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Highcourt: तलाक के बाद भी बच्चे को पिता के सेवा लाभों में समान हिस्सा, पिता और संतान का संबंध नहीं होता खत्म

Wed, 15 Jul 2026 08:51 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 15 Jul 2026 08:51 AM IST
सार

अदालत ने कहा कि पहली पत्नी से जन्मे बच्चों के लिए विशेष प्रावधान इसलिए है क्योंकि वे पिता के साथ नहीं रह रहे हो सकते हैं। विधायी मंशा यह है कि माता-पिता के तलाक के कारण बच्चे को पिता की सरकारी सेवा के लाभों से वंचित न किया जाए।

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Child entitled to equal share in father's service benefits after divorce Punjab haryana highcourt verdict
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि माता-पिता के तलाक के बावजूद बच्चा पिता के सरकारी सेवा लाभों से वंचित नहीं होगा। 

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न्यायालय ने स्पष्ट किया कि तलाक पति-पत्नी के वैवाहिक संबंध को समाप्त करता है न कि पिता और संतान के संबंध को। इस फैसले के तहत दिवंगत कर्मचारी की पहली पत्नी से जन्मे बच्चे को भी अनुकंपा वित्तीय सहायता में समान हिस्सा मिलेगा।
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यह फैसला सोनीपत निवासी और हरियाणा सरकार के दिवंगत कर्मचारी बंसी लाल से जुड़े एक मामले में आया है। न्यायाधीश संदीप मौदगिल ने बंसी लाल की दूसरी पत्नी की याचिका को खारिज करते हुए यह निर्णय दिया। अदालत ने उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें पहली पत्नी से जन्मे नाबालिग पुत्र को भी अनुकंपा वित्तीय सहायता में दूसरी पत्नी के बराबर हिस्सा देने का निर्णय लिया गया था।
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बंसी लाल की पहली शादी पूजा रानी से हुई थी, जिससे वर्ष 2010 में एक पुत्र का जन्म हुआ। वर्ष 2019 में दोनों का आपसी सहमति से तलाक हो गया था। बंसी लाल की जुलाई 2024 में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। शुरुआत में पूरी अनुकंपा वित्तीय सहायता दूसरी पत्नी को दी गई थी। बाद में पहली पत्नी के पुत्र ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।


न्यायालय की दलीलें
हाई कोर्ट ने दूसरी पत्नी की दलीलों को अस्वीकार कर दिया। दूसरी पत्नी ने कहा था कि पहली पत्नी को 30 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता दिया जा चुका था। अदालत ने स्पष्ट किया कि स्थायी गुजारा भत्ता या बच्चे के भरण-पोषण के लिए दी गई राशि वैधानिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकती। न्यायालय ने हरियाणा सिविल सेवा (अनुकंपा वित्तीय सहायता या नियुक्ति) नियम, 2019 के नियम 28 का हवाला दिया। इसमें आश्रित बच्चा के बजाय पात्र बच्चा शब्द का प्रयोग किया गया है।

नियमों का उद्देश्य
अदालत ने कहा कि पहली पत्नी से जन्मे बच्चों के लिए विशेष प्रावधान इसलिए है क्योंकि वे पिता के साथ नहीं रह रहे हो सकते हैं। विधायी मंशा यह है कि माता-पिता के तलाक के कारण बच्चे को पिता की सरकारी सेवा के लाभों से वंचित न किया जाए। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि संपत्ति में हिस्सेदारी और अनुकंपा वित्तीय सहायता दो अलग-अलग कानूनी क्षेत्र हैं। संपत्ति में हिस्सा मिलने के आधार पर किसी पात्र बच्चे को अनुकंपा वित्तीय सहायता से वंचित नहीं किया जा सकता।

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