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Chandigarh-Haryana News: एनडीपीएस के 655 मामलों में आरोपी छह माह से अधिक समय से फरार, डीजीपी की हाईकोर्ट में दी जानकारी
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- डीजीपी के शपथ पत्र में 37 मामलों में जांच अधिकारियों की लापरवाही साबित होने पर कार्रवाई का दावा
- राज्य की सभी फील्ड यूनिटों को फरार आरोपितों की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने के दिए आदेश
चंडीगढ़। हरियाणा में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों की जांच में ढिलाई सामने आई है। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों की त्वरित जांच के आदेश देते हुए पुलिस महानिदेशक से हलफनामा मांगा था। पुलिस महानिदेशक ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दायर कर जानकारी दी कि प्रदेश में एनडीपीएस के दर्ज 655 मामलों में आरोपी की गिरफ्तारी पिछले छह माह से अधिक समय से नहीं हो पाई है।
डीजीपी की ओर से दायर शपथ पत्र के मुताबिक सभी फील्ड यूनिट से मिली रिपोर्ट दर्शाती है कि इन मामलों में आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। डीजीपी ने बताया कि 37 मामलों में जांच अधिकारियों की लापरवाही साबित होने पर कार्रवाई की गई है।
इसके अलावा 11 मामलों में आरोपित फरार घोषित हो चुके हैं जबकि 29 मामलों में उन्हें फरार अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया बीएनएसएस की धारा 84 के तहत शुरू की गई है। शपथ पत्र में स्वीकार किया कि अब तक किसी भी मामले में फरार आरोपितों की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने के लिए अदालत में आवेदन दायर नहीं किया गया है।
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डीजीपी ने कहा कि 11 सितंबर को सभी पुलिस फील्ड यूनिटों को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि गिरफ्तारी के हरसंभव प्रयास किए जाएं। साथ ही आरोपितों को फरार अपराधी घोषित करने और उनकी संपत्ति कुर्क करने की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर इस मुद्दे पर गंभीर नाराजगी जताई थी। जस्टिस एनएस शेखावत की बेंच ने राज्य के डीजीपी को निर्देश दिए थे कि वे विस्तृत शपथ पत्र दाखिल कर बताएं कि किन मामलों में छह माह से अधिक समय से आरोपित गिरफ्तार नहीं हुए और लापरवाह जांच अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि फरार आरोपितों की संपत्ति कुर्क करने के लिए क्या कदम उठाए गए है।
यह मामला मंडी डबवाली पुलिस थाने में छह फरवरी को दर्ज एक एनडीपीएस केस से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि स्थानीय पुलिस से जांच लेकर किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंपी जाए या फिर कोर्ट राज्य पुलिस को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उचित दिशानिर्देश दे। सुनवाई के दौरान जस्टिस शेखावत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि राज्य के विभिन्न जिलों में एनडीपीएस मामलों की जांच में कोई प्रभावी निगरानी नजर नहीं आती। कोर्ट ने कई मामलों में पाया है कि पुलिस की जांच पर उच्च अधिकारियों का कोई नियंत्रण नहीं है।
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- राज्य की सभी फील्ड यूनिटों को फरार आरोपितों की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने के दिए आदेश
चंडीगढ़। हरियाणा में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों की जांच में ढिलाई सामने आई है। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों की त्वरित जांच के आदेश देते हुए पुलिस महानिदेशक से हलफनामा मांगा था। पुलिस महानिदेशक ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र दायर कर जानकारी दी कि प्रदेश में एनडीपीएस के दर्ज 655 मामलों में आरोपी की गिरफ्तारी पिछले छह माह से अधिक समय से नहीं हो पाई है।
डीजीपी की ओर से दायर शपथ पत्र के मुताबिक सभी फील्ड यूनिट से मिली रिपोर्ट दर्शाती है कि इन मामलों में आरोपितों की गिरफ्तारी के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। डीजीपी ने बताया कि 37 मामलों में जांच अधिकारियों की लापरवाही साबित होने पर कार्रवाई की गई है।
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इसके अलावा 11 मामलों में आरोपित फरार घोषित हो चुके हैं जबकि 29 मामलों में उन्हें फरार अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया बीएनएसएस की धारा 84 के तहत शुरू की गई है। शपथ पत्र में स्वीकार किया कि अब तक किसी भी मामले में फरार आरोपितों की चल-अचल संपत्ति कुर्क करने के लिए अदालत में आवेदन दायर नहीं किया गया है।
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डीजीपी ने कहा कि 11 सितंबर को सभी पुलिस फील्ड यूनिटों को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि गिरफ्तारी के हरसंभव प्रयास किए जाएं। साथ ही आरोपितों को फरार अपराधी घोषित करने और उनकी संपत्ति कुर्क करने की कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर इस मुद्दे पर गंभीर नाराजगी जताई थी। जस्टिस एनएस शेखावत की बेंच ने राज्य के डीजीपी को निर्देश दिए थे कि वे विस्तृत शपथ पत्र दाखिल कर बताएं कि किन मामलों में छह माह से अधिक समय से आरोपित गिरफ्तार नहीं हुए और लापरवाह जांच अधिकारियों पर क्या कार्रवाई हुई। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि फरार आरोपितों की संपत्ति कुर्क करने के लिए क्या कदम उठाए गए है।
यह मामला मंडी डबवाली पुलिस थाने में छह फरवरी को दर्ज एक एनडीपीएस केस से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि स्थानीय पुलिस से जांच लेकर किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी को सौंपी जाए या फिर कोर्ट राज्य पुलिस को निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उचित दिशानिर्देश दे। सुनवाई के दौरान जस्टिस शेखावत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि राज्य के विभिन्न जिलों में एनडीपीएस मामलों की जांच में कोई प्रभावी निगरानी नजर नहीं आती। कोर्ट ने कई मामलों में पाया है कि पुलिस की जांच पर उच्च अधिकारियों का कोई नियंत्रण नहीं है।