्र नियुक्त किया और केंद्र सरकार को पक्ष रखने का निर्देश दिया।
आरती ने याचिका दाखिल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (कैडर संख्या निर्धारण) संशोधन विनियमन-2017 के तहत स्वीकृत 19 पदों से कहीं अधिक संख्या में आईपीएस अधिकारियों को एक्स-कैडर पदों पर तैनात करने के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता के निधन के बाद अदालत ने माना कि उठाया गया मुद्दा जनहित से संबंधित है और निर्देश दिया कि इस मामले को जनहित याचिका के रूप में सुना जाए। याचिका 2023 में दायर की गई थी। इसमें गृह मंत्रालय के एक पत्र का हवाला दिया गया था जिसमें हरियाणा सरकार से पूछा गया था कि क्या उसने 22 एक्स-कैडर आईपीएस पदों को बनाने से पहले केंद्र की मंजूरी ली थी?। याचिका के अनुसार, हरियाणा पुलिस ने 2017 कैडर संख्या अधिसूचना और आईपीएस कैडर नियम, 1954 का उल्लंघन करते हुए आईपीएस अधिकारियों के लिए 22 एक्स-कैडर पद सृजित किए हैं जिनमें से 14 पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) स्तर के और आठ अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) स्तर के हैं। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि आईपीएस कैडर नियमों के तहत, कैडर पदों को कैडर अधिकारियों द्वारा भरा जाना चाहिए और कोई भी अधिकारी केंद्र की पूर्व स्वीकृति के बिना अधिकृत संख्या से अधिक एक्स-कैडर पद धारण नहीं कर सकता। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा ने न तो ऐसी स्वीकृति प्राप्त की है और न ही राज्य के वित्त विभाग से वित्तीय मंजूरी सहित एक्स-कैडर पदों के सृजन हेतु अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किया है। याचिका में आगे आरोप लगाया गया कि कई कैडर पद रिक्त रह गए हैं जबकि अधिकारियों को एक्स-कैडर पदों पर नियुक्त किया जा रहा है जो आईपीएस कैडर नियमों के नियम 10 का सीधा उल्लंघन है।
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