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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Crores of rupees worth of transactions in two fake companies, 91 bank branches also under investigation, Haryana News

Chandigarh-Haryana News: दो फर्जी कंपनियों में करोड़ों का लेन-देन, 91 बैंक शाखाएं भी जांच के घेरे में

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दो फर्जी कंपनियों में करोड़ों का लेन-देन, 91 बैंक शाखाएं भी जांच के घेरे में
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-फर्जी कंपनियों के जरिए साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर करने का संदेह, पुलिस ने संदिग्धोंं की पहचान की
-बैंक शाखाएं संचालित कर रही साइबर अपराधियों के म्यूल अकाउंट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस की साइबर यूनिट ने पानीपत में फर्जी कंपनियों के जरिए किए जा रहे बड़े वित्तीय अपराध का पर्दाफाश किया है। जांच में खुलासा हुआ कि दो फर्जी कंपनियों के जरिये करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन को अंजाम दिया गया। पुलिस की जांच में कई संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की है, जिनके खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। इसके अलावा साइबर अपराध शाखा की विशेष टीम ने विभिन्न बैंकों की 91 शाखाओं की पहचान भी की है।
टीम को शक है कि इन शाखाओं में साइबर अपराधियों के म्यूल अकाउंट संचालित किए जा रहे हैं। इनके जरिये बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी के लेन-देन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में पानीपत जिले में चार संदिग्ध बैंक शाखाओं की पहचान की गई है। पुलिस जांच में ट्रू आर्टिफिशियल ज्वेल्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी फर्जी निकली है। कंपनी ने बैंक ऑफ इंडिया की पानीपत शाखा में खाता खोलकर केवल सात महीने में 51.82 करोड़ रुपये का लेन-देन किया। खाते से अब तक 51.79 करोड़ रुपये निकाले जा चुके थे। मात्र 3.13 लाख रुपये ही शेष मिले। कंपनी का पता और निदेशक मंडल की जानकारी भी फर्जी मिली है। कंपनी के पते पर भी कोई वास्तविक कंपनी नहीं मिली है। इससे साफ है कि कंपनी ने धोखाधड़ी और अवैध धन के लिए कंपनी खड़ी की थी। इसी तरह एक और कंपनी इंडो करियर एजेंसी का पुलिस ने भंडाफोड़ किया। कंपनी के खाते में 24 दिसंबर 2024 से 27 अगस्त 2025 तक 32.92 लाख रुपये जमा हुए, जिनमें से 31.70 लाख रुपये पहले ही निकाल लिए गए। केवल 1.21 लाख रुपये ही खाते में बचे हैं। इस कंपनी का पता भी फर्जी निकला और मौके पर कोई कंपनी नहीं पाई गई। जांच के दौरान जिन संदिग्ध व्यक्तियों के नाम सामने आए, उनमें प्रमोद कुमार, धर्मेंद्र कुमार, निशांत और सनी कुमार शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इन खातों और कंपनियों के पीछे एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र है, जिसका मकसद ठगी की रकम को तुरंत निकालकर कानून की पकड़ से बचना था।
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करनाल व यमुनानगर में भी छापे

पुलिस ने करनाल और यमुनानगर जिलों की संदिग्ध शाखाओं पर भी दबिश दी है। इस दौरान बैंक रिकॉर्ड भी खंगाले गए और कई खातों की गहन जांच की गई। साइबर टीम यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं बैंक कर्मचारियों की लापरवाही या मिलीभगत से साइबर अपराधियों को फायदा तो नहीं मिला। टीम केवाईसी मानकों की अनदेखी, खाता खोलने में प्रक्रियागत खामियां और बैंक स्टाफ की भूमिका का विश्लेषण कर रही है।
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फर्जी पहचान, म्यूल अकाउंट या शेल कंपनी का सहारा नहीं ले पाएंगे : डीजीपी

डीजीपी शत्रुजीत कपूर ने कहा कि यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के लिए स्पष्ट संदेश हैं कि अब वे किसी भी फर्जी पहचान, म्यूल अकाउंट या शेल कंपनी का सहारा लेकर बच नहीं पाएंगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध बैंक खाता, फर्जी कंपनी या अवैध लेन-देन की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या www.cybercrime.gov.in पर दें।
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