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ऑनलाइन शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग छात्रों के लिए समावेशी और सुलभ शिक्षण वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण : कुलपति
Tue, 16 Sep 2025 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 16 Sep 2025 01:15 AM IST
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चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम मेंमौजूद अतिथि के साथ कुलपति प्रो. दीप्ति धर्
भिवानी। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय द्वारा उच्च शिक्षा में ऑनलाइन शैक्षणिक संसाधन विषय पर आयोजित एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यक्रम में कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी ने कहा कि ऑनलाइन शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग छात्रों के लिए समावेशी और सुलभ शिक्षण वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के नए परिसर प्रेम नगर स्थित श्रीनिवास रामानुजन भवन के सेमिनार हॉल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. दिनेश मदान ने डिजिटल शिक्षण मंचों के महत्व और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने पर प्रकाश डालते हुए की। कुलपति प्रो. धर्माणी ने शिक्षकों के बीच नवाचार, सहयोग और सतत व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
मुख्य व्याख्यान प्रो. मधुलिका कौशिक, कुलपति, उषा मार्टिन विश्वविद्यालय, रांची, झारखंड द्वारा दिया गया। उन्होंने ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज पर चर्चा करते हुए उनके परिचय और लाइसेंसिंग के पहलुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। प्रो. कौशिक ने समझाया कि ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को कैसे बेहतर बना सकते हैं तथा खुले तौर पर उपलब्ध शैक्षणिक सामग्री छात्रों और शिक्षकों के लिए किस प्रकार उपयोगी है।
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प्रो. कौशिक ने लाइसेंसिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए जिम्मेदार उपयोग और सामग्री साझा करने की सर्वोत्तम प्रक्रिया भी साझा की। कार्यक्रम में शिक्षकों ने सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया और शिक्षण पद्धति, पाठ्यक्रम विकास और छात्र सहभागिता को सशक्त बनाने हेतु उपयोगी रणनीतियों पर विचार विमर्श किया। समापन सत्र में प्रो. मधुलिका कौशिक को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मोनिका मिगलानी, नोडल अधिकारी, ने किया, जिन्होंने आयोजन सचिव के रूप में भी भूमिका निभाई।
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कार्यक्रम की शुरुआत डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. दिनेश मदान ने डिजिटल शिक्षण मंचों के महत्व और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने पर प्रकाश डालते हुए की। कुलपति प्रो. धर्माणी ने शिक्षकों के बीच नवाचार, सहयोग और सतत व्यावसायिक विकास को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
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मुख्य व्याख्यान प्रो. मधुलिका कौशिक, कुलपति, उषा मार्टिन विश्वविद्यालय, रांची, झारखंड द्वारा दिया गया। उन्होंने ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज पर चर्चा करते हुए उनके परिचय और लाइसेंसिंग के पहलुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। प्रो. कौशिक ने समझाया कि ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंच को कैसे बेहतर बना सकते हैं तथा खुले तौर पर उपलब्ध शैक्षणिक सामग्री छात्रों और शिक्षकों के लिए किस प्रकार उपयोगी है।
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प्रो. कौशिक ने लाइसेंसिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए जिम्मेदार उपयोग और सामग्री साझा करने की सर्वोत्तम प्रक्रिया भी साझा की। कार्यक्रम में शिक्षकों ने सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया और शिक्षण पद्धति, पाठ्यक्रम विकास और छात्र सहभागिता को सशक्त बनाने हेतु उपयोगी रणनीतियों पर विचार विमर्श किया। समापन सत्र में प्रो. मधुलिका कौशिक को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. मोनिका मिगलानी, नोडल अधिकारी, ने किया, जिन्होंने आयोजन सचिव के रूप में भी भूमिका निभाई।