{"_id":"683704b9aefe36032104160c","slug":"deduction-of-ten-increments-for-one-days-absence-is-not-logical-high-court-court-news-haryana-news-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1069-722005-2025-05-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक दिन की अनुपस्थिति के लिए दस वेतन वृद्धि की कटौती तर्क संगत नहीं : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक दिन की अनुपस्थिति के लिए दस वेतन वृद्धि की कटौती तर्क संगत नहीं : हाईकोर्ट
विज्ञापन
-कर्मचारी के कदाचार के मुकाबले इतनी बड़ी सजा अनुपात में असंगत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा, एक दिन के लिए ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर पुलिस अधिकारी की 10 वार्षिक वेतन वृद्धि जब्त करना कदाचार के अनुपात में असंगत है। पीड़ित को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने सजा को 10 वेतन वृद्धि की कटौती से घटाकर एक कटौती कर दिया है। मामले के अनुसार सत्यवीर सिंह हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के रूप में कार्यरत थे और 2015 में 24 घंटे और 20 मिनट के लिए ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। विभागीय जांच शुरू की गई, जिसमें उन्हें ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का दोषी पाया गया। याची को रेवाड़ी पुलिस अधीक्षक ने 23 जनवरी 2015 को बर्खास्त कर दिया गया। उन्होंने एक अपील दायर की जिसे रेवाड़ी के पुलिस महानिरीक्षक ने बर्खास्तगी की सजा को 10 वार्षिक वेतन वृद्धि जब्त करने में बदल दिया।
हाईकोर्ट ने पाया कि पंजाब पुलिस नियम, 1934 जो हरियाणा पर भी लागू किए गए उसके अनुसार किसी पुलिस अधिकारी को कदाचार के गंभीरतम कृत्य या निरंतर कदाचार के लिए सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। यह भी प्रावधान है कि सेवा से बर्खास्तगी का आदेश पारित करते समय, प्राधिकरण अपराधी की सेवा अवधि और पेंशन के लिए उसके दावे का ध्यान रखेगा। यह कानून का एक स्थापित प्रस्ताव है कि सजा कथित अपराध के अनुरूप होनी चाहिए। वर्तमान मामले में अदालत ने पाया कि अपील में देरी की छोटी अवधि होने के बावजूद पुलिस महानिदेशक ने इसे खारिज कर दिया। किसी भी तरह या कारण से, दी गई सजा को कथित कदाचार के अनुपात में नहीं कहा जा सकता। अनुपस्थिति केवल एक दिन की थी। मामला यह नहीं था कि याचिकाकर्ता किसी विशेष स्थान पर तैनात था, जहां शत्रुता, गंभीर सार्वजनिक अव्यवस्था, दंगे का माहौल था। कोर्ट ने कहा, मामले को वापस भेजना उचित नहीं समझता है क्योंकि 10 वर्ष की अवधि पहले ही बीत चुकी है। इसलिए सजा को 10 वेतन वृद्धि की कटौती से घटा कर एक कटौती कर दिया है।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा, एक दिन के लिए ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर पुलिस अधिकारी की 10 वार्षिक वेतन वृद्धि जब्त करना कदाचार के अनुपात में असंगत है। पीड़ित को राहत देते हुए हाईकोर्ट ने सजा को 10 वेतन वृद्धि की कटौती से घटाकर एक कटौती कर दिया है। मामले के अनुसार सत्यवीर सिंह हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के रूप में कार्यरत थे और 2015 में 24 घंटे और 20 मिनट के लिए ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। विभागीय जांच शुरू की गई, जिसमें उन्हें ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का दोषी पाया गया। याची को रेवाड़ी पुलिस अधीक्षक ने 23 जनवरी 2015 को बर्खास्त कर दिया गया। उन्होंने एक अपील दायर की जिसे रेवाड़ी के पुलिस महानिरीक्षक ने बर्खास्तगी की सजा को 10 वार्षिक वेतन वृद्धि जब्त करने में बदल दिया।
हाईकोर्ट ने पाया कि पंजाब पुलिस नियम, 1934 जो हरियाणा पर भी लागू किए गए उसके अनुसार किसी पुलिस अधिकारी को कदाचार के गंभीरतम कृत्य या निरंतर कदाचार के लिए सेवा से बर्खास्त किया जा सकता है। यह भी प्रावधान है कि सेवा से बर्खास्तगी का आदेश पारित करते समय, प्राधिकरण अपराधी की सेवा अवधि और पेंशन के लिए उसके दावे का ध्यान रखेगा। यह कानून का एक स्थापित प्रस्ताव है कि सजा कथित अपराध के अनुरूप होनी चाहिए। वर्तमान मामले में अदालत ने पाया कि अपील में देरी की छोटी अवधि होने के बावजूद पुलिस महानिदेशक ने इसे खारिज कर दिया। किसी भी तरह या कारण से, दी गई सजा को कथित कदाचार के अनुपात में नहीं कहा जा सकता। अनुपस्थिति केवल एक दिन की थी। मामला यह नहीं था कि याचिकाकर्ता किसी विशेष स्थान पर तैनात था, जहां शत्रुता, गंभीर सार्वजनिक अव्यवस्था, दंगे का माहौल था। कोर्ट ने कहा, मामले को वापस भेजना उचित नहीं समझता है क्योंकि 10 वर्ष की अवधि पहले ही बीत चुकी है। इसलिए सजा को 10 वेतन वृद्धि की कटौती से घटा कर एक कटौती कर दिया है।
विज्ञापन