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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   23 years after the incident, the prosecution's story was declared unbelievable six murder convicts acquitted by the High Court

Chandigarh-Haryana News: घटना के 23 साल बाद अभियोजन पक्ष की कहानी अविश्वसनीय करार, हत्या के छह दोषी हाईकोर्ट से बरी

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-नारनौल की अदालत ने 2004 में सभी आरोपियों को दोषी मान सुनाई थी उम्रकैद की सजा
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-अभियोजन पक्ष की कहानी में विरोधाभास और जांच में खामी को हाईकोर्ट ने बनाया आधार
अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 23 साल पहले 2002 में हुई हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए छह लोगों को बरी करते हुए अभियोजन पक्ष के मामले को अविश्वसनीय और विरोधाभासों से भरा बताया है। जस्टिस मंजरी नेहरू कौल और जस्टिस एचएस ग्रेवाल की खंडपीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने घटनाओं का विकृत संस्करण प्रस्तुत किया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार 11 सितंबर 2002 की सुबह सुरेंद्र सिंह ने अपने पिता शादीराम पर खेतों की ओर जाते हुए हमला होते हुए देखा। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि सुनील कुमार ने शादी राम के सिर पर कुल्हाड़ी के पिछले हिस्से से वार किया जबकि लाल चंद ने लोहे की राॅड से। अभियोजन पक्ष के बयान को स्वीकार करते हुए, निचली अदालत ने सभी छह लोगों को दोषी ठहराया हालााकि, अपनी अपील में अभियुक्तों ने तर्क दिया था कि मामला मनगढ़ंत है। साथी ही जांच में गंभीर खामियों और बयानों में विसंगतियों की ओर इशारा किया।
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मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि अभियुक्त को कई चोटें आई थीं जिनमें से दो गंभीर थीं। इनका अभियोजन पक्ष ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। पीठ ने अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में मौजूद विरोधाभासों को भी उजागर किया। शिकायतकर्ता ने पहले कहा था कि हमला मदन लाल के घर के सामने हुआ था लेकिन बाद में उसने घटना स्थल पंचायत घर के पास बता दिया। महत्वपूर्ण बात यह है कि मृतक के एक अन्य पुत्र वीरेंद्र सिंह जिसने हमला देखा और अपने पिता को अस्पताल ले गया था, से कभी पूछताछ नहीं की गई। अदालत ने कहा कि उससे पूछताछ न होना यह दर्शाता है कि घटना की असली वजह को दबाया गया। अपनी अंतिम टिप्पणी में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी विश्वसनीय नहीं है इसलिए अपील स्वीकार की जाती है और 19 जुलाई 2004 का दोषसिद्धि और सजा का आदेश रद्द किया जाता है। निचली अदालत ने बिरावास गांव में शादी राम की हत्या के लिए मदन लाल, जगमाल सिंह, लाल चंद, सुनील कुमार, संजीव कुमार और मुन्नी देवी को हत्या और साजिश के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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