फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   High Court refuses to regularize voluntary teachers who have been teaching for 31 years.

Haryana: 31 साल से पढ़ा रहे स्वैच्छिक शिक्षकों को नियमित करने से HC का इनकार, सरकार को दिया ये आदेश

Tue, 12 Aug 2025 08:43 PM IST
चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो Updated Tue, 12 Aug 2025 08:43 PM IST
सार

शिवालिक विकास बोर्ड/एजेंसी के तहत 1994 में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को सरकारी प्राथमिक स्कूलों में स्वैच्छिक शिक्षक के रूप में 1000 रुपये मासिक वेतन पर नियुक्त किया गया था। 2017 में उनका मासिक वेतन 5000 रुपये कर दिया गया।

विज्ञापन
High Court refuses to regularize voluntary teachers who have been teaching for 31 years.
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले 31 साल से कार्यरत स्वैच्छिक शिक्षकों को नियमित करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि इन शिक्षकों के लिए तीन माह में कोई उपयुक्त सहायता योजना तैयार की जाए क्योंकि वर्तमान में केवल 5 हजार रुपये महीना भुगतान को अदालत ने नाकाफी माना है।
विज्ञापन


शिवालिक विकास बोर्ड/एजेंसी के तहत 1994 में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को सरकारी प्राथमिक स्कूलों में स्वैच्छिक शिक्षक के रूप में 1000 रुपये मासिक वेतन पर नियुक्त किया गया था। 2017 में उनका मासिक वेतन 5000 रुपये कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने सेवा नियमित करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट की शरण ली। इसके बाद हाईकाेर्ट की सिंंगल बेंच ने इनकी मांग को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ खंडपीठ की शरण ली गई जहां जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने कहा कि ये नियुक्तियां स्वैच्छिक थीं और किसी स्वीकृत पद पर नहीं की गई थीं इसलिए सर्वोच्च न्यायालय के जीबन कृष्ण मंडल मामले के फैसले के अनुसार नियमितीकरण का अधिकार नहीं बनता है।
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि चूंकि ये शिक्षक कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक सेवा दे चुके हैं और अब उम्र के कारण अन्य रोजगार पाने में सक्षम नहीं हैं इसलिए राज्य को उनके हित में उचित योजना बनानी चाहिए। कोर्ट ने माना कि इनकी नियुक्ति के समय इनका वेतन एक हजार रुपये महीना तय किया गया था और 2017 में बढ़ाकर 5 हजार कर दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि आज की परिस्थितियों में इतना वेतन काफी नहीं है और वह भी तब जब ये दुर्गम क्षेत्रों में जाकर सेवाएं दे रहे हों। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमितीकरण से इनकार का मतलब यह नहीं है कि उन्हें हटाया जाए, यदि काम उपलब्ध है तो वे सेवा जारी रख सकते हैं। खंडपीठ के इस आदेश के साथ ही दुर्गम क्षेत्रों में लंबी अवधि से सेवा दे रहे इन शिक्षकों की हाईकोर्ट से उम्मीद टूट गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed