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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Allegations of forcing voluntary retirement, we cannot become an investigating agency: High Court

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए मजबूर करने का आरोप, हम जांच एजेंसी नहीं बन सकते : हाईकोर्ट

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- ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं जो साबित करे कि जबरन आवेदन लिखवाया या तीन माह का वेतन जमा कराया
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- हाईकोर्ट ने याचिका को आधार हीन मानते हुए सिरे से किया खारिज


चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस के सब इंस्पेक्टर की ओर से जबरन स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति कराने के आरोप वाली याचिका को खारिज करते हुए पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि हम ऐसे मामलों में जांच एजेंसी नहीं बन सकते। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि कर्मचारी से जबरदस्ती की गई है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि वह 1991 में हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के रूप में भर्ती हुआ था। लंबे सेवाकाल के दौरान पदोन्नति पाकर वह जुलाई 2025 में सब इंस्पेक्टर के पद पर पहुंच गया। उस दौरान वह रोहतक के सुनारिया स्थित पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में तैनात था। याची को 29 जुलाई 2025 को उसके मूल निवास जिला रोहतक भेज दिया गया जहां उसने 20 अगस्त 2025 को कार्यभार संभाला। याची ने बताया कि वह पीजीआईएमएस, रोहतक से इलाज करवा रहा था और डाॅक्टरों ने उसे लाइट ड्यूटी की सलाह दी थी। इस आधार पर उसने पांच दिन के पूर्ण विश्राम व अवकाश की मांग की थी। साथ ही अनुरोध किया कि उसे पुलिस लाइन या किसी कार्यालय में समायोजित किया जाए। याची को राहत देने की बजाय उसे रोहतक थाना सिटी में तैनात कर दिया गया।
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याची ने कहा कि 24 सितंबर 2025 को जब वह एसपी के समक्ष पेश हुआ, तो कहा गया कि वह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन दें। अधिकारियों ने उसे 30 सितंबर 2025 से ही सेवानिवृत्ति लेने को मजबूर किया। इतना ही नहीं, उससे तीन माह का वेतन भी जमा कराने को कहा गया। 29 सितंबर 2025 को उसे 30 सितंबर 2025 से प्रभावी रूप से कार्यमुक्त कर दिया गया।
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कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि पुलिस अधीक्षक, रोहतक ने याचिकाकर्ता से जबरन स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का आवेदन लिखवाया या तीन माह का वेतन जमा कराया हो। यदि याचिकाकर्ता पर वास्तव में उस समय दबाव बनाया गया था, तो वह तत्काल उच्च अधिकारियों या अदालत का रुख कर सकते थे। कोर्ट ने कहा कि याची ने स्वयं तीन माह का वेतन जमा कराया है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
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