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संशोधित : सरकारी स्कूलों का सुरक्षा ऑडिट करने का आदेश
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मानवाधिकार आयोग ने स्कूलों के सुधार के लिए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए
गन्नौर के गढ़ी बलिंदा स्कूल में आर्क गिरने से बच्चे की मौत के बाद मांगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सोनीपत में गन्नौर क्षेत्र के गढ़ी बलिंदा गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल में मेहराब (अर्द्धगोलाकार संरचना) गिरने से 11 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने अब हरियाणा के सभी सरकारी स्कूलों का संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। जर्जर या खतरनाक पाए जाने वाले भवनों की मरम्मत, बैरिकेडिंग, ध्वस्तीकरण या पुनर्निर्माण की कार्रवाई समयबद्ध तरीके से करनी होगी।
न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली आयोग की पूर्ण पीठ ने कहा कि मामला केवल गढ़ी बलिंदा स्कूल तक सीमित नहीं रखा जा सकता। आयोग ने माध्यमिक शिक्षा विभाग, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद को सभी सरकारी स्कूलों की सुरक्षा की व्यापक समीक्षा करने को कहा है। ऑडिट में स्कूल भवनों के साथ मुख्य द्वार, मेहराब, चारदीवारी, छत और अन्य ऐसी संरचनाओं की भी जांच होगी जिनसे बच्चों और कर्मचारियों को खतरा हो सकता है। जांच योग्य सिविल इंजीनियरों या सक्षम तकनीकी एजेंसियों से कराई जाएगी। केवल खामियां दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि स्कूलों में जरूरी सुधार भी कराने होंगे।
आयोग ने सभी जिलों से ऐसी रिपोर्ट मांगी है जिसमें जर्जर और असुरक्षित स्कूलों की संख्या व उनके लिए उठाए गए कदमों की जानकारी होगी। गढ़ी बलिंदा मामले में पुलिस जांच जारी है। घटना से पहले 19 मई को स्कूल का निरीक्षण और 22 मई को तकनीकी निरीक्षण हुआ था। बाद में मरम्मत के लिए 5.68 लाख रुपये का अनुमान तैयार किया गया था। घटना के बाद मरम्मत और नवीनीकरण के लिए 26.05 लाख रुपये का नया अनुमान भेजा गया। आयोग में मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को होगी।
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गन्नौर के गढ़ी बलिंदा स्कूल में आर्क गिरने से बच्चे की मौत के बाद मांगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सोनीपत में गन्नौर क्षेत्र के गढ़ी बलिंदा गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल में मेहराब (अर्द्धगोलाकार संरचना) गिरने से 11 वर्षीय बच्चे की मौत के बाद हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने अब हरियाणा के सभी सरकारी स्कूलों का संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। जर्जर या खतरनाक पाए जाने वाले भवनों की मरम्मत, बैरिकेडिंग, ध्वस्तीकरण या पुनर्निर्माण की कार्रवाई समयबद्ध तरीके से करनी होगी।
न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली आयोग की पूर्ण पीठ ने कहा कि मामला केवल गढ़ी बलिंदा स्कूल तक सीमित नहीं रखा जा सकता। आयोग ने माध्यमिक शिक्षा विभाग, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद को सभी सरकारी स्कूलों की सुरक्षा की व्यापक समीक्षा करने को कहा है। ऑडिट में स्कूल भवनों के साथ मुख्य द्वार, मेहराब, चारदीवारी, छत और अन्य ऐसी संरचनाओं की भी जांच होगी जिनसे बच्चों और कर्मचारियों को खतरा हो सकता है। जांच योग्य सिविल इंजीनियरों या सक्षम तकनीकी एजेंसियों से कराई जाएगी। केवल खामियां दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा बल्कि स्कूलों में जरूरी सुधार भी कराने होंगे।
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आयोग ने सभी जिलों से ऐसी रिपोर्ट मांगी है जिसमें जर्जर और असुरक्षित स्कूलों की संख्या व उनके लिए उठाए गए कदमों की जानकारी होगी। गढ़ी बलिंदा मामले में पुलिस जांच जारी है। घटना से पहले 19 मई को स्कूल का निरीक्षण और 22 मई को तकनीकी निरीक्षण हुआ था। बाद में मरम्मत के लिए 5.68 लाख रुपये का अनुमान तैयार किया गया था। घटना के बाद मरम्मत और नवीनीकरण के लिए 26.05 लाख रुपये का नया अनुमान भेजा गया। आयोग में मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 को होगी।
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