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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Government cannot keep employees on temporary basis after 20 years of service: High Court

20 वर्षों की सेवा के बाद कर्मचारियों को अस्थायी नहीं रख सकती सरकार : हाईकोर्ट

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नियमितीकरण से मना करना मनमाना और भेदभावपूर्ण, नियमित करे सरकार
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वन विभाग के दैनिक वेतनभोगियों की सेवाएं नियमित करने का आदेश
चंडीगढ़। दैनिक वेतन और कैजुअल कर्मचारियों के लिए दूरगामी असर वाला फैसला सुनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को वन विभाग में वर्षों से कार्यरत दर्जनों कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि दशकों तक सेवा लेने के बाद नियमितीकरण से इन्कार करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं को नियमित करने तथा संबंधित लाभ जारी करने का आदेश दिया है।
जस्टिस संदीप मौदगिल ने यह आदेश लगभग 50 याचिकाओं के एक साथ निपटारे के दौरान पारित किया। ये याचिकाएं उन दैनिक वेतन और कैजुअल मजदूरों की ओर से दायर की गई थीं जो वर्ष 2000 के शुरुआती दौर से वन विभाग में कार्यरत हैं और जिनकी सेवाओं को हरियाणा सरकार की 2003 और 2004 की नियमितीकरण नीतियों के बावजूद नियमित नहीं किया गया।
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हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भले ही राज्य को किसी विशेष नियमितीकरण नीति को बनाने या लागू करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता लेकिन राज्य से यह अपेक्षा की जाती है कि वह नीति-निर्देशक तत्वों के अनुरूप कर्मचारियों को सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण उपलब्ध कराने वाली नीतियां विकसित करे, ताकि कार्यकुशलता और सुरक्षा की भावना बनी रहे।
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कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि कई याचिकाकर्ताओं को पूर्व में अवैध रूप से सेवामुक्त किया गया था, जिनकी बहाली श्रम न्यायालय के आदेशों के जरिए निरंतर सेवा के साथ हुई और जिन्हें हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। इसके बावजूद विभाग ने स्वीकृत पदों की कमी, कथित सेवा अंतराल और 2007 में नीति वापस लिए जाने जैसे तर्क देकर नियमितीकरण से इन्कार किया, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।


जस्टिस मौदगिल ने कहा कि जब न्यायिक आदेशों के जरिए निरंतर सेवा प्रदान की जा चुकी है, तो कर्मचारियों को सभी परिणामी लाभों के लिए निर्बाध सेवा में माना जाएगा, जिसमें नियमितीकरण भी शामिल है। कोर्ट ने सरकार की इस दलील पर भी सवाल उठाया कि सेवा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, जबकि समान परिस्थितियों में अन्य कर्मचारियों को पहले ही नियमित किया जा चुका है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जिन मामलों में कर्मचारी राज्य की जानकारी और सहमति से 20 वर्ष से अधिक सेवा दे चुके हैं और उस समय नियमितीकरण की नीतियां प्रभावी थीं, वहां राहत से इन्कार नहीं किया जा सकता।
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