आपातकाल के 50 साल: 21 महीने में मिली ज्यादतियों के नहीं मिटते निशां, हरियाणा में बनाई गई थी कई जेलें
25 जून 1075 की रात से 21 महीने तक चले आपातकाल से हरियाणा भी अछूता नहीं रहा था। दिल्ली से सटे होने के कारण हरियाणा में कई अस्थायी जेलें बनाई गई, जिनमें लोगों के मौलिक अधिकारों को कुचलते हुए जेलों में ठूंस दिया गया।
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पचास साल पहले लोकतंत्र के चरित्र पर ऐसा दाग लगा, जिसके धब्बे भी आज भी आपातकाल के गवाह बने लोगों के दिलो-दिमाग में दर्ज हैं। कड़वी यादों के झरोखे आते ही आज भी लोग सिहर उठते हैं। पुराने जख्म, चोटें, यातनाएं, आंसू सब आंखों के सामने तैरने लगता है।
राजनीति के कई धुरंधरों को हरियाणा की जेलों बंद कर अत्याचारों की सभी हदों को पार कर दिया गया। जिन लोगों को प्रदेश की जेलों में रखा गया था, उनमें पूर्व पीएम चंद्रशेखर, जॉर्ज फर्नांडिस, पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल, भैरों सिंह शेखावत, राजनारायण, पंडित श्री राम शर्मा, पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला जैसे दिग्गज शामिल थे।
बंसीलाल दिल्ली से विरोध करने वालों को धमकाते थे
उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल ने भी कई लोगों को जेल में डलवाया था। इंदिरा गांधी व संजय गांधी के नजदीक होने के कारण उन्हें दिल्ली बुला लिया गया था और वहां से वे आपातकाल के खिलाफ आवाज उठाने वालों लोगों को डराते व धमकाते थे।
प्रोफेसर रणबीर सिंह की किताब हरियाणा की राजनीति में उन्होंने जिक्र किया है कि आपातकाल के दौरान चौधरी बंसीलाल व उनके बेटे सुरेंद्र सिंह परिवार नियोजन कार्यक्रम लागू करने व विरोधियों का दमन करने में खूब ज्यादतियां की। कई और भी दिग्गज थे, जिन्हें हरियाणा से बाहर की जेलों में रखा गया था, उनमें एक भाजपा के पूर्व मंत्री पंडित रामबिलास शर्मा हैं। वह बताते हैं कि उस दौरान विरोध करने वालों को तो जेल में डाला जाता था, साथ ही उनके परिजनों को भी खूब परेशान किया जाता था। पूछताछ के बहाने उनका शोषण किया जाता था।
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तानाशाह के खिलाफ न झुके, न टूटे : शर्मा
निरंकुशता व तानाशाही की भयावहता के बारे में पंडित राम बिलास शर्मा बताते हैं कि वह उस समय जनसंघ के संगठन महामंत्री थे। आपातकाल का विरोध करने वाला एक जत्था अचानक से गायब हो गया था। किसी को खबर नहीं थे, वे आखिर कहां चले गए। बाद में पता चला कि उन्हें पुलिस ने अवैध हिरासत में रखा है। उनकी गिरफ्तारी नहीं दिखाई गई थी। जत्थे को अवैध हिरासत से जेल भिजवाने के लिए राम बिलास शर्मा को जिम्मेदारी दी गई कि वे झज्जर पुलिस चौकी के बाहर सत्याग्रह शुरू करेंगे। कुछ दिन सत्याग्रह करने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर दिया। उन्हें इतना प्रताड़ित किया कि वे बेहोश हो गए। शरीर का कोई हिस्सा नहीं बचा था, जहां उन्हें चोटें न आई हो। उन्हें आठ दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया। यहां भी उन्हें खूब तकलीफ दी गई। फिर उन्हें रोहतक जेल से बिहार की गया जेल भेज दिया गया। इस बारे में शर्मा के माता-पिता को कुछ नहीं पता था। वे उन्हें ढूंढने के लिए दर-दर की ठोकरें खाते रहें। कई दिन बाद पता चला कि वे बिहार की जेल में बंद हैं। शर्मा बताते हैं कि करीब 16 महीने के बाद जब कांग्रेस का सफाया हुआ तो उन्हें रिहाई मिली। वे कहते हैं कि वे तानाशाह के खिलाफ न झुके और न ही टूटे।
करंट लगाने की कोशिश की गई, फिर भी कुछ नहीं बताया : बंडारू दत्तात्रेय
आपातकाल के दौरान हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय संघ के प्रचारक थे। उनके मुताबिक उस समय सेंसरशिप होने के कारण अखबारों और टीवी से खबरों के बारे में पता नहीं चलता था। वे बताते हैं कि जेपी के नेतृत्व में हम लोगों को दिल्ली से हैदराबाद तक की खबरें मिलती थी। दिल्ली से एक सर्कुलर आता था, जिसे प्रिंट कर सभी कार्यकर्ताओं व समाजसेवियों को बांटना पड़ता था। इसी दौरान उन्हें गिरफ्तार कर आंध्र प्रदेश की जेल में बंद कर दिया गया। जेल में उनसे बार-बार पूछा जाता था कि बुलेटिन उन्हें कहां से और कैसे मिलता था। कौन भेजता था। इसके लिए पैसे कहां से मिलते थे। कई बार बिजली का करेंट देने की भी कोशिश की गई, मगर कभी उन्हें कुछ नहीं बताया। जब वे जेल में बंद थे तो उनके कई मित्र उनकी मां के पास पहुंचे और कहा कि वे आपके बेटे को बाहर निकालेंगे। मगर इसके लिए उनके बेटे को लिखकर देना होगा कि दोबारा गलती नहीं करेगा। तो उनकी मां ने कहा- क्या मेरे बेटे ने चोरी की। मेरा बेटा देश और समाज के लिए काम कर रहा है। मां की प्रेरणा से उन्हें संबल मिला और यातनाओं का डटकर मुकाबला किया।
आपातकाल सत्याग्रहियों को राज्य सरकार देती है पेंशन
21 महीने तक काले पानी की सजा झेलने वाले सत्याग्रहियों को हरियाणा सरकार की ओर से पेंशन दी जाती है। यह पेंशन योजना 2017 से शुरू हुई थी। इस योजना के पहले दस हजार रुपये पेंशन दी जाती थी। पिछले साल एक जुलाई से उनकी पेंशन दोगुनी कर दी गई। अभी 501 लोकतंत्र सेनानी व उनकी विधवाओं को पेंशन दी जा रही है। इन सत्याग्रहियों को हरियाणा रोडवेज की सामान्य बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती है और वोल्वो में 75 फीसदी किराया माफ है।