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माता के नौ स्वरूपों की पूजा से दूर होते हैं सभी कष्ट : महंत अशोक गिरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2022 12:39 AM IST
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Worshiping nine forms of Mother removes all sufferings : Mahant Ashok Giri
नवरात्र की पूर्व संध्या पर सराय चौपटा बाजार में माता की प्रतिमा की खरीददारी करतीं महिला श्रद्धा? - फोटो : Bhiwani
भिवानी। हिंदु धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। नवरात्रों का शुभारंभ शनिवार दो अप्रैल से किया जा रहा है। नवरात्रों में नौ दिन तक माता को नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है, ताकि परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि बनी रहे। इन दिनों में मां के नौ स्वरूपों की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। यह बात हालुवास गेट स्थित बाबा जहरगिरी आश्रम के पीठाधीश्वर महंत डॉ. अशोक गिरी ने कही।
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उन्होंने कहा कि नवरात्रों के नौ दिनों तक लगातार जहरगिरी आश्रम में हवन का आयोजन भी किया जाएगा। दो अप्रैल से हिंदू नववर्ष विक्रम संवत्सर 2079 का आरंभ होगा। इस बार संवत्सर का नाम नल रहेगा। नव संवत्सर के राजा शनि होंगे और मंत्री गुरुदेव बृहस्पति होंगे। शास्त्रों अनुसार जिस वार को नव संवत्सर का आरंभ होता है, उस वार का अधिपति ग्रह वर्ष का राजा कहलाता है। महंत ने कहा कि संवत्सर का अर्थ है सम+वत्सर यानी पूर्ण वर्ष। शास्त्रों के अनुसार ब्रह्माजी ने इस दिन संपूर्ण सृष्टि और लोकों का सृजन किया था। इसी दिन भगवान विष्णु का मत्स्यावतार भी हुआ था। हिंदू शास्त्रों के अनुसार नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है।
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भगवती का स्मरण करने के बाद करें कलश स्थापित
महंत ने कहा कि नवरात्रि के प्रथम दिवस पर भगवती का स्मरण कर कलश स्थापित करें व मां का षोड्शोपचार विधि से पूजन करें। महंत ने कहा कि पूजा-अर्चना शुभ मुहूर्त सुबह पांच बजकर 45 मिनट से आठ बजकर 12 मिनट तक रहेगा। उन्होंने पूजा विधि बताते हुए कहा कि ध्यान, आह्वान, पाद्य, अर्घ्य, स्नान, वस्त्र, गंध, कुमकुम, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल इत्यादि अर्पण कर प्रार्थना करने के लिए यह नववर्ष मंगलकारक, सुख कारक, समृद्धिदायक हो यथा संभव दुर्गासप्तशती अन्यथा सिद्धकुंजिका स्तोत्र का पाठ करें। महंत ने कहा कि माता के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं।
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