{"_id":"68af65ee4a9d3eb8e900e86b","slug":"haryana-vidhansabha-sessioncag-report-five-departments-caused-loss-to-government-treasury-haryana-news-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1089-802823-2025-08-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh-Haryana News: पांच विभागों ने खजाने को लगाई चपत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh-Haryana News: पांच विभागों ने खजाने को लगाई चपत
विज्ञापन
स्थानीय निकाय, खाद्य एवं आपूर्ति, कर्मकार कल्याण बोर्ड, जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी और एचएसवीपी में बरती गई लापरवाही
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्य सरकार के पांच विभागों ने काम में लापरवाही बरत कर खजाने में चपत लगाई है। इसका खुलासा कैग (सीएजी) की रिपोर्ट में हुआ है। इन पांच विभागों में शहरी स्थानीय निकाय, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड, जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) शामिल हैं।
गुरुग्राम व फरीदाबाद नगर निगम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की परियोजना समय पर लागू न होने से निकाय विभाग को 108.93 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ा। बंधवाड़ी साइट पर अपशिष्ट का जैविक उपचार न करने के लिए एनजीटी ने गुरुग्राम नगर निगम पर 100 करोड़ का जुर्माना लगाया। गेहूं की खरीद मंडियों में बुनियादी सुविधाएं, तौल कांटा, अग्निशमन व्यवस्था, किसान विश्राम गृह, कैंटीन में कमियां मिली। कुछ मंडियों में तौल कांटे न होने से हैफेड ने बाहर से गेहूं की माप करवाई। इससे 2.93 करोड़ का अतिरिक्त खर्च किया गया। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने गेहूं की खरीद के लिए उच्च ब्याज दर पर कर्ज लिया। इससे 222.24 करोड़ का अतिरिक्त ब्याज देना पड़ा। आढ़तियों को 48.12 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कमीशन दिया जबकि भारतीय खाद्य निगम ने 46 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन तय किया था। इससे खरीद एजेंसियों को 14.27 करोड़ रुपये की चपत लगी। कवर्ड गोदामों में संरक्षण एवं रखरखाव शीट नहीं होने से एजेंसियों को 90.30 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है।
श्रम विभाग का भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में 14 मामलों में सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति लिए बिना 108.91 करोड़ के अनुबंध राशि की जगह 255.70 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। 2017-18 से 2022-23 के दौरान श्रम उपकर संग्रह 2,153.11 करोड़ था लेकिन बोर्ड ने 2017-18 से 2022-23 के बीच कल्याणकारी योजनाओं पर उपलब्ध निधियों (5,553.71 करोड़) में से सिर्फ 1,656.78 करोड़ (29.83 फीसदी) का उपयोग किया। इससे 713.25 करोड़ आयकर देना पड़ा।
विज्ञापन
जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग के कुछ मंडलों में ई-निविदा से बचने के लिए प्रारंभिक निविदा राशि एक लाख से कम रखी गई थी मगर बाद में इसे बढ़ा दिया गया। इससे 77.89 करोड़ की अनुबंध राशि के जगह 178.13 करोड़ का भुगतान किया गया। इसके बावजूद पांच परियोजनाएं अधूरी रह गईं। उच्च दरों पर भुगतान कर ठेकेदारों को 73.73 करोड़ का अनुचित लाभ दिया गया। लेखा परीक्षा के खामी पकड़ने के बाद 6.64 करोड़ की वसूली की गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग में आपकी बेटी हमारी बेटी योजना के तंत्र में स्वीकृति के लिए आवेदनों के चयन और निधियों की मंजूरी की प्रक्रिया के दौरान, दोहरे आवेदनों को पहचानने और हटाने की व्यवस्था न होने से जीवन बीमा निगम को 15.54 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के उदासीनता के कारण भू-स्वामियों को मुआवजे की भुगतान में 1,593 दिनों की अत्यधिक देरी के चलते 2.07 करोड़ का ब्याज देना पड़ा। भूमि के त्रुटिपूर्ण माप के कारण भू-स्वामियों को 3.42 करोड़ मुआवजे का अधिक भुगतान हुआ। गुरुग्राम और फरीदाबाद में मुआवजे के भुगतान में देरी के कारण 83.04 करोड़ की ब्याज राशि दी गई। एचएसवीपी की ओर से अप्रैल 2018 से मार्च 2022 के दौरान सीवरेज बिल (15.08 करोड़) और पानी की गलत टैरिफ दरें लागू करने कारण 32.67 करोड़ की राशि वसूली नहीं जा सकी। