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क्या अनुसूचित जाति के व्यक्ति पर दर्ज किया जा सकता है एससी/एसटी एक्ट: हाईकोर्ट
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-नियमित जमानत याचिका को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने उठाया कानून को लेकर प्रश्न
-मामले के गुण दोष में जाए बगैर हिरासत की अवधि को बनाया जमानत का आधार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एससी/एसटी अधिनियम के तहत दर्ज मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि जब आरोपी स्वयं वंचित अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित है, तो इस परिस्थिति में अधिनियम की धाराओं के लागू होने पर प्रश्नचिह्न उठता है।
मामले में याचिकाकर्ता पर आरोप था कि उसने सह-आरोपियों के साथ मिलकर शिकायतकर्ता पर हमला किया और उसे जातिसूचक शब्द कहते हुए जान से मारने की धमकी दी। आरोपी की ओर से दलील दी गई कि वह स्वयं अनुसूचित जाति से संबंधित है इसलिए इस अधिनियम की धाराएं उस पर लागू नहीं होतीं।
हाईकोर्ट ने पाया कि याची 5 जून 2025 से न्यायिक हिरासत में है। उसके खिलाफ कोई विशेष चोट या हथियार प्रयोग का आरोप नहीं है। उसे एफआईआर दर्ज होने के 425 दिन बाद गिरफ्तार किया गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी को जेल में रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसलिए याचिका स्वीकार करते हुए उसे नियमित जमानत प्रदान कर दी गई। इसी बीच कोर्ट ने एक कानूनी प्रश्न उठाया कि क्या आरोपी अनुसूचित जाति का हो तो उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट लागू होता है या नहीं। हालांकि इस मामले में कोर्ट ने खुद को केस के गुण दोष से दूर रखा और फैसला ट्रायल कोर्ट के विवेक पर छोड़ दिया।
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-मामले के गुण दोष में जाए बगैर हिरासत की अवधि को बनाया जमानत का आधार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एससी/एसटी अधिनियम के तहत दर्ज मामले में आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि जब आरोपी स्वयं वंचित अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित है, तो इस परिस्थिति में अधिनियम की धाराओं के लागू होने पर प्रश्नचिह्न उठता है।
मामले में याचिकाकर्ता पर आरोप था कि उसने सह-आरोपियों के साथ मिलकर शिकायतकर्ता पर हमला किया और उसे जातिसूचक शब्द कहते हुए जान से मारने की धमकी दी। आरोपी की ओर से दलील दी गई कि वह स्वयं अनुसूचित जाति से संबंधित है इसलिए इस अधिनियम की धाराएं उस पर लागू नहीं होतीं।
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हाईकोर्ट ने पाया कि याची 5 जून 2025 से न्यायिक हिरासत में है। उसके खिलाफ कोई विशेष चोट या हथियार प्रयोग का आरोप नहीं है। उसे एफआईआर दर्ज होने के 425 दिन बाद गिरफ्तार किया गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी को जेल में रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा। इसलिए याचिका स्वीकार करते हुए उसे नियमित जमानत प्रदान कर दी गई। इसी बीच कोर्ट ने एक कानूनी प्रश्न उठाया कि क्या आरोपी अनुसूचित जाति का हो तो उसके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट लागू होता है या नहीं। हालांकि इस मामले में कोर्ट ने खुद को केस के गुण दोष से दूर रखा और फैसला ट्रायल कोर्ट के विवेक पर छोड़ दिया।
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