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Chandigarh-Haryana News: हत्या व फिरौती के कैदी की फरलो याचिका खारिज
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-कोर्ट ने कहा, फरलो देने से खतरे में पड़ सकती है समाज की सुरक्षा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मामले में आदेश देते हुए साफ किया है कि हत्या और फिरौती जैसे जघन्य अपराधों में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों को फरलो (अस्थायी रिहाई) का लाभ नहीं दिया जा सकता। जस्टिस संदीप मौदगिल ने सुनवाई के बाद कैदी सोनू उर्फ अमर की याचिका खारिज कर दी। इस दौरान चार हफ्ते की फरलो मांगी गई थी।
सोनीपत निवासी सोनू के खिलाफ थाना गन्नौर में 26 दिसंबर 2005 को एफआईआर दर्ज हुई थी जिसमें हत्या, अपहरण, फिरौती मांगने, आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने जैसी धाराएं शामिल थीं। ट्रायल पूरा होने पर उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। कैदी ने जेल अधीक्षक के समक्ष फरलो की मांग यह कहते हुए रखी कि उसने जेल में अच्छे आचरण से रिमिशन (सजा में छूट) अर्जित की है और वह अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना चाहता है। जेल अधीक्षक ने 24 अप्रैल को उसका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्परेरी रिलीज) एक्ट, 2022 की धारा 4(3) के तहत हत्या-फिरौती जैसे अपराधों में दोषी ठहराए गए कैदी फरलो के पात्र नहीं हैं। सरकार की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया कि कैदी पहले 16 बार पैरोल/फरलो पर बाहर जा चुका है, इसलिए अब उसे नए कानून के तहत राहत नहीं मिल सकती। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पैरोल और फरलो कैदी का अधिकार नहीं बल्कि एक रियायत है जिसे परिस्थितियों और कानूनी प्रावधान के आधार पर दिया जा सकता है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मामले में आदेश देते हुए साफ किया है कि हत्या और फिरौती जैसे जघन्य अपराधों में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदियों को फरलो (अस्थायी रिहाई) का लाभ नहीं दिया जा सकता। जस्टिस संदीप मौदगिल ने सुनवाई के बाद कैदी सोनू उर्फ अमर की याचिका खारिज कर दी। इस दौरान चार हफ्ते की फरलो मांगी गई थी।
सोनीपत निवासी सोनू के खिलाफ थाना गन्नौर में 26 दिसंबर 2005 को एफआईआर दर्ज हुई थी जिसमें हत्या, अपहरण, फिरौती मांगने, आपराधिक साजिश और सबूत मिटाने जैसी धाराएं शामिल थीं। ट्रायल पूरा होने पर उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। कैदी ने जेल अधीक्षक के समक्ष फरलो की मांग यह कहते हुए रखी कि उसने जेल में अच्छे आचरण से रिमिशन (सजा में छूट) अर्जित की है और वह अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना चाहता है। जेल अधीक्षक ने 24 अप्रैल को उसका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्परेरी रिलीज) एक्ट, 2022 की धारा 4(3) के तहत हत्या-फिरौती जैसे अपराधों में दोषी ठहराए गए कैदी फरलो के पात्र नहीं हैं। सरकार की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया कि कैदी पहले 16 बार पैरोल/फरलो पर बाहर जा चुका है, इसलिए अब उसे नए कानून के तहत राहत नहीं मिल सकती। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पैरोल और फरलो कैदी का अधिकार नहीं बल्कि एक रियायत है जिसे परिस्थितियों और कानूनी प्रावधान के आधार पर दिया जा सकता है।
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