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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Gaushalas are running on donations and not grants.

Chandigarh-Haryana News: अनुदान नहीं दान से चल रहीं गोशालाएं

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280 गोशाला संचालकों को जनवरी से मार्च की तिमाही का चारा अनुदान नहीं मिला
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चंडीगढ़। प्रदेश के गोशाला संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में करीब 680 पंजीकृत गोशालाएं चल रही हैं। इनमें से करीब 280 गोशाला संचालकों को चारे के लिए हर तीन महीने पर मिलने वाला सरकारी अनुदान पांच महीने बाद भी नहीं मिला है। इससे ये गोशालाएं दान पर चल रही हैं।
प्रदेश सरकार पंजीकृत गोशालाओं को प्रति तिमाही चारा अनुदान जारी करती है। इस साल जून आ गया, लेकिन अभी तक जनवरी से मार्च 2025 का चारा अनुदान जारी नहीं किया गया है। गोशाला महासंघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश मलिक का कहना है कि अब भी गोवंश सड़कों पर हैं। गोशाला संचालक सरकार को पूरी मदद करते हैं, लेकिन समय से अनुदान नहीं मिल रहा।
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खर्चा का ब्योरा न देने से अटका बजट
गोशाला संचालकों को पिछली बार मिले अनुदान और उसमें से कुल कितना खर्चा हुआ, इसका विवरण पोर्टल पर देना होता है। करीब 400 गोशाला संचालकों ने ही इस खर्च के यूसी (यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट) पोर्टल पर जमा कराए हैं। इस वजह से 280 गोशालाओं का अनुदान अटका हुआ है। वहीं, गोशाला संचालकों का कहना है कि वे फसली सीजन में चारा इकट्ठा खरीद लेते हैं, इस कारण प्रति क्विंटल 140-150 रुपये तक सस्ता मिल जाता है। अनुदान देरी से मिलने पर उधार चारा खरीद लेते हैं, जरूरत पड़ने पर लोगों से चंदा मांगते हैं। गोशाला संचालकों का तर्क है कि चारा पहले खरीदने का ब्योरा कहां से लाएं।
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गोशाला संचालकों का तर्क, बेहद कम मदद मिल रही

हरियाणा राज्य गोशाला संगठन के राज्य प्रधान शमशेर आर्य का कहना है कि गोशालाओं को संचालित करना मुश्किल हो रहा है। एक गोवंश औसतन 10 किलो सूखा और पांच किग्रा हरा चारा खाता है। ऐसे में चार रुपये प्रति किग्रा के हिसाब से प्रतिदिन 60 रुपये एक गोवंश के चारे का खर्चा हो गया, लेकिन सरकार प्रति बछड़ा-बछड़ी के लिए 10 रुपये प्रति दिन, गाय के लिए 20 प्रतिदिन रुपये और नंदी के लिए प्रतिदिन 25 रुपये का बजट देती है। बिजली, पानी, शेड, मजदूरी, दवा-उपचार का खर्चा अलग है। सरकार की मदद नाममात्र की है। खर्च का ब्योरा भी सरकार मांगती है, लेकिन हर तीन माह में खर्च का ब्योरा तैयार कैसे करें, जबकि चारा सीजन में ही खरीद लिया जाता है।







पिछली बार 600 से अधिक गोशालाओं के खातों में दो बार में करीब 107.28 करोड़ रुपये का अनुदान भेजा था। अभी बड़ी संख्या में गोशाला संचालकों के खाते में अनुदान न पहुंचने की जानकारी मिली है। जल्द ही गोशाला संचालकों के खातों में सीधे राशि भेजी जाएगी।
श्रवण गर्ग, चेयरमैन, हरियाणा गोसेवा आयोग
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