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Chandigarh-Haryana News: बिना दहेज शादी करने वाले दंपती बनेंगे स्कूलों में प्रेरणा का स्रोत
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- स्कूलों में विद्यार्थियों ने दहेज प्रथा के खिलाफ शपथ लेकर पहल की शुरुआत की
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में शिक्षा विभाग ने दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए एक खास पहल शुरू की है। इसके तहत स्कूलों में ऐसे दंपतियों को बुलाया जाएगा जिन्होंने बिना दहेज के शादी की है। यह दंपती बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे। शनिवार से अभियान की शुरुआत करते हुए सभी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दाैरान बच्चों को दहेज जैसी सामाजिक बुराई के बारे में समझाने के साथ इसके खिलाफ शपथ भी दिलाई गई।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद हरियाणा की ओर से सभी जिला शिक्षा व मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बिना दहेज के शादी करने वाले दंपतियों की पहचान स्थानीय स्तर पर पंचायत, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों की मदद से की जाए। इसके बाद स्कूल प्रशासन उनसे संपर्क कर उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित करेगा। ये दंपती अपने अनुभव बच्चों के साथ साझा करेंगे और बताएंगे कि बिना दहेज शादी करने से जीवन में क्या सकारात्मक बदलाव आते हैं।
कक्षाओं में चर्चा और शपथ से सही सोच विकसित होगी
विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान छात्र-छात्राएं दहेज के खिलाफ शपथ लेंगे। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कक्षाओं में इस विषय पर चर्चा कराएं और बच्चों से दहेज न लेने के फायदे लिखवाएं। इससे बच्चों में सही सोच विकसित होगी। इस तरह के प्रयासों से नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ेगी और समाज को दहेज मुक्त बनाने में मदद मिलेगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में शिक्षा विभाग ने दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के लिए एक खास पहल शुरू की है। इसके तहत स्कूलों में ऐसे दंपतियों को बुलाया जाएगा जिन्होंने बिना दहेज के शादी की है। यह दंपती बच्चों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेंगे। शनिवार से अभियान की शुरुआत करते हुए सभी स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दाैरान बच्चों को दहेज जैसी सामाजिक बुराई के बारे में समझाने के साथ इसके खिलाफ शपथ भी दिलाई गई।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद हरियाणा की ओर से सभी जिला शिक्षा व मौलिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बिना दहेज के शादी करने वाले दंपतियों की पहचान स्थानीय स्तर पर पंचायत, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों की मदद से की जाए। इसके बाद स्कूल प्रशासन उनसे संपर्क कर उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित करेगा। ये दंपती अपने अनुभव बच्चों के साथ साझा करेंगे और बताएंगे कि बिना दहेज शादी करने से जीवन में क्या सकारात्मक बदलाव आते हैं।
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कक्षाओं में चर्चा और शपथ से सही सोच विकसित होगी
विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान छात्र-छात्राएं दहेज के खिलाफ शपथ लेंगे। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कक्षाओं में इस विषय पर चर्चा कराएं और बच्चों से दहेज न लेने के फायदे लिखवाएं। इससे बच्चों में सही सोच विकसित होगी। इस तरह के प्रयासों से नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ेगी और समाज को दहेज मुक्त बनाने में मदद मिलेगी।
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