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Bhiwani: चांग की सब्जियों का स्वाद लाजवाब; उत्पादकों के पूरे हुए ख्वाब, किसान साल में कमा रहे लाखों
Wed, 03 Jan 2024 03:39 PM IST
नवीन दलाल
राजेंद्र सिंह, भिवानी (हरियाणा)
राजेंद्र सिंह, भिवानी (हरियाणा)
Published by: नवीन दलाल
Updated Wed, 03 Jan 2024 03:39 PM IST
सार
आम तौर पर किसान गेहूं, बाजरा, सरसों, धान सहित अन्य प्रकार की फसलें उगाते हैं, मगर चांग के अधिकतर किसानों के खेतों में सब्जियों की फसल है। किसानों ने इस समय फूल गोभी, बंद गोभी, प्याज, धनिया, गाजर, शलगम, मूली,बैंगन सहित अन्य प्रकार की सब्जियां अपने खेतों में उगा रखी हैं।
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किसान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भिवानी के गांव चांग की सब्जियों का स्वाद लाजवाब है। जिसकी चर्चा न केवल हरियाणा बल्कि पड़ोसी राज्यों की मंडियों तक है। यहां पैदा की गईं सब्जियों के साथ फल भी बेहतरीन हैं। लाल रंग का अमरूद और एप्पल बैर तो पंजाब तक पसंद किया जा रहा है। गांव व आसपास के किसान पारंपरिक खेती की बजाय सब्जी उत्पादन कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। गांव चांग के किसान लगातार कई वर्षों से सब्जी उत्पादन में जुटे हैं।
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आम तौर पर किसान गेहूं, बाजरा, सरसों, धान सहित अन्य प्रकार की फसलें उगाते हैं, मगर चांग के अधिकतर किसानों के खेतों में सब्जियों की फसल है। किसानों ने इस समय फूल गोभी, बंद गोभी, प्याज, धनिया, गाजर, शलगम, मूली,बैंगन सहित अन्य प्रकार की सब्जियां अपने खेतों में उगा रखी हैं। किसान सरदारा, अजय व दिनेश ने बताया कि वे करीब 15 सालों से सब्जी उत्पादन का काम रहे हैं और मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। संवाद
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सब्जी की खेती में रोज आमदनी
किसान दिनेश ने बताया कि पारंपरिक खेती से छह माह बाद आमदनी होती है, लेकिन सब्जी की खेती से हर रोज आमदनी हो रही है। पारंपरिक खेती से छह माह बाद आमदनी होती है और लगातार छह माह तक उन्हें आमदनी के लिए इंतजार करना पड़ता है और सब्जी उत्पादन से उन्हें सब्जी की बिक्री से हर रोज आमदनी होती रहती है और उनका घर खर्च आसानी से चलता रहता है। खेती कार्यों में होने वाला खर्च भी निकलता रहता है।
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पारंपरिक खेती की तुलना में नुकसान की संभावना कम
किसान सरदारा ने बताया कि वह पिछले कई सालों से सब्जी उत्पादन का कार्य कर रहा है। किसान ने बताया कि मोटे अनाज की खेती की बजाय सब्जी उत्पाद का कार्य अधिक फायदेमंद है। सब्जी उत्पादन के कार्य से उन्हें अच्छी आमदनी होती है। उन्होंने इस समय फूल गोभी, बैंगन सहित अन्य कई सब्जियां लगा रखी हैं। बाजार में उचित भाव मिलने पर उनका खेती में होने वाला खर्च व अन्य प्रकार के खर्च आसानी से निकल जाते हैं।
पारंपरिक खेती से दोगुनी कमाई
किसान अजय ने बताया कि वह लगातार 10 सालों से खेती का कार्य कर रहा है। किसान ने बताया कि मोटे अनाज की एक साल में दो फसलें ही ले सकते है। लेकिन सब्जी उत्पाद में वे एक एकड़ में कई तरह की सब्जियां उगा लेते हैं और मुनाफा कमा लेते हैं। किसान अजय ने बताया कि उन्होंने इस समय गोभी, गाजर, प्याज व हरा धनिया एक साथ लगा रखा है। एक साथ दो तीन तरह की सब्जियां उगाने से उन्हें आमदनी दोगुनी हो जाती है, जिस कारण वह मोटी खेती की बजाय सब्जियां उगाने में ज्यादा रुचि दिखाते हैं।