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Chandigarh-Haryana News: कानूनी अधिकारों को लेकर सजग हरियाणवी, 59538 पहुंचे उपभोक्ता आयोग
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हर माह पहुंच रहीं 30 शिकायतें, 90 फीसदी मामलों का निपटारा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणवी अपने कानूनी अधिकारों को लेकर काफी सजग हैं। छोटे-मोटे सामान की खरीदारी में भी कमी पाए जाने पर लोग उपभोक्ता आयोग में दस्तक दे रहे हैं। साल 1989 से संचालित राज्य उपभोक्ता आयोग में 30 अप्रैल 2025 तक 22 जिलों से वस्तुओं एवं सेवाओं से संबंधित 13 श्रेणियों में कुल 59,538 शिकायतें आई हैं। इनमें आयोग की तरफ से 53 हजार 85 शिकायतों का निपटारा करवाया जा चुका है, जबकि 6453 केस लंबित है। आयोग ने करीब 90 फीसदी उपभोक्ताओं की शिकायतों का निपटारा करवा दिया है।
विक्रेताओं की मनमानी के खिलाफ जागरूक ग्राहकों की शिकायतें उपभोक्ता आयोग में पहुंच रहीं हैं। जूते, चप्पल, कपड़े सहित कॉस्मेटिक सामान, टीवी, फ्रीज, गीजर, मिक्सर, गैस चूल्हा और अन्य घरेलू सामान की शिकायतें लेकर लोग आयोग में पहुंच रहे हैं। मुआवजा व जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले से असंतुष्ट उपभोक्ता राज्य उपभोक्ता आयोग तक इंसाफ के लिए पहुंच रहे हैं। साल 1989 से 30 अप्रैल 2025 तक मिश्रित श्रेणी (घरेलू सामान) में 12 हजार 773 शिकायतें आ चुकी हैं। इनमें आयोग की तरफ से 11 हजार 331 मामलों का निपटारा भी कराया गया है। 30 अप्रैल तक 1442 शिकायतें लंबित हैं। हर माह करीब 30 शिकायतें आ रही हैं।
उपभोक्ता आयोग में शिकायत शुल्क
जिला उपभोक्ता आयोग
5 लाख तक - शुल्क नहीं
5-10 लाख - 200 रुपये
10-20 लाख - 400 रुपये
20-50 लाख - 1000 रुपये
राज्य उपभोक्ता आयोग में शिकायत शुल्क
50 लाख से 1 करोड़ - 2000 रुपये
एक करोड़ से दो करोड़ - 2500 रुपये
नोट - (जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में आने वाले उपभोक्ताओं को शुल्क नहीं देना होता है। जबकि व्यावसायिक पक्ष को राज्य उपभोक्ता आयोग में आने पर निचले आयोग से लगने वाले जुर्माने का आधा भुगतान तुरंत जमा करना होता है।)
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणवी अपने कानूनी अधिकारों को लेकर काफी सजग हैं। छोटे-मोटे सामान की खरीदारी में भी कमी पाए जाने पर लोग उपभोक्ता आयोग में दस्तक दे रहे हैं। साल 1989 से संचालित राज्य उपभोक्ता आयोग में 30 अप्रैल 2025 तक 22 जिलों से वस्तुओं एवं सेवाओं से संबंधित 13 श्रेणियों में कुल 59,538 शिकायतें आई हैं। इनमें आयोग की तरफ से 53 हजार 85 शिकायतों का निपटारा करवाया जा चुका है, जबकि 6453 केस लंबित है। आयोग ने करीब 90 फीसदी उपभोक्ताओं की शिकायतों का निपटारा करवा दिया है।
विक्रेताओं की मनमानी के खिलाफ जागरूक ग्राहकों की शिकायतें उपभोक्ता आयोग में पहुंच रहीं हैं। जूते, चप्पल, कपड़े सहित कॉस्मेटिक सामान, टीवी, फ्रीज, गीजर, मिक्सर, गैस चूल्हा और अन्य घरेलू सामान की शिकायतें लेकर लोग आयोग में पहुंच रहे हैं। मुआवजा व जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले से असंतुष्ट उपभोक्ता राज्य उपभोक्ता आयोग तक इंसाफ के लिए पहुंच रहे हैं। साल 1989 से 30 अप्रैल 2025 तक मिश्रित श्रेणी (घरेलू सामान) में 12 हजार 773 शिकायतें आ चुकी हैं। इनमें आयोग की तरफ से 11 हजार 331 मामलों का निपटारा भी कराया गया है। 30 अप्रैल तक 1442 शिकायतें लंबित हैं। हर माह करीब 30 शिकायतें आ रही हैं।
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उपभोक्ता आयोग में शिकायत शुल्क
जिला उपभोक्ता आयोग
5 लाख तक - शुल्क नहीं
5-10 लाख - 200 रुपये
10-20 लाख - 400 रुपये
20-50 लाख - 1000 रुपये
राज्य उपभोक्ता आयोग में शिकायत शुल्क
50 लाख से 1 करोड़ - 2000 रुपये
एक करोड़ से दो करोड़ - 2500 रुपये
नोट - (जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में आने वाले उपभोक्ताओं को शुल्क नहीं देना होता है। जबकि व्यावसायिक पक्ष को राज्य उपभोक्ता आयोग में आने पर निचले आयोग से लगने वाले जुर्माने का आधा भुगतान तुरंत जमा करना होता है।)
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