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गुरु ने दुश्मनों को भी पानी पिलाने से नहीं किया मना, पंजाब मना कर रहा : केंद्र
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सभी पक्षों की बहस पूरी, हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। भाखड़ा जल विवाद पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान हरियाणा, बीबीएमबी और केंद्र सरकार ने पंजाब की अर्जी पर विरोध जताया। पंजाब ने हाईकोर्ट के उस आदेश पर पुनर्विचार करने की याचिका दाखिल की है, जिसमें बीबीएमबी को केंद्र सरकार के फैसले के आधार पर हरियाणा के लिए 8500 क्यूसेक पानी देने का आदेश दिया गया था। सोमवार को सभी पक्षों की बहस पूरी हो गई। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति सुमित गोयल ने पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने गुरु गोबिंद सिंह के जीवन की एक घटना का हवाला देते हुए कहा, सिख गुरु को भाई कन्हैया के खिलाफ शिकायत मिली थी कि वह दुश्मनों को पानी पिला रहे हैं। इस पर उन्होंने भाई कन्हैया को बुलाया और कहा कि ये बहादुर सिख कह रहे हैं कि तुम दुश्मनों को पानी पिला रहे हो। पानी पीने के बाद वह फिर से लड़ने के लिए तैयार हो जाएंगे, क्या यह सच है। कन्हैया ने जवाब दिया कि गुरु जी यह सत्य है, लेकिन महाराज, मैंने युद्ध के मैदान में कोई मुगल या सिख नहीं देखा। मैंने केवल मनुष्य ही देखे। गुरु ने कन्हैया जी को मलहम दी और कहा यह मलहम उन सभी के घावों पर लगाना, जिन्हें इसकी आवश्यकता है। जैन ने कहा- जब गुरु गोविंद सिंह ने दुश्मनों को भी पानी पिलाने से मना नहीं किया तो ये कैसे कर सकते हैं।
केंद्र ने कहा- पंजाब सरकार के दो अधिकारी 2 मई को बैठक में शामिल थे। इसी बैठक में हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने का निर्णय लिया गया था। मगर आज तक इस पर कोई आपत्ति देने आगे नहीं आया। बैठक में उनका दृष्टिकोण दर्ज किया गया था और उन्होंने असहमति नहीं जताई थी। पंजाब कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करना चाहता है, इसलिए वे पुनर्विचार के लिए आए हैं।
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पंजाब के हिस्से से नहीं मांगा पानी : हरियाणा
हरियाणा के एडवोकेट जनरल परविंदर सिंह चौहान ने कहा कि बीबीएमबी एक वैधानिक और विशेषज्ञ निकाय है जो नियमों को लागू करने और पक्षों को पानी आवंटित करने के लिए जिम्मेदार है। पंजाब कह रहा है कि उसने आवंटित पानी की मात्रा की गणना की है। उनके लिए यह एक गणितीय गणना है, लेकिन क्या हम वास्तव में इसकी गणना कर सकते हैं? पानी का हिस्सा भाखड़ा नंगल बांध की गहराई के आधार पर अनुमान पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हरियाणा पंजाब के हिस्से से पानी नहीं मांग रहा। जब हरियाणा को पीने के पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ा, तभी अनुरोध किया था। पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता गुरमिंदर सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता चंचल सिंगला ने केंद्र की दलीलों का खंडन करते हुए इस दावे को खारिज कर दिया कि पंजाब सरकार के अधिकारियों ने बैठक के दौरान कोई आपत्ति नहीं की।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। भाखड़ा जल विवाद पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान हरियाणा, बीबीएमबी और केंद्र सरकार ने पंजाब की अर्जी पर विरोध जताया। पंजाब ने हाईकोर्ट के उस आदेश पर पुनर्विचार करने की याचिका दाखिल की है, जिसमें बीबीएमबी को केंद्र सरकार के फैसले के आधार पर हरियाणा के लिए 8500 क्यूसेक पानी देने का आदेश दिया गया था। सोमवार को सभी पक्षों की बहस पूरी हो गई। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति सुमित गोयल ने पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने गुरु गोबिंद सिंह के जीवन की एक घटना का हवाला देते हुए कहा, सिख गुरु को भाई कन्हैया के खिलाफ शिकायत मिली थी कि वह दुश्मनों को पानी पिला रहे हैं। इस पर उन्होंने भाई कन्हैया को बुलाया और कहा कि ये बहादुर सिख कह रहे हैं कि तुम दुश्मनों को पानी पिला रहे हो। पानी पीने के बाद वह फिर से लड़ने के लिए तैयार हो जाएंगे, क्या यह सच है। कन्हैया ने जवाब दिया कि गुरु जी यह सत्य है, लेकिन महाराज, मैंने युद्ध के मैदान में कोई मुगल या सिख नहीं देखा। मैंने केवल मनुष्य ही देखे। गुरु ने कन्हैया जी को मलहम दी और कहा यह मलहम उन सभी के घावों पर लगाना, जिन्हें इसकी आवश्यकता है। जैन ने कहा- जब गुरु गोविंद सिंह ने दुश्मनों को भी पानी पिलाने से मना नहीं किया तो ये कैसे कर सकते हैं।
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केंद्र ने कहा- पंजाब सरकार के दो अधिकारी 2 मई को बैठक में शामिल थे। इसी बैठक में हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने का निर्णय लिया गया था। मगर आज तक इस पर कोई आपत्ति देने आगे नहीं आया। बैठक में उनका दृष्टिकोण दर्ज किया गया था और उन्होंने असहमति नहीं जताई थी। पंजाब कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करना चाहता है, इसलिए वे पुनर्विचार के लिए आए हैं।
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पंजाब के हिस्से से नहीं मांगा पानी : हरियाणा
हरियाणा के एडवोकेट जनरल परविंदर सिंह चौहान ने कहा कि बीबीएमबी एक वैधानिक और विशेषज्ञ निकाय है जो नियमों को लागू करने और पक्षों को पानी आवंटित करने के लिए जिम्मेदार है। पंजाब कह रहा है कि उसने आवंटित पानी की मात्रा की गणना की है। उनके लिए यह एक गणितीय गणना है, लेकिन क्या हम वास्तव में इसकी गणना कर सकते हैं? पानी का हिस्सा भाखड़ा नंगल बांध की गहराई के आधार पर अनुमान पर आधारित है। उन्होंने कहा कि हरियाणा पंजाब के हिस्से से पानी नहीं मांग रहा। जब हरियाणा को पीने के पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ा, तभी अनुरोध किया था। पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता गुरमिंदर सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता चंचल सिंगला ने केंद्र की दलीलों का खंडन करते हुए इस दावे को खारिज कर दिया कि पंजाब सरकार के अधिकारियों ने बैठक के दौरान कोई आपत्ति नहीं की।