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में विभिन्न मुकदमेबाजी के चलते राज्य के खजाने को 86.49 लाख की हानि हुई।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्य सरकार के पांच विभागों ने काम में लापरवाही बरत कर खजाने में चपत लगाई है। इसका खुलासा कैग (सीएजी) की रिपोर्ट में हुआ है। इन पांच विभागों में शहरी स्थानीय निकाय, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड, जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) शामिल हैं।
गुरुग्राम व फरीदाबाद नगर निगम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की परियोजना समय पर लागू न होने से निकाय विभाग को 108.93 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ा। बंधवाड़ी साइट पर अपशिष्ट का जैविक उपचार न करने के लिए एनजीटी ने गुरुग्राम नगर निगम पर 100 करोड़ का जुर्माना लगाया। गेहूं की खरीद मंडियों में बुनियादी सुविधाएं, तौल कांटा, अग्निशमन व्यवस्था, किसान विश्राम गृह, कैंटीन में कमियां मिली। कुछ मंडियों में तौल कांटे न होने से हैफेड ने बाहर से गेहूं की माप करवाई। इससे 2.93 करोड़ का अतिरिक्त खर्च किया गया। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने गेहूं की खरीद के लिए उच्च ब्याज दर पर कर्ज लिया। इससे 222.24 करोड़ का अतिरिक्त ब्याज देना पड़ा। आढ़तियों को 48.12 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कमीशन दिया जबकि भारतीय खाद्य निगम ने 46 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन तय किया था। इससे खरीद एजेंसियों को 14.27 करोड़ रुपये की चपत लगी। कवर्ड गोदामों में संरक्षण एवं रखरखाव शीट नहीं होने से एजेंसियों को 90.30 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है।
विज्ञापन
श्रम विभाग का भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में 14 मामलों में सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति लिए बिना 108.91 करोड़ के अनुबंध राशि की जगह 255.70 करोड़ का भुगतान कर दिया गया। 2017-18 से 2022-23 के दौरान श्रम उपकर संग्रह 2,153.11 करोड़ था लेकिन बोर्ड ने 2017-18 से 2022-23 के बीच कल्याणकारी योजनाओं पर उपलब्ध निधियों (5,553.71 करोड़) में से सिर्फ 1,656.78 करोड़ (29.83 फीसदी) का उपयोग किया। इससे 713.25 करोड़ आयकर देना पड़ा।
विज्ञापन
जन स्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग के कुछ मंडलों में ई-निविदा से बचने के लिए प्रारंभिक निविदा राशि एक लाख से कम रखी गई थी मगर बाद में इसे बढ़ा दिया गया। इससे 77.89 करोड़ की अनुबंध राशि के जगह 178.13 करोड़ का भुगतान किया गया। इसके बावजूद पांच परियोजनाएं अधूरी रह गईं। उच्च दरों पर भुगतान कर ठेकेदारों को 73.73 करोड़ का अनुचित लाभ दिया गया। लेखा परीक्षा के खामी पकड़ने के बाद 6.64 करोड़ की वसूली की गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग में आपकी बेटी हमारी बेटी योजना के तंत्र में स्वीकृति के लिए आवेदनों के चयन और निधियों की मंजूरी की प्रक्रिया के दौरान, दोहरे आवेदनों को पहचानने और हटाने की व्यवस्था न होने से जीवन बीमा निगम को 15.54 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के उदासीनता के कारण भू-स्वामियों को मुआवजे की भुगतान में 1,593 दिनों की अत्यधिक देरी के चलते 2.07 करोड़ का ब्याज देना पड़ा। भूमि के त्रुटिपूर्ण माप के कारण भू-स्वामियों को 3.42 करोड़ मुआवजे का अधिक भुगतान हुआ। गुरुग्राम और फरीदाबाद में मुआवजे के भुगतान में देरी के कारण 83.04 करोड़ की ब्याज राशि दी गई। एचएसवीपी की ओर से अप्रैल 2018 से मार्च 2022 के दौरान सीवरेज बिल (15.08 करोड़) और पानी की गलत टैरिफ दरें लागू करने कारण 32.67 करोड़ की राशि वसूली नहीं जा सकी। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में विभिन्न मुकदमेबाजी के चलते राज्य के खजाने को 86.49 लाख की हानि हुई।