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Chandigarh-Haryana News: स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला इमारत को मंजूरी देने पर रोक की मांग, फैसला सुरक्षित
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-गुरुग्राम निवासी सुनील सिंह ने याचिका दाखिल करते हुए की है नीति पर रोक की मांग
- याचिका में आरोप है कि बुनियादी ढांचे पर अध्ययन किए बिना तैयार की गई नीति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्य में स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला इमारत बनाने की अनुमति देने के सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगाने की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वीरवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
गुरुग्राम निवासी सुनील सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि स्टिल्ट प्लस 4 मंजिल बनाने की अनुमति देने का कदम किसी भी वैज्ञानिक/इंजीनियरिंग अध्ययन के बिना लिया गया है। ऐसे नीतिगत निर्णयों के कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे का दावा करने के कोई प्रावधान नहीं किया गया। याचिका में कहा गया कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) द्वारा इन क्षेत्रों के नागरिक बुनियादी ढांचे के आवश्यक संवर्धन के बिना निर्णय लिया गया था। एचएसवीपी और राज्य प्राधिकरणों द्वारा एफएआर वृद्धि शुल्क और अन्य शुल्कों के माध्यम से उत्पन्न राजस्व का उपयोग करने के लिए आगे के निर्देश भी मांगे गए हैं, जिसका उपयोग पहले पंचकूला, गुरुग्राम और अन्य शहरी क्षेत्रों में संबंधित विकास और बुनियादी ढांचे के आवश्यक उन्नयन के लिए किया जाना चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह नीति मुख्य रूप से बेईमान बिल्डरों और रियल एस्टेट समुदाय को लाभ पहुंचा रही है, जो शहरों के नाजुक पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने पर अपने मुनाफे व लालच को प्राथमिकता दे रहे हैं। याची ने बताया कि जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक होने की बात को नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे सीवरेज, पार्किंग, जल व अन्य सुविधाओं पर बेहद अधिक प्रभाव पड़ेगा। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस नीति पर तुरंत रोक लगाई जाए क्योंकि याचिका लंबित रहते गुरुग्राम में 12 हजार से अधिक मंजूरियां दी जा चुकी हैं।
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- याचिका में आरोप है कि बुनियादी ढांचे पर अध्ययन किए बिना तैयार की गई नीति
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्य में स्टिल्ट प्लस 4 मंजिला इमारत बनाने की अनुमति देने के सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए इस पर रोक लगाने की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वीरवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
गुरुग्राम निवासी सुनील सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि स्टिल्ट प्लस 4 मंजिल बनाने की अनुमति देने का कदम किसी भी वैज्ञानिक/इंजीनियरिंग अध्ययन के बिना लिया गया है। ऐसे नीतिगत निर्णयों के कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप होने वाले नुकसान के लिए मुआवजे का दावा करने के कोई प्रावधान नहीं किया गया। याचिका में कहा गया कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) द्वारा इन क्षेत्रों के नागरिक बुनियादी ढांचे के आवश्यक संवर्धन के बिना निर्णय लिया गया था। एचएसवीपी और राज्य प्राधिकरणों द्वारा एफएआर वृद्धि शुल्क और अन्य शुल्कों के माध्यम से उत्पन्न राजस्व का उपयोग करने के लिए आगे के निर्देश भी मांगे गए हैं, जिसका उपयोग पहले पंचकूला, गुरुग्राम और अन्य शहरी क्षेत्रों में संबंधित विकास और बुनियादी ढांचे के आवश्यक उन्नयन के लिए किया जाना चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह नीति मुख्य रूप से बेईमान बिल्डरों और रियल एस्टेट समुदाय को लाभ पहुंचा रही है, जो शहरों के नाजुक पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने पर अपने मुनाफे व लालच को प्राथमिकता दे रहे हैं। याची ने बताया कि जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक होने की बात को नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे सीवरेज, पार्किंग, जल व अन्य सुविधाओं पर बेहद अधिक प्रभाव पड़ेगा। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस नीति पर तुरंत रोक लगाई जाए क्योंकि याचिका लंबित रहते गुरुग्राम में 12 हजार से अधिक मंजूरियां दी जा चुकी हैं।
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