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Bhiwani News: सीईटी परीक्षा में मामा-भांजी बने दिव्यांग अभ्यर्थियों का सहारा
Sun, 27 Jul 2025 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sun, 27 Jul 2025 01:10 AM IST
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दृष्टिबाधित दंपति ओमप्रकाश व उनकी पत्नी जसवीर देवी कौशिक के साथ छात्रा नितिका।
भिवानी। सीईटी परीक्षा के दौरान जहां सरकार और प्रशासन ने परीक्षा के सुचारु संचालन में अपनी भूमिका निभाई वहीं भिवानी के मामा-भांजी की जोड़ी ने मानवता और सेवा भाव की मिसाल पेश की। इन दोनों ने दो अलग-अलग दिव्यांग महिला परीक्षार्थियों की मदद कर न केवल परीक्षा के यज्ञ में अपनी आहुति दी बल्कि समाज में संवेदनशीलता का संदेश भी दिया।
गांव उमरावत निवासी दृष्टिबाधित दंपति ओमप्रकाश और उनकी पत्नी जसवीर देवी कौशिक की ओर से जब 11वीं कक्षा की छात्रा नितिका दूहन से सीईटी परीक्षा में लेखक बनने का आग्रह किया गया तो नितिका ने अपने परिजनों की सहमति से सहर्ष यह जिम्मेदारी स्वीकार की। नितिका ने भिवानी के सेक्टर-13 स्थित चौधरी बंसीलाल पॉलिटेक्निक कॉलेज में दिव्यांग जसवीर देवी के लिए परीक्षा पत्र लिखा।
इसी तरह नितिका के मामा विकास कुमार जो कि तोशाम में ग्राम सचिव के पद पर कार्यरत हैं, से जब पास के गांव ढाणी सरल की 70 प्रतिशत अस्थिबाधित परीक्षार्थी पूनम और उसके पिता ने परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने में मदद मांगी तो विकास ने ड्यूटी के दौरान ही निजी वाहन की व्यवस्था कर दोनों को आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल, भिवानी तक सकुशल पहुंचाया।
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मामा-भांजी की यह मदद केवल सहानुभूति नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करने का प्रयास थी कि कोई भी दिव्यांग अभ्यर्थी परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण अवसर से वंचित न रह जाए। दोनों ने साबित किया कि एक संवेदनशील समाज में केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि व्यक्तिगत सहयोग भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
गौरतलब है कि सीईटी 2025 हरियाणा में रोजगार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परीक्षा है जो तीन साल के अंतराल के बाद आयोजित हो रही है। इस परीक्षा में कोई भी योग्य अभ्यर्थी चूकना नहीं चाहता। लेकिन दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए इसमें भाग लेना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में मामा-भांजी द्वारा निभाई गई यह भूमिका न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि समाज को भी आईना दिखाने वाली है। साथ ही परीक्षा के दौरान कई सामाजिक संस्थाओं ने भी परीक्षार्थियों के ठहरने और यात्रा के लिए नि:शुल्क व्यवस्थाएं कर प्रशासन के प्रयासों को सहयोग प्रदान किया।
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गांव उमरावत निवासी दृष्टिबाधित दंपति ओमप्रकाश और उनकी पत्नी जसवीर देवी कौशिक की ओर से जब 11वीं कक्षा की छात्रा नितिका दूहन से सीईटी परीक्षा में लेखक बनने का आग्रह किया गया तो नितिका ने अपने परिजनों की सहमति से सहर्ष यह जिम्मेदारी स्वीकार की। नितिका ने भिवानी के सेक्टर-13 स्थित चौधरी बंसीलाल पॉलिटेक्निक कॉलेज में दिव्यांग जसवीर देवी के लिए परीक्षा पत्र लिखा।
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इसी तरह नितिका के मामा विकास कुमार जो कि तोशाम में ग्राम सचिव के पद पर कार्यरत हैं, से जब पास के गांव ढाणी सरल की 70 प्रतिशत अस्थिबाधित परीक्षार्थी पूनम और उसके पिता ने परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने में मदद मांगी तो विकास ने ड्यूटी के दौरान ही निजी वाहन की व्यवस्था कर दोनों को आदर्श सीनियर सेकेंडरी स्कूल, भिवानी तक सकुशल पहुंचाया।
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मामा-भांजी की यह मदद केवल सहानुभूति नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करने का प्रयास थी कि कोई भी दिव्यांग अभ्यर्थी परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण अवसर से वंचित न रह जाए। दोनों ने साबित किया कि एक संवेदनशील समाज में केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि व्यक्तिगत सहयोग भी बड़ी भूमिका निभा सकता है।
गौरतलब है कि सीईटी 2025 हरियाणा में रोजगार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परीक्षा है जो तीन साल के अंतराल के बाद आयोजित हो रही है। इस परीक्षा में कोई भी योग्य अभ्यर्थी चूकना नहीं चाहता। लेकिन दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए इसमें भाग लेना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में मामा-भांजी द्वारा निभाई गई यह भूमिका न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि समाज को भी आईना दिखाने वाली है। साथ ही परीक्षा के दौरान कई सामाजिक संस्थाओं ने भी परीक्षार्थियों के ठहरने और यात्रा के लिए नि:शुल्क व्यवस्थाएं कर प्रशासन के प्रयासों को सहयोग प्रदान किया।