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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा में गठित होगा आतंकवाद निरोधक दस्ता
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फरीदाबाद में सफेद कॉलर आतंकी मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद पुलिस ने प्रस्ताव पर काम तेज किया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आतंकी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए हरियाणा पुलिस जल्द ही आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) का गठन करेगी। फरीदाबाद में सफेद कॉलर आतंकी माड्यूल के पकड़े जाने के बाद हरियाणा पुलिस ने एटीएस के गठन के लिए सरकार से संपर्क साधा है। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस प्रस्ताव पर तेजी से काम शुरू होगा। उल्लेखनीय है कि बीते हफ्ते दिल्ली के लाल किले के पास बम धमाके में लगभग 15 लोग मारे गए थे। इसमें फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े कई डॉक्टरों की भूमिका जांच के घेरे में हैं।
हरियाणा के डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि एटीएस खुफिया जानकारी जुटाने के साथ-साथ ऑपरेशन चलाएगा और जांच भी करेगा। हरियाणा में आतंकवादी गतिविधियों की खुफिया जानकारी जुटाने का काम सीआईडी के पास है। पड़ोसी राज्य दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पहले से ही एटीएस गठित है। ऐसे में हरियाणा में भी अब एटीएस के गठन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। पहले भी ऐसा ही एक प्रस्ताव राज्य सरकार के गृह विभाग के पास आया था मगर उस पर काम नहीं हो सका।
अब सुरक्षा एजेंट आतंक की खुफिया जानकारी जुटाएंगे
डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि पुलिस का पूरा फोकस एनसीआर में रहेगा। एनसीआर में 150 से ज्यादा पुलिस स्टेशन हैं और आमतौर पर हर स्टेशन पर दो सुरक्षा एजेंट तैनात होते हैं। हर पुलिस स्टेशन से एक सुरक्षा एजेंट को आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने के लिए तैनात करने का फैसला लिया गया है। ये सुरक्षा एजेंट आगे एक वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट करेंगे जो उन्हें हर सुबह काम सौंपेंगे। डीजीपी ने आगे कहा कि ऑपरेशन के लिए हमारे पास 500 कमांडो हैं।
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विश्वविद्यालय से जो लापता हैं उन्हें ढूंढने के निर्देश
डीजीपी ने बताया कि उन्होंने 18 नवंबर को फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय का दौरा किया था। वह विश्वविद्यालय में करीब चार घंटे तक रहे। इस दौरान उन्होंने सुरक्षाकर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, छात्रों, आसपास के ग्रामीणों और मस्जिद के मौलवी के परिवार से बात की। इसके बाद उन्होंने उपायुक्त (डीसी) व पुलिस आयुक्त के साथ बैठक की और जो विश्वविद्यालय से जो लापता हैं उनकी खोजबीन के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि आतंकी माड्यूल का खुलासा होने के बाद विश्वविद्यालय से करीब 200 लोग गायब हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। आतंकी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए हरियाणा पुलिस जल्द ही आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) का गठन करेगी। फरीदाबाद में सफेद कॉलर आतंकी माड्यूल के पकड़े जाने के बाद हरियाणा पुलिस ने एटीएस के गठन के लिए सरकार से संपर्क साधा है। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस प्रस्ताव पर तेजी से काम शुरू होगा। उल्लेखनीय है कि बीते हफ्ते दिल्ली के लाल किले के पास बम धमाके में लगभग 15 लोग मारे गए थे। इसमें फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय से जुड़े कई डॉक्टरों की भूमिका जांच के घेरे में हैं।
हरियाणा के डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि एटीएस खुफिया जानकारी जुटाने के साथ-साथ ऑपरेशन चलाएगा और जांच भी करेगा। हरियाणा में आतंकवादी गतिविधियों की खुफिया जानकारी जुटाने का काम सीआईडी के पास है। पड़ोसी राज्य दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पहले से ही एटीएस गठित है। ऐसे में हरियाणा में भी अब एटीएस के गठन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। पहले भी ऐसा ही एक प्रस्ताव राज्य सरकार के गृह विभाग के पास आया था मगर उस पर काम नहीं हो सका।
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अब सुरक्षा एजेंट आतंक की खुफिया जानकारी जुटाएंगे
डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि पुलिस का पूरा फोकस एनसीआर में रहेगा। एनसीआर में 150 से ज्यादा पुलिस स्टेशन हैं और आमतौर पर हर स्टेशन पर दो सुरक्षा एजेंट तैनात होते हैं। हर पुलिस स्टेशन से एक सुरक्षा एजेंट को आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने के लिए तैनात करने का फैसला लिया गया है। ये सुरक्षा एजेंट आगे एक वरिष्ठ अधिकारी को रिपोर्ट करेंगे जो उन्हें हर सुबह काम सौंपेंगे। डीजीपी ने आगे कहा कि ऑपरेशन के लिए हमारे पास 500 कमांडो हैं।
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विश्वविद्यालय से जो लापता हैं उन्हें ढूंढने के निर्देश
डीजीपी ने बताया कि उन्होंने 18 नवंबर को फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय का दौरा किया था। वह विश्वविद्यालय में करीब चार घंटे तक रहे। इस दौरान उन्होंने सुरक्षाकर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, छात्रों, आसपास के ग्रामीणों और मस्जिद के मौलवी के परिवार से बात की। इसके बाद उन्होंने उपायुक्त (डीसी) व पुलिस आयुक्त के साथ बैठक की और जो विश्वविद्यालय से जो लापता हैं उनकी खोजबीन के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि आतंकी माड्यूल का खुलासा होने के बाद विश्वविद्यालय से करीब 200 लोग गायब हैं।