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Chandigarh-Haryana News: टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक आंदोलन पर उतरेंगे
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प्राइमरी टीचर एसोसिएशन 30 तक जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी
शिक्षक मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री को ज्ञापन सौंपकर फैसले को वापस लेने की मांग उठाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा शिक्षा विभाग के सभी शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) पास करना अनिवार्य करन के आदेश के विरोध में हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी। विभाग ने 14 सितंबर को पत्र जारी कर टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के लगभग 50,000 शिक्षक प्रभावित होंगे जिनमें 12,000 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। यह नियम अब 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी लागू होगा जिनको पहले छूट प्राप्त थी। केवल पांच वर्ष से कम सेवा अवधि वाले शिक्षकों को टीईटी से छूट दी गई है। पदोन्नति के लिए भी टीईटी पास करना जरूरी होगा।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष हरिओम राठी ने कहा कि इसके विरोध में 30 सितंबर तक जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे। मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस फैसले को वापस लेने की मांग की जाएगी। एसोसिएशन का कहना है कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है। इसलिए राज्य सरकारें केंद्र के साथ अपना अलग कानून बना सकती हैं। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा व शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जल्द यह फैसला वापस लिया जाना चाहिए।
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शिक्षक मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री को ज्ञापन सौंपकर फैसले को वापस लेने की मांग उठाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा शिक्षा विभाग के सभी शिक्षकों के लिए टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) पास करना अनिवार्य करन के आदेश के विरोध में हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगी। विभाग ने 14 सितंबर को पत्र जारी कर टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के लगभग 50,000 शिक्षक प्रभावित होंगे जिनमें 12,000 प्राथमिक शिक्षक शामिल हैं। यह नियम अब 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी लागू होगा जिनको पहले छूट प्राप्त थी। केवल पांच वर्ष से कम सेवा अवधि वाले शिक्षकों को टीईटी से छूट दी गई है। पदोन्नति के लिए भी टीईटी पास करना जरूरी होगा।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष हरिओम राठी ने कहा कि इसके विरोध में 30 सितंबर तक जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जाएंगे। मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस फैसले को वापस लेने की मांग की जाएगी। एसोसिएशन का कहना है कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है। इसलिए राज्य सरकारें केंद्र के साथ अपना अलग कानून बना सकती हैं। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा व शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जल्द यह फैसला वापस लिया जाना चाहिए।
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