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Chandigarh-Haryana News: डेंगू का डंक...20 दिन में मामलों में 42 फीसदी उछाल
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पिछले सालों की तुलना में कम, पर अक्तूबर के आखिरी सप्ताह से केस बढ़े
सिरसा में बना डेंगू का नया हॉट स्पॉट, केसों की संख्या पहुंची 470
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा में 20 दिनों में डेंगू के केसों में उछाल देखने को मिला है। 28 अक्तूबर से 17 नवंबर तक डेंगू के केसों में करीब 43.9 फीसदी का उछाल देखने को मिला है। 28 अक्तूबर को 1635 केस थे जबकि 17 नवंबर तक 2352 मरीज सामने आए हैं। सिरसा जिला नया हॉट स्पॉट बना है। यहां डेंगू के मामले 470 पहुंच गए हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि डेंगू के केस बढ़ने का सीधा मतलब है कि डेंगू का मच्छर मौजूद है। ऐसे में विभाग को तेजी से फॉगिंग करवाने और विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता है। अभी डेंगू खत्म नहीं हुआ है। लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि डेंगू की रोकथाम के लिए टीमें फील्ड में तैनात हैं। घर-घर डेंगू के लार्वा की जांच की जा रही है। संदिग्ध मरीजों की सैंपलिंग की जा रही है ताकि डेंगू का प्रसार रोका जा सके।
मानसून की विदाई के बाद डेंगू के केस आना शुरू हो गए थे। हालांकि पिछले सालों के मुकाबले इसकी गति काफी धीमी रही लेकिन अक्तूबर के आखिरी सप्ताह और नवंबर में डेंगू के केस बढ़ने लगे। यह स्थिति उस समय है जब तापमान में गिरावट जारी है। 17 नवंबर को एक दिन में डेंगू के 42 नए केस आए। इनमें 28 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा जिनमें 13 सरकारी और 15 निजी अस्पताल में दाखिल हैं। जनवरी से लेकर अब तक डेंगू के 1219 मरीजों को अस्पताल में दाखिल कराया जा चुका है। 1091 मरीजों को ओपीडी में जांच के बाद घर भेज दिया गया था। हालांकि गनीमत यह रही है कि डेंगू अब तक जानलेवा नहीं बना है। पूरे सीजन में डेंगू से मौत की पुष्टि विभाग ने नहीं की है। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डा. मनीष बंसल ने बताया, पिछले सालों की अपेक्षा डेंगू के काफी कम केस हैं। विभाग की टीमों ने डेंगू को नियंत्रण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। फॉगिंग के साथ निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों को भी एहतियात में लापरवाही नहीं बरतनी है। कहीं भी पानी जमा न होने दें।
पिछले सालों से 60 फीसदी केस कम
पिछले सालों की तुलना में डेंगू के केसों में 60 फीसदी केसों की गिरावट है। पिछले साल डेंगू के सीजन में 6469 केस दर्ज किए गए थे और 9 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, 2023 में स्थिति और गंभीर थी। उस साल डेंगू के 8081 केस आए थे और 11 लोगों की मौत हुई थी। साल 2022 में 8996 केस और 18 की मौत, 2021 में 11835 केस और 13 की मौत, 2020 में 1377 मरीज और जीरों मौतें थी। कुल मिलाकर चार साल बाद डेंगू के केसों में गिरावट दर्ज की गई है।
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सिरसा में डेंगू के 470 मरीज, दस जिलों की स्थिति
जिला डेंगू
सिरसा 470
रेवाड़ी 292
रोहतक 192
सोनीपत 175
करनाल 201
पंचकूला 106
दादरी 102
फरीदाबाद 92
जींद 94
यमुनानगर 100
कैथल 86
पानीपत 86
विभाग की ओर से उठाए गए ये कदम
1. दस नवंबर तक कुल 3.87 करोड़ घरों की जांच की गई। इसमें से 2.24 लाख घरों में लार्वा पाए गए।
2. अब तक दस हजार से ज्यादा स्थानों पर फॉगिंग करवाई जा चुकी है।
3. डेंगू परीक्षण के लिए 27 प्रयोगशालाएं लगाई गई हैं। उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी सैंपलिंग की व्यवस्था की गई है।
4. सरकारी अस्पतालों में भर्ती हरियाणा के मूल निवासी डेंगू रोगियों के लिए निशुल्क सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) का प्रावधान किया गया है।
5. डेंगू मरीजों के लिए सिविल अस्पतालों और सीएचसी/पीएचसी में 255 वार्ड और 1091 बिस्तर आरक्षित रखे गए हैं।
6. सरकारी अस्पतालों में भर्ती राज्य के मूल निवासियों मरीजों को निजी ब्लड बैंकों से निःशुल्क एसडीपी उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है, जिसका खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है।
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सिरसा में बना डेंगू का नया हॉट स्पॉट, केसों की संख्या पहुंची 470
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। हरियाणा में 20 दिनों में डेंगू के केसों में उछाल देखने को मिला है। 28 अक्तूबर से 17 नवंबर तक डेंगू के केसों में करीब 43.9 फीसदी का उछाल देखने को मिला है। 28 अक्तूबर को 1635 केस थे जबकि 17 नवंबर तक 2352 मरीज सामने आए हैं। सिरसा जिला नया हॉट स्पॉट बना है। यहां डेंगू के मामले 470 पहुंच गए हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि डेंगू के केस बढ़ने का सीधा मतलब है कि डेंगू का मच्छर मौजूद है। ऐसे में विभाग को तेजी से फॉगिंग करवाने और विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता है। अभी डेंगू खत्म नहीं हुआ है। लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि डेंगू की रोकथाम के लिए टीमें फील्ड में तैनात हैं। घर-घर डेंगू के लार्वा की जांच की जा रही है। संदिग्ध मरीजों की सैंपलिंग की जा रही है ताकि डेंगू का प्रसार रोका जा सके।
मानसून की विदाई के बाद डेंगू के केस आना शुरू हो गए थे। हालांकि पिछले सालों के मुकाबले इसकी गति काफी धीमी रही लेकिन अक्तूबर के आखिरी सप्ताह और नवंबर में डेंगू के केस बढ़ने लगे। यह स्थिति उस समय है जब तापमान में गिरावट जारी है। 17 नवंबर को एक दिन में डेंगू के 42 नए केस आए। इनमें 28 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा जिनमें 13 सरकारी और 15 निजी अस्पताल में दाखिल हैं। जनवरी से लेकर अब तक डेंगू के 1219 मरीजों को अस्पताल में दाखिल कराया जा चुका है। 1091 मरीजों को ओपीडी में जांच के बाद घर भेज दिया गया था। हालांकि गनीमत यह रही है कि डेंगू अब तक जानलेवा नहीं बना है। पूरे सीजन में डेंगू से मौत की पुष्टि विभाग ने नहीं की है। स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डा. मनीष बंसल ने बताया, पिछले सालों की अपेक्षा डेंगू के काफी कम केस हैं। विभाग की टीमों ने डेंगू को नियंत्रण करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। फॉगिंग के साथ निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों को भी एहतियात में लापरवाही नहीं बरतनी है। कहीं भी पानी जमा न होने दें।
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पिछले सालों से 60 फीसदी केस कम
पिछले सालों की तुलना में डेंगू के केसों में 60 फीसदी केसों की गिरावट है। पिछले साल डेंगू के सीजन में 6469 केस दर्ज किए गए थे और 9 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, 2023 में स्थिति और गंभीर थी। उस साल डेंगू के 8081 केस आए थे और 11 लोगों की मौत हुई थी। साल 2022 में 8996 केस और 18 की मौत, 2021 में 11835 केस और 13 की मौत, 2020 में 1377 मरीज और जीरों मौतें थी। कुल मिलाकर चार साल बाद डेंगू के केसों में गिरावट दर्ज की गई है।
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सिरसा में डेंगू के 470 मरीज, दस जिलों की स्थिति
जिला डेंगू
सिरसा 470
रेवाड़ी 292
रोहतक 192
सोनीपत 175
करनाल 201
पंचकूला 106
दादरी 102
फरीदाबाद 92
जींद 94
यमुनानगर 100
कैथल 86
पानीपत 86
विभाग की ओर से उठाए गए ये कदम
1. दस नवंबर तक कुल 3.87 करोड़ घरों की जांच की गई। इसमें से 2.24 लाख घरों में लार्वा पाए गए।
2. अब तक दस हजार से ज्यादा स्थानों पर फॉगिंग करवाई जा चुकी है।
3. डेंगू परीक्षण के लिए 27 प्रयोगशालाएं लगाई गई हैं। उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी सैंपलिंग की व्यवस्था की गई है।
4. सरकारी अस्पतालों में भर्ती हरियाणा के मूल निवासी डेंगू रोगियों के लिए निशुल्क सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (एसडीपी) का प्रावधान किया गया है।
5. डेंगू मरीजों के लिए सिविल अस्पतालों और सीएचसी/पीएचसी में 255 वार्ड और 1091 बिस्तर आरक्षित रखे गए हैं।
6. सरकारी अस्पतालों में भर्ती राज्य के मूल निवासियों मरीजों को निजी ब्लड बैंकों से निःशुल्क एसडीपी उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है, जिसका खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है।