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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Gratuity of an employee cannot be with held after departmental and judicial proceedings are over: High Court

विभागीय और न्यायिक कार्यवाही समाप्त होने पर कर्मचारी की ग्रेच्युटी नहीं रोक सकते : हाईकोर्ट

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- कर्मचारी की याचिका स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने दो माह में लाभ जारी करने का दिया आदेश
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- सरकार के फैसले को हाईकोर्ट ने माना गलत, भुगतान में देरी पर देना होगा 7.5 प्रतिशत ब्याज


चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि विभागीय और न्यायिक कार्यवाही समाप्त होने के बाद सरकार कर्मचारी की ग्रेच्युटी नहीं रोक सकती, खासकर तब जब आपराधिक मामला उसके सरकारी कर्तव्यों से जुड़ा न हो। जस्टिस जगमोहन बंसल ने कर्मचारी की याचिका स्वीकार करते हुए हरियाणा सरकार को ग्रेच्युटी दो माह के भीतर जारी करने के निर्देश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
याचिकाकर्ता कर्मचारी को एक निजी विवाद से जुड़े आपराधिक मामले में दोषी ठहराया गया था और उसे एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हुई थी जिसमें मामूली सजा के तौर पर एक वेतनवृद्धि अस्थायी रूप से रोकी गई थी। इसके बावजूद राज्य सरकार ने उसकी ग्रेच्युटी जारी नहीं की।
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अदालत ने कहा कि हरियाणा सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 2016 के नियम 81 के तहत केवल कार्यवाही लंबित रहने तक ही ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है। ट्रायल समाप्त होने के बाद इसे रोके रखने का कोई प्रावधान नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियम 10 केवल पेंशन से संबंधित है, न कि ग्रेच्युटी से। कोर्ट ने कहा कि निजी विवाद में हुई दोष सिद्धि को गंभीर अपराध या गंभीर कदाचार नहीं माना जा सकता।
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