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Chandigarh-Haryana News: लिंगानुपात में सुधार न होने पर डॉक्टर का निलंबन, हाईकोर्ट ने लगाई रोक
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-जोटां वाली प्राथमिक चिकित्सा केंद्र सिरसा में था तैनात
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक चिकित्सक के निलंबन आदेश और विदेश यात्रा के लिए एनओसी रोकने संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकारी निर्देश पर अंतरिम रूप से रोक लगा दी है। इसके साथ ही जस्टिस संदीप मौदगिल ने याचिका पर हरियाणा सरकार सहित अन्य प्रतिवादियोंं को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता तरुण सिंगला ने तर्क दिया कि उनकी नियुक्ति 2020 में की गई थी। वर्तमान में वह सिरसा के जोटां वाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं। याची ने कहा कि उन्हें मनमाने तरीके से निलंबित किया गया है। नवंबर 2025 के निलंबन आदेश में उनके कार्यक्षेत्र में लिंगानुपात में सुधार न होने को आधार बनाया गया है जबकि उन्हें पीएनडीटी एक्ट के प्रवर्तन से संबंधित कोई विशेष जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। याचिका में 23 जुलाई 2025 के उस आदेश को भी चुनौती दी गई है जिसमें कहा गया है कि जिन क्षेत्रों में लिंगानुपात गिर रहा है, वहां के स्वास्थ्य अधिकारियों को विदेश यात्रा के लिए एनओसी जारी नहीं की जाएगी। याची का कहना है कि यह नियम अनुच्छेद 19 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है। अदालत के निर्देश के अनुसार तब तक दोनों विवादित आदेशों का संचालन स्थगित रहेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक चिकित्सक के निलंबन आदेश और विदेश यात्रा के लिए एनओसी रोकने संबंधी आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकारी निर्देश पर अंतरिम रूप से रोक लगा दी है। इसके साथ ही जस्टिस संदीप मौदगिल ने याचिका पर हरियाणा सरकार सहित अन्य प्रतिवादियोंं को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता तरुण सिंगला ने तर्क दिया कि उनकी नियुक्ति 2020 में की गई थी। वर्तमान में वह सिरसा के जोटां वाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं। याची ने कहा कि उन्हें मनमाने तरीके से निलंबित किया गया है। नवंबर 2025 के निलंबन आदेश में उनके कार्यक्षेत्र में लिंगानुपात में सुधार न होने को आधार बनाया गया है जबकि उन्हें पीएनडीटी एक्ट के प्रवर्तन से संबंधित कोई विशेष जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। याचिका में 23 जुलाई 2025 के उस आदेश को भी चुनौती दी गई है जिसमें कहा गया है कि जिन क्षेत्रों में लिंगानुपात गिर रहा है, वहां के स्वास्थ्य अधिकारियों को विदेश यात्रा के लिए एनओसी जारी नहीं की जाएगी। याची का कहना है कि यह नियम अनुच्छेद 19 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है। अदालत के निर्देश के अनुसार तब तक दोनों विवादित आदेशों का संचालन स्थगित रहेगा।
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