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Highcourt: पांच वर्ष नाैकरी के बाद तकनीकी आधार पर कर्मचारी को हटाना ठीक नहीं, कोर्ट ने दिया सेवा बहाली का आदेश
Wed, 25 Jun 2025 01:13 AM IST
चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो
Updated Wed, 25 Jun 2025 01:13 AM IST
सार
हिसार निवासी मनेंद्र सिंह ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान पूर्व सैनिक श्रेणी के अंतर्गत आवेदन किया था, जबकि वह वास्तव में एक आश्रित था। यह स्थिति उसकी ओर से प्रस्तुत पात्रता प्रमाणपत्र में स्पष्ट रूप से दर्शाई गई थी। इसके बावजूद उसे सेवा में शामिल किया गया।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उस कर्मचारी की सेवा बहाल करने का आदेश दिया है, जिसे पांच वर्ष तक नौकरी करने के बाद केवल तकनीकी आधार पर हटा दिया गया था। यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से संबंधित है, जिसने सैनिक आश्रित होते हुए भी पूर्व सैनिक (एक्स सर्विसमैन) श्रेणी में आवेदन कर दिया था।
जस्टिस विनोद एस भारद्वाज की एकल पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब किसी व्यक्ति की नीयत में कोई छल नहीं हो और उसने कोई कपट नहीं किया हो, तो मात्र तकनीकी आधार पर उसे सेवा से वंचित रखना न्याय के मर्म के विरुद्ध होगा। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि यदि इस तरह के मामलों में न्यायालय केवल नियमों की अक्षरश व्याख्या करते हुए कठोर रुख अपनाए, तो यह अन्याय को बढ़ावा देने जैसा होगा, क्योंकि इस प्रक्रिया में एक निर्दोष व्यक्ति की आजीविका और प्रतिष्ठा दांव पर लग जाती है।
हिसार निवासी मनेंद्र सिंह ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान पूर्व सैनिक श्रेणी के अंतर्गत आवेदन किया था, जबकि वह वास्तव में एक आश्रित था। यह स्थिति उसकी ओर से प्रस्तुत पात्रता प्रमाणपत्र में स्पष्ट रूप से दर्शाई गई थी। इसके बावजूद उसे सेवा में शामिल किया गया, परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूरी की, आवश्यक परीक्षा उत्तीर्ण की और पूरे पांच वर्षों तक निर्विवाद रूप से सेवा दी।
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पांच वर्षों के बाद हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के उसकी अनुशंसा वापस ले ली और उसे सेवा से हटा दिया गया।
जस्टिस भारद्वाज ने अपने आदेश में यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अब एक बालिका का पिता है और ऐसे में उससे यह अपेक्षा करना कि वह युवाओं के साथ पुन: प्रतियोगिता में भाग ले, न केवल अव्यावहारिक होगा बल्कि अमानवीय भी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक विवाहित और पारिवारिक जिम्मेदारियों से बंधा व्यक्ति उस जोश, ऊर्जा और शैक्षणिक एकाग्रता के साथ प्रतियोगिता में नहीं उतर सकता जैसा एक नवस्नातक युवक कर सकता है।
कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार हुआ है। अपने फैसले को संतुलित बनाते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता की पुनर्नियुक्ति करते हुए एक अन्य ऐसे उम्मीदवार को भी नियुक्ति दी जाए, जो मेरिट में उससे ऊपर था। मनेंद्र सिंह ने भी इस पर सहमति जताई कि वह उस उम्मीदवार को वरिष्ठता का लाभ देने को तैयार हैं।
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जस्टिस विनोद एस भारद्वाज की एकल पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब किसी व्यक्ति की नीयत में कोई छल नहीं हो और उसने कोई कपट नहीं किया हो, तो मात्र तकनीकी आधार पर उसे सेवा से वंचित रखना न्याय के मर्म के विरुद्ध होगा। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि यदि इस तरह के मामलों में न्यायालय केवल नियमों की अक्षरश व्याख्या करते हुए कठोर रुख अपनाए, तो यह अन्याय को बढ़ावा देने जैसा होगा, क्योंकि इस प्रक्रिया में एक निर्दोष व्यक्ति की आजीविका और प्रतिष्ठा दांव पर लग जाती है।
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हिसार निवासी मनेंद्र सिंह ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान पूर्व सैनिक श्रेणी के अंतर्गत आवेदन किया था, जबकि वह वास्तव में एक आश्रित था। यह स्थिति उसकी ओर से प्रस्तुत पात्रता प्रमाणपत्र में स्पष्ट रूप से दर्शाई गई थी। इसके बावजूद उसे सेवा में शामिल किया गया, परिवीक्षा अवधि सफलतापूर्वक पूरी की, आवश्यक परीक्षा उत्तीर्ण की और पूरे पांच वर्षों तक निर्विवाद रूप से सेवा दी।
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पांच वर्षों के बाद हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के उसकी अनुशंसा वापस ले ली और उसे सेवा से हटा दिया गया।
जस्टिस भारद्वाज ने अपने आदेश में यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अब एक बालिका का पिता है और ऐसे में उससे यह अपेक्षा करना कि वह युवाओं के साथ पुन: प्रतियोगिता में भाग ले, न केवल अव्यावहारिक होगा बल्कि अमानवीय भी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक विवाहित और पारिवारिक जिम्मेदारियों से बंधा व्यक्ति उस जोश, ऊर्जा और शैक्षणिक एकाग्रता के साथ प्रतियोगिता में नहीं उतर सकता जैसा एक नवस्नातक युवक कर सकता है।
कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार हुआ है। अपने फैसले को संतुलित बनाते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता की पुनर्नियुक्ति करते हुए एक अन्य ऐसे उम्मीदवार को भी नियुक्ति दी जाए, जो मेरिट में उससे ऊपर था। मनेंद्र सिंह ने भी इस पर सहमति जताई कि वह उस उम्मीदवार को वरिष्ठता का लाभ देने को तैयार हैं।