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Haryana: करोड़ों की जमीन पर स्टे के फैसले को अंबाला मंडलायुक्त ने किया रद्द, पूर्व IAS रेनु फुलिया को झटका

Mon, 25 Aug 2025 11:02 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 25 Aug 2025 11:02 AM IST
सार

जमीन से स्टे हटने के कुछ महीने बाद पूर्व मंडलायुक्त रेनु फुलिया के पति व बेटे ने पांच एकड़ जमीन खरीद ली थी। जमीन खरीदने के मकसद से ही स्टे को हटाया गया था। जब इस मामले की जानकारी राज्य सरकार के पास पहुंची तो इस जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई।

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Haryana Ambala Divisional Commissioner cancels stay order on land worth crores, former IAS Renu Fuliya
रेणु फुलिया - फोटो : फाइल

विस्तार

पंचकूला के बीड़ फिरोजड़ी में करोड़ों की जमीन पर लगे स्टे हटाने के फैसले को अंबाला मंडलायुक्त ने रद्द कर दिया है। पिछले साल पूर्व मंडलायुक्त रेनु फुलिया ने एक तरफा फैसला देते हुए इस जमीन पर 20 साल पुराने स्टे को रद्द कर दिया था। 

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जमीन से स्टे हटने के कुछ महीने बाद उनके पति व बेटे ने पांच एकड़ जमीन खरीद ली थी। जमीन खरीदने के मकसद से ही स्टे को हटाया गया था। जब इस मामले की जानकारी राज्य सरकार के पास पहुंची तो इस जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई। पूरे मामले की जांच के लिए आईएएस अधिकारियों की एक कमेटी कर रही है।
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अंबाला मंडलायुक्त संजीव वर्मा की ओर से दिए आदेश में दाखिल-खारिज को रद्द कर दिया है। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि पटवारी फर्द  बदर तैयार कर राजस्व में दर्ज प्रवष्टियों को सही करे। दाखिल खारिज के अतिरिक्त यदि कोई अन्य राजस्व प्रविष्टियां बदली गई हैं तो उसे भी रद्द किया जाए। इस आदेश की एक कॉपी मुख्य सचिव को भी भेजी गई है। 
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मंडलायुक्त की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह जमीन राज्य की है। राज्य इसमें पार्टी है। पूर्व मंडलायुक्त ने स्टे हटाने के दौरान न तो राज्य को कोई सूचना दी और न ही निचली अदालत का कोई रिकॉर्ड मंगवाया। केवल याचिकाकर्ता के वकील की सुनवाई के बाद 18 सितंबर 2003 के आदेश को रद्द कर दिया। 2003 में भी इस जमीन को खरीदने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद 18 सितंबर 2003 को जमीन की खरीद फरोख्त पर स्टे लगा दिया गया था।

आदेश में यह भी लिखा है कि राज्य की ओर से अभिलेख में प्रस्तुत सामग्री से स्पष्ट है कि तत्कालीन मंडलायुक्त इस मामले में व्यक्तिगत रुचि थी। उन्होंने जिस याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला दिया था, फैसला देने से पहले ही उनसे जमीन खरीदने का समझौता जून 2023 में कर लिया था, जबकि याचिका अगस्त 2023 में डाली गई थी। इस जमीन के संभावित विक्रेता तत्कालीन मंडलायुक्त के पति व बेटे थे। याचिका दायर होने के एक महीने के बाद उन्होंने आदेश पारित कर दिया। मौजूदा मंडलायुक्त ने आदेश में यह भी लिखा है कि इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है कि जब 20 साल पहले जब स्टे लग गया था तो इतने साल बाद क्यों आवेदन किया गया। इसके अलावा दूसरे पक्ष को सुने बिना कोई भी आदेश पारित नहीं किया जा सकता। इसलिए सितंबर 2023 के आदेश को रद्द किया जाता है।

यह था मामला

पंचकूला के बीड़ फिरोजड़ी समेत सात गांवों में करीब 1396 एकड़ जमीन राजा भगवंत सिंह की थी। उसके बाद यह जमीन राज्य के पास चली गई। 2002 में पूर्व आईएएस सुनील गुलाटी व उनकी बहन शशि गुलाटी ने राजा के वारिसों से करीब 14 एकड़ जमीन खरीद ली। जब वे जमीन का इंतकाल दर्ज कराने गए तो उस दौरान प्रशासन को इस जमीन की खरीद-फरोख्त के बारे में पता चला। तत्कालीन उपायुक्त ने इस जमीन पर स्टे लगा दिया, ताकि कोई इसे खरीद न सके। 20 साल बाद अंबाला की तत्कालीन मंडलायुक्त रेनु फुलिया ने इस स्टे को रद्द कर दिया। स्टे हटते ही जमीन खरीदने पर लगी रोक हट गई। उसके उसके कुछ महीने बाद ही शशि गुलाटी ने 12 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री के लिए पंचकूला के राजस्व अधिकारियों से संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने यह जमीन करीब सवा पांच करोड़ में चार लोगों को बेची है। इनमें सें पांच एकड़ जमीन रेनु फुलिया के पति पूर्व आईएएस एसएस फुलिया व उनके बेटे ने खरीदी। जब सरकार को इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने इस जमीन की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी। 

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