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Bhiwani News: शहर में प्रशासन की नाक तले चल रहा पानी का खेल, ठेकेदारों के आगे सरकारी सिस्टम फेल
Mon, 25 Mar 2024 12:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 25 Mar 2024 12:12 AM IST
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भिवानी। शहर में ठीक प्रशासन की नाक तले पानी का खेल चल रहा है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के ठेकेदारों के आगे सरकारी सिस्टम भी फेल है। महम रोड स्थित पुराने जलघर से पानी के टैंकर शहर की बाहरी कॉलोनियों की लोगों की प्यास बुझाने के लिए हैं, मगर उन टैंकरों से औद्योगिक इकाइयों में धड़ल्ले से बिक्री कर सरकार को भी मोटा चूना लगाया जा रहा है।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों की मिलीभगत से पानी के टैंकर सरकार से भुगतान पाने के साथ-साथ औद्योगिक इकाई मालिकों से भी खूब पैसा वसूल रहे हैं, जबकि बाहरी कॉलोनियों के लोग खाली बर्तनों के साथ टैंकर आने की बाट देख मायूसी में अपने नसीब को कोस रहे हैं।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के पानी टैंकरों की कालाबाजारी के इस खेल का पूर्व जिला पार्षद ईश्वर मान ने स्टिंग ऑपरेशन भी कर दिया है। इससे पहले भी ईश्वर मान जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों और ठेकेदारों के पानी के इस खेल की पोल खोल चुके हैं। दरअसल इनदिनों नहरी पानी कम आने की वजह से जलघर के टैंक खाली हैं। पूरा शहर पानी की राशनिंग झेल रहा है और पानी की बूंद-बूंद को लोग तरस रहे हैं।
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ऐसे हालातों में भी जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के ठेकेदार और अधिकारी आपदा में अवसर तलाशने से नहीं चूक रहे हैं। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा गर्मियों के दौरान शहर की उन बाहरी कॉलोनियों में पानी के टैंकर भिजवाए जाते हैं, जहां पानी की लाइनें नहीं हैं। ये टैंकर विभाग अपने खर्च पर मुफ्त शहरवासियों को मुहैया कराता है। इसके लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भी प्रति टैंकर के हिसाब से ठेकेदारों को 400 से 600 रुपये का भुगतान भी करता है। ये पानी के टैंकर महम रोड स्थित जलघर पर टैंकर स्टेशन पर ही फिलिंग किए जाते हैं, जहां पानी मीठा और स्वच्छ होता है।
ऐसे चल रहा है पानी का खेल
महम रोड स्थित जलघर में पानी टैंकर फिलिंग स्टेशन से प्रत्येक टैंकर की एंट्री और एग्जिट का रजिस्टर में हिसाब किताब दर्ज किया जाता है। यह भी दर्ज होता है कि पानी का टैंकर किस जगह और कौन सी कॉलोनी में जाएगा। इसके आदेश विभाग का एसडीओ या जेई देता है। लेकिन ठेकेदार के पानी टैंकर चालक रजिस्टर में एंट्री दर्ज किसी कॉलोनी की करते हैं और फिर सीधे औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 की तरफ निकल पड़ते हैं, जहां औद्योगिक इकाइयों के अंदर पैसे लेकर ये टैंकर खाली कर दिए जाते हैं। इसकी स्टिंग ऑपरेशन में पूर्व जिला पार्षद ईश्वर मान ने कई टैंकरों द्वारा पानी की कालाबाजारी की वीडियो भी बनाई है।
पिछले साल भी पानी की कालाबाजारी का खूब चला था काला धंधा, प्रशासन ने लिया था संज्ञान
पिछले साल गर्मियों में भी पानी की कालाबाजारी का काला धंधा खूब चला था। जिला प्रशासन ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया तो विभागीय अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया और प्रत्येक टैंकर की मॉनिटरिंग की जाने लगी। लेकिन अब फिर से अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत से ये काला धंधा फिर फलफूल रहा है। अभी तो पूरा शहर पानी का गंभीर संकट झेल रहा है जबकि गर्मी में अभी से पानी की बूंद-बूंद को लोग तरस गए हैं। चुनावी माहौल में पानी की ये कालाबाजारी अधिकारियों पर भी भारी पड़ सकती है।
सप्ताह भर से नहीं आ रहे पानी के टैंकर
शहर की बाहरी कॉलोनी सूर्य नगर, राजीव कॉलोनी और कोंट रोड क्षेत्र वासियों का कहना है कि पिछले सप्ताह भर से पानी के टैंकर नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि कॉलोनी में भूमिगत पानी भी पीने लायक नहीं है। न ही सप्लाई में पानी आ रहा है। इसलिए विभाग को काफी बार कॉल किए जाने पर भी पानी के टैंकर भेजने की अधिकारी तो बोल देते हैं, मगर टैंकर नहीं आ रहे हैं।
औद्योगिक क्षेत्र में है पानी के टैंकरों की इसलिए डिमांड
शहर के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 में भूमिगत जल स्तर पीने लायक नहीं है। हैंडपंप और बोरवेल खारा पानी उगल रहे हैं। इसलिए औद्योगिक इकाइयों को लेबर इस्तेमाल व अन्य कार्यों के लिए पानी के टैंकर ही मंगवाने पड़ते हैं। यहां जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के ठेकेदार आम के आम और गुठलियों के दाम की नीति अपना पानी के दोहरा भुगतान कराकर सरकार को भी चूना लगा खूब चांदी कूट रहे हैं।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के ठेकेदार और अधिकारी मिलीभगत कर जनता को मुफ्त मिलने वाले पानी के हक पर डाका डाल इस आपदा में अवसर की नीति पर चल सरकार को चूना लगा रहे हैं। जिन लोगों के लिए ये पानी के टैंकर विभाग भिजवा रहा है, वहां तक ये पहुंचते ही नहीं हैं, इन्हें भरने के बाद तुरंत इन्हें बेच दिया जाता है। इसकी वीडियो भी उच्चाधिकारियों को शिकायत के साथ सौंपी है, इस मामले की विजिलेंस जांच कर शामिल ठेकेदार और अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
- ईश्वर मान, पूर्व जिला पार्षद।
मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला अभी तक नहीं आया है। अगर ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच कराएंगे। शहरवासियों की पेयजल जरूरतों को पूरा करना प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी बनती है। लोगों से भी पानी बचाने की अपील की जा रही है।
-नरेश नरवाल, उपायुक्त, भिवानी।
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जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों की मिलीभगत से पानी के टैंकर सरकार से भुगतान पाने के साथ-साथ औद्योगिक इकाई मालिकों से भी खूब पैसा वसूल रहे हैं, जबकि बाहरी कॉलोनियों के लोग खाली बर्तनों के साथ टैंकर आने की बाट देख मायूसी में अपने नसीब को कोस रहे हैं।
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जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के पानी टैंकरों की कालाबाजारी के इस खेल का पूर्व जिला पार्षद ईश्वर मान ने स्टिंग ऑपरेशन भी कर दिया है। इससे पहले भी ईश्वर मान जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों और ठेकेदारों के पानी के इस खेल की पोल खोल चुके हैं। दरअसल इनदिनों नहरी पानी कम आने की वजह से जलघर के टैंक खाली हैं। पूरा शहर पानी की राशनिंग झेल रहा है और पानी की बूंद-बूंद को लोग तरस रहे हैं।
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ऐसे हालातों में भी जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के ठेकेदार और अधिकारी आपदा में अवसर तलाशने से नहीं चूक रहे हैं। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा गर्मियों के दौरान शहर की उन बाहरी कॉलोनियों में पानी के टैंकर भिजवाए जाते हैं, जहां पानी की लाइनें नहीं हैं। ये टैंकर विभाग अपने खर्च पर मुफ्त शहरवासियों को मुहैया कराता है। इसके लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग भी प्रति टैंकर के हिसाब से ठेकेदारों को 400 से 600 रुपये का भुगतान भी करता है। ये पानी के टैंकर महम रोड स्थित जलघर पर टैंकर स्टेशन पर ही फिलिंग किए जाते हैं, जहां पानी मीठा और स्वच्छ होता है।
ऐसे चल रहा है पानी का खेल
महम रोड स्थित जलघर में पानी टैंकर फिलिंग स्टेशन से प्रत्येक टैंकर की एंट्री और एग्जिट का रजिस्टर में हिसाब किताब दर्ज किया जाता है। यह भी दर्ज होता है कि पानी का टैंकर किस जगह और कौन सी कॉलोनी में जाएगा। इसके आदेश विभाग का एसडीओ या जेई देता है। लेकिन ठेकेदार के पानी टैंकर चालक रजिस्टर में एंट्री दर्ज किसी कॉलोनी की करते हैं और फिर सीधे औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 की तरफ निकल पड़ते हैं, जहां औद्योगिक इकाइयों के अंदर पैसे लेकर ये टैंकर खाली कर दिए जाते हैं। इसकी स्टिंग ऑपरेशन में पूर्व जिला पार्षद ईश्वर मान ने कई टैंकरों द्वारा पानी की कालाबाजारी की वीडियो भी बनाई है।
पिछले साल भी पानी की कालाबाजारी का खूब चला था काला धंधा, प्रशासन ने लिया था संज्ञान
पिछले साल गर्मियों में भी पानी की कालाबाजारी का काला धंधा खूब चला था। जिला प्रशासन ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया तो विभागीय अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया और प्रत्येक टैंकर की मॉनिटरिंग की जाने लगी। लेकिन अब फिर से अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत से ये काला धंधा फिर फलफूल रहा है। अभी तो पूरा शहर पानी का गंभीर संकट झेल रहा है जबकि गर्मी में अभी से पानी की बूंद-बूंद को लोग तरस गए हैं। चुनावी माहौल में पानी की ये कालाबाजारी अधिकारियों पर भी भारी पड़ सकती है।
सप्ताह भर से नहीं आ रहे पानी के टैंकर
शहर की बाहरी कॉलोनी सूर्य नगर, राजीव कॉलोनी और कोंट रोड क्षेत्र वासियों का कहना है कि पिछले सप्ताह भर से पानी के टैंकर नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि कॉलोनी में भूमिगत पानी भी पीने लायक नहीं है। न ही सप्लाई में पानी आ रहा है। इसलिए विभाग को काफी बार कॉल किए जाने पर भी पानी के टैंकर भेजने की अधिकारी तो बोल देते हैं, मगर टैंकर नहीं आ रहे हैं।
औद्योगिक क्षेत्र में है पानी के टैंकरों की इसलिए डिमांड
शहर के औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 में भूमिगत जल स्तर पीने लायक नहीं है। हैंडपंप और बोरवेल खारा पानी उगल रहे हैं। इसलिए औद्योगिक इकाइयों को लेबर इस्तेमाल व अन्य कार्यों के लिए पानी के टैंकर ही मंगवाने पड़ते हैं। यहां जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के ठेकेदार आम के आम और गुठलियों के दाम की नीति अपना पानी के दोहरा भुगतान कराकर सरकार को भी चूना लगा खूब चांदी कूट रहे हैं।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के ठेकेदार और अधिकारी मिलीभगत कर जनता को मुफ्त मिलने वाले पानी के हक पर डाका डाल इस आपदा में अवसर की नीति पर चल सरकार को चूना लगा रहे हैं। जिन लोगों के लिए ये पानी के टैंकर विभाग भिजवा रहा है, वहां तक ये पहुंचते ही नहीं हैं, इन्हें भरने के बाद तुरंत इन्हें बेच दिया जाता है। इसकी वीडियो भी उच्चाधिकारियों को शिकायत के साथ सौंपी है, इस मामले की विजिलेंस जांच कर शामिल ठेकेदार और अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
- ईश्वर मान, पूर्व जिला पार्षद।
मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला अभी तक नहीं आया है। अगर ऐसा हो रहा है तो इसकी जांच कराएंगे। शहरवासियों की पेयजल जरूरतों को पूरा करना प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी बनती है। लोगों से भी पानी बचाने की अपील की जा रही है।
-नरेश नरवाल, उपायुक्त, भिवानी